बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP) — प्रश्न, व्याख्या और मॉक टेस्ट
CTET, UPTET और BPSC TRE जैसी शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए विकास के सिद्धांत, अधिगम, बुद्धि-व्यक्तित्व, समावेशी शिक्षा, शिक्षण विधियाँ और मूल्यांकन के मुफ़्त MCQ, हर उत्तर की विस्तृत व्याख्या के साथ।
वाइगोत्सकी के अनुसार, 'संज्ञानात्मक विकास' (Cognitive Development) में किसकी भूमिका सर्वोपरि है?
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत: लेव वाइगोत्सकी (Lev Vygotsky) के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत (Socio-cultural Theory of Cognitive Development) के अनुसार, बच्चों के…
भावात्मक स्वास्थ्य उचित रूप से व्यक्त करने की क्षमता में मदद करता है .....
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत: भावात्मक या संवेगात्मक स्वास्थ्य (Emotional Health) किसी व्यक्ति के जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू है।
जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित ज्ञान-प्रतिनिधित्व की तीनों अवस्थाओं—'क्रियात्मक अवस्था' (Enactive Stage), 'प्रतिबिम्बात्मक अवस्था' (Iconic Stage), और 'संकेतात्मक अवस्था'…
Read more →'अभिप्रेरणा (Motivation)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) द्वारा प्रतिपादित 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs: शारीरिक, सुरक्षा, सामाजिक, सम्मान, और आत्म-सिद्धि की आवश्यकताएं) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा…
Read more →लेव वाइगोत्스키 के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत के अनुसार, बच्चों के विकास में मुख्य आधार क्या है?
लेव वाइगोत्스키 के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत के अनुसार, बच्चों का संज्ञानात्मक विकास समाज और संस्कृति के साथ अंतःक्रिया (Social Interaction) के माध्यम से होता है।
हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'अंतरा-वैयक्तिक बुद्धि या इंट्रा-पर्सनल इंटेलिजेंस' (Intrapersonal Intelligence)—जिसे उस विशिष्ट संज्ञानात्मक क्षमता…
Read more →'जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में, उनके द्वारा प्रतिपादित चार अवस्थाओं—'संवेदी-गामक अवस्था' (Sensorimotor Stage), 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage), 'मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational…
Read more →पियाजे के अनुसार, 'अहंकेन्द्रित' (Egocentric) वाक किस अवस्था में पाया जाता है?
पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (2-7 वर्ष) में बालक स्वयं से बातें करता है क्योंकि वह दूसरों के दृष्टिकोण को नहीं समझ पाता, इसे 'अहंकेन्द्रित' वाक कहते हैं।