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अल्बर्ट बंडूरा के अनुसार, सामाजिक अधिगम में बालक दूसरों के व्यवहार का प्रेक्षण (Observation) करके और उनका अनुकरण (Imitation) करके सीखता है।
प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector) में वे गतिविधियाँ आती हैं जो सीधे प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी होती हैं, जैसे कृषि, मत्स्य पालन, खनन और पशुपालन। बैंकिंग 'तृतीयक क्षेत्र' में आती है।
स्मृति प्रक्रिया में 'कूट संकेतन' (Encoding) पहला चरण है, जिसमें सूचना को मस्तिष्क में ग्रहण किया जाता है।
निदानात्मक मूल्यांकन का उद्देश्य यह पहचानना है कि छात्र को किसी विषय को समझने में कहाँ और क्यों कठिनाई हो रही है, ताकि उपचारात्मक उपाय किए जा सकें।
विभेदीकृत शिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक छात्र की विशिष्ट क्षमता, रुचि और सीखने की गति के अनुरूप शिक्षण विधियों में बदलाव करना है।
कोहलर के गेस्टाल्ट सिद्धांत में माना गया है कि समस्या के सभी पहलुओं को एक साथ देखने पर अचानक 'सूझ' (Insight) का उदय होता है।
समायोजन का अर्थ है नई सूचनाओं के कारण अपने मौजूदा मानसिक ढांचे (Schema) को संशोधित या परिवर्तित करना।
बी.एफ. स्किनर का क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत पूरी तरह से इस पर आधारित है कि पुरस्कार (सकारात्मक पुनर्बलन) व्यवहार को दोहराने के लिए प्रेरित करता है।
CCE का उद्देश्य छात्र के शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक दोनों पक्षों का समय-समय पर आकलन कर उसे समग्र रूप से विकसित करना है।
समावेशी शिक्षा तभी सफल होती है जब शिक्षण विधियों और वातावरण को सभी प्रकार के अधिगमकर्ताओं की आवश्यकताओं के अनुरूप लचीला बनाया जाए।
WAIS की विशेषता यह है कि यह बुद्धि को विभिन्न आयामों (शाब्दिक और क्रियात्मक) में मापकर एक व्यापक प्रोफाइल प्रदान करता है।
थॉर्नडाइक ने पहेली बॉक्स (Puzzle Box) में भूखी बिल्ली का प्रयोग करके प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत दिया था।
मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (7-11 वर्ष) में बालक वस्तुओं को उनके आकार, वजन या लंबाई के आधार पर क्रमबद्ध करने की क्षमता प्राप्त कर लेता है।
भारत में प्रतिवर्ष 29 अगस्त को हॉकी के जादूगर 'मेजर ध्यानचंद' के जन्मदिन के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है।
निदानात्मक मूल्यांकन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि छात्र कहाँ और क्यों कठिनाई का सामना कर रहे हैं, ताकि उपचारात्मक शिक्षण दिया जा सके।
वस्तु स्थायित्व का अर्थ है यह समझना कि वस्तुएं तब भी मौजूद रहती हैं जब वे दिखाई न दें। यह गुण संवेदी-पेशीय अवस्था (0-2 वर्ष) में विकसित होता है।
आंतरिक प्रेरणा सबसे प्रभावी है क्योंकि यह छात्र में सीखने की स्वाभाविक जिज्ञासा और रुचि पैदा करती है।
वाइगोत्सकी का मानना है कि भाषा और विचार अलग-अलग शुरू होते हैं, लेकिन भाषा चिंतन को दिशा देने वाला मुख्य उपकरण है।
बुद्धि के संरचना मॉडल (SI Model) का प्रतिपादन जे.पी. गिलफोर्ड ने किया था, जिसमें उन्होंने बुद्धि के तीन आयाम बताए थे।
औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (11 वर्ष से ऊपर) में बालक वास्तविक दुनिया से परे अमूर्त अवधारणाओं और परिकल्पनाओं पर चिंतन करने में सक्षम हो जाता है।