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अल्फ्रेड बिने के मूल परीक्षण को 'स्टैनफोर्ड-बिने स्केल' के रूप में लुईस टर्मन द्वारा संशोधित और मानकीकृत किया गया था।
चार्ल्स स्पीयरमैन ने बुद्धि का द्वि-कारक सिद्धांत प्रतिपादित किया था जिसमें सामान्य (G) और विशिष्ट (S) कारक होते हैं।
योगात्मक मूल्यांकन का मुख्य उपयोग शिक्षण सत्र, पाठ्यक्रम या सत्र के अंत में किया जाता है ताकि छात्र की कुल उपलब्धि का मापन हो सके।
सृजनात्मकता का संबंध अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) से होता है, क्योंकि इसमें व्यक्ति एक समस्या के लिए अनेक समाधान सोचता है।
कोई भी अधिगम सामग्री छात्र के लिए तभी अर्थपूर्ण होती है जब वह उसके पूर्व अनुभवों और वास्तविक जीवन से जुड़ी हो।
समीपस्थ विकास का क्षेत्र (ZPD) उस कार्य स्तर को दर्शाता है जिसे बालक बड़ों की सहायता से सीख सकता है, लेकिन अकेले नहीं।
मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (7-11 वर्ष) वह चरण है जिसमें बालक तार्किक रूप से मूर्त वस्तुओं के बारे में सोच सकता है।
रचनात्मक मूल्यांकन का उद्देश्य पढ़ाने के दौरान ही छात्र की समझ की कमियों का पता लगाकर उन्हें सुधारना है।
प्रारंभिक बाल्यावस्था (Early Childhood) भाषा सीखने के लिए सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण काल माना जाता है।
अल्बर्ट बंडूरा के अनुसार, सामाजिक अधिगम में बालक दूसरों के व्यवहार का प्रेक्षण (Observation) करके और उनका अनुकरण (Imitation) करके सीखता है।
प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector) में वे गतिविधियाँ आती हैं जो सीधे प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी होती हैं, जैसे कृषि, मत्स्य पालन, खनन और पशुपालन। बैंकिंग 'तृतीयक क्षेत्र' में आती है।
उत्तर-पारंपरिक स्तर पर व्यक्ति समाज के बने-बनाए नियमों से ऊपर उठकर मानवीय अधिकारों और न्याय के सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेता है।
बी.एफ. स्किनर के अनुसार, सही अनुक्रियाओं के बाद सकारात्मक पुनर्बलन देने से वह व्यवहार बार-बार दोहराया जाता है (अधिगम होता है)।
स्मृति प्रक्रिया में 'कूट संकेतन' (Encoding) पहला चरण है, जिसमें सूचना को मस्तिष्क में ग्रहण किया जाता है।
निदानात्मक मूल्यांकन का उद्देश्य यह पहचानना है कि छात्र को किसी विषय को समझने में कहाँ और क्यों कठिनाई हो रही है, ताकि उपचारात्मक उपाय किए जा सकें।
निदानात्मक परीक्षण का प्रयोग छात्रों की सीखने की विशिष्ट समस्याओं और उनकी जड़ तक पहुँचने के लिए किया जाता है।
9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सबसे बुजुर्ग सदस्य होने के नाते अस्थायी अध्यक्ष चुना गया था।
वास्तविक आयु का अर्थ जन्म की तारीख से लेकर वर्तमान समय तक की आयु (वर्षों में) होती है, जिसका उपयोग IQ सूत्र में किया जाता है।
जे.पी. गिलफोर्ड ने बुद्धि का संरचना मॉडल (SI Model) दिया, जिसमें उन्होंने बुद्धि को तीन आयामों: संक्रिया (Operations), विषय-वस्तु (Contents) और उत्पाद (Products) में वर्गीकृत किया है।
विभेदीकृत शिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक छात्र की विशिष्ट क्षमता, रुचि और सीखने की गति के अनुरूप शिक्षण विधियों में बदलाव करना है।