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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XII' के अंतर्गत 'वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद' (Finance, Property, Contracts and Suits - अनुच्छेद 264 से 300A) तथा 'संवैधानिक निकायों एवं निधियों' के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 266 के अनुसार भारत और प्रत्येक राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of India/State) में जमा सभी धनराशियाँ संसद या संबंधित राज्य के विधानमंडल द्वारा विनियोग अधिनियम पारित किए बिना किसी भी स्थिति में बाहर नहीं निकाली जा सकती हैं, सिवाय उन व्ययों के जिन्हें संविधान द्वारा सीधे संचित निधि पर भारित (Charged) किया गया है। 2. भारत की संचित निधि पर भारित व्ययों (Expenditure charged upon the Consolidated Fund of India) के संबंध में संसद के दोनों सदनों में चर्चा तो की जा सकती है, किंतु संविधान के अनुच्छेद 113(1) के अनुसार इन व्ययों पर संसद में मतदान (Voting) नहीं कराया जा सकता है। 3. अनुच्छेद 267 के अंतर्गत संसद और राज्य विधानमंडलों को 'लोक लेखा निधि' (Public Account) की स्थापना करने की शक्ति दी गई है, जिसका उपयोग किसी अप्रत्याशित खर्च को पूरा करने के लिए राष्ट्रपति या राज्यपाल की अग्रिम स्वीकृति से किया जाता है, और इसके लिए बाद में संसद या विधानमंडल के अनुमोदन की आवश्यकता होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XX' के अंतर्गत 'संविधान का संशोधन' (Amendment of the Constitution - अनुच्छेद 368) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान में संशोधन करने की शक्ति केवल संसद को प्राप्त है, और इस प्रयोजन के लिए संशोधन का आरंभ संसद के किसी भी सदन में एक विधेयक पेश करके ही किया जा सकता है, न कि किसी राज्य के विधानमंडल में। 2. संविधान के कुछ विशिष्ट प्रावधानों (जैसे राष्ट्रपति के निर्वाचन, संघ और राज्यों की कार्यपालिका शक्तियों के विस्तार, या संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व से संबंधित) में संशोधन करने के लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत (प्रत्येक सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई बहुमत) के साथ-साथ देश के कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा साधारण बहुमत से अनुसमर्थन (Ratification) होना अनिवार्य है। 3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में यह स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी भाग में संशोधन करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है, जिसके अंतर्गत संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) को भी संशोधित किया जा सकता है, बशर्ते इसके लिए देश की जनता से जनमत संग्रह (Referendum) कराया गया हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVI' के अंतर्गत 'कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध' (Special Provisions Relating to Certain Classes - अनुच्छेद 330 से 342A) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 के अनुसार लोकसभा तथा राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) के लिए स्थानों का आरक्षण उन निर्वाचन क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर किया जाता है, और मूल संविधान में यह प्रावधान अनिश्चित काल के लिए लागू किया गया था जिसे कभी भी संविधान संशोधन द्वारा समाप्त नहीं किया जा सकता है। 2. 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण की अवधि को बढ़ाकर 80 वर्ष कर दिया गया, जिसके तहत यह आरक्षण 25 जनवरी 2030 तक प्रभावी रहेगा, किंतु इसी संशोधन द्वारा संसद और विधानसभाओं में आंग्ल-भारतीय (Anglo-Indian) समुदाय के सदस्यों के लिए नामांकित किए जाने वाले स्थानों के विशेष प्रावधान को आगे नहीं बढ़ाया गया, जिससे वह समाप्त हो गया। 3. संविधान के अनुच्छेद 338 और 338A के अंतर्गत क्रमशः 'राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग' (NCSC) और 'राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग' (NCST) की स्थापना की गई है, जिनमें से एनसीएसटी (NCST) का गठन मूल संविधान में ही किया गया था, जबकि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को 102वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2018 द्वारा संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX-B' के अंतर्गत 'सहकारी समितियाँ' (Co-operative Societies - अनुच्छेद 243-ZH से 243-ZT) तथा '97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011' के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा संविधान के भाग III में मूल अधिकारों के अंतर्गत अनुच्छेद 19(1)(c) में संशोधन करके 'सहकारी समितियाँ बनाने का अधिकार' (Right to form co-operative societies) को एक मौलिक अधिकार के रूप में जोड़ा गया। 2. संविधान के भाग IV में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत एक नया अनुच्छेद 43B जोड़ा गया, जिसके अनुसार राज्य सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कामकाज, लोकतांत्रिक नियंत्रण और पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा। 3. संविधान के भाग IX-B के प्रावधानों के अनुसार, किसी सहकारी समिति के निदेशक बोर्ड में अधिकतम सदस्यों की संख्या 25 से अधिक नहीं हो सकती है, तथा इस बोर्ड में अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के लिए एक सीट और महिलाओं के लिए दो सीटें आरक्षित होना अनिवार्य किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'संधारणीय विकास लक्ष्य' (Sustainable Development Goals - SDGs) और 'बहुआयामी गरीबी सूचकांक' (Multidimensional Poverty Index - MPI) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाए गए 2030 एजेंडा के 17 संधारणीय विकास लक्ष्यों (SDGs) में लक्ष्य 1 (Goal 1) सभी रूपों में गरीबी के अंत से संबंधित है, जबकि लक्ष्य 2 (Goal 2) 'शून्य भूख' (Zero Hunger) को प्राप्त करने, खाद्य सुरक्षा में सुधार करने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने का लक्ष्य निर्धारित करता है। 2. भारत में राष्ट्रीय स्तर पर 'बहुआयामी गरीबी सूचकांक' (MPI) का संकलन और प्रकाशन नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीन समान भारांक वाले आयामों के अंतर्गत आने वाले 12 संकेतकों के आधार पर किया जाता है। 3. नीति आयोग द्वारा जारी हालिया MPI रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2015-16 और 2019-21 के बीच भारत में बहुआयामी गरीबी के संदर्भ में सबसे अधिक तीव्र गिरावट उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में दर्ज की गई है, जहाँ सबसे बड़ी संख्या में लोग गरीबी से बाहर आए हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' के अंतर्गत 'आपात उपबंध' (Emergency Provisions - अनुच्छेद 352 से 360) तथा '44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978' के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए युद्ध, बाह्य आक्रमण या 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के आधार पर की जा सकती है, और मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द के स्थान पर 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था जिसे 44वें संशोधन द्वारा बदला गया। 2. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा या उसके निरंतरता को अनुमोदित करने वाले प्रत्येक संकल्प को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा एक मास (30 दिन) के भीतर पारित किया जाना अनिवार्य किया गया है, और यह प्रावधान भी मूल संविधान में 2 माह के स्थान पर 44वें संशोधन द्वारा कड़ा किया गया था। 3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'मिनर्वा मिल्स वाद (1980)' में यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को इस आधार पर न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से बाहर रखा गया है कि यह राष्ट्रपति का विशेषाधिकार है, और आपातकाल लगाने के पीछे के राजनीतिक या तथ्यात्मक कारणों की जाँच अदालतें नहीं कर सकती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विधिक प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत की गई थी, और यह भारत का ऐसा पहला विशेष न्यायिक निकाय है जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) की सख्त प्रक्रियाओं से बंधा हुआ नहीं है, बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत' (Principles of Natural Justice) के आधार पर कार्य करता है। 2. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम के तहत अधिकरण को यह वैधानिक बाध्यता दी गई है कि वह पर्यावरण से संबंधित मामलों के आवेदन या अपील को दर्ज करने की तारीख से अधिकतम 6 महीने के भीतर उसका अंतिम निपटान करेगा। 3. NGT के निर्णयों या आदेशों के विरुद्ध प्रत्यक्ष रूप से सर्वोच्च न्यायालय में अपील केवल 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' के विशिष्ट प्रावधानों के अंतर्गत ही की जा सकती है, और अधिकरण के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालयों (High Courts) के पास अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र (Writ Jurisdiction) का कोई अधिकार नहीं रहता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय जलधाराओं' (Ocean Currents) तथा उनको प्रभावित करने वाले कारकों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महासागरीय जलधाराओं के संचलन को मुख्य रूप से पृथ्वी के घूर्णन (कोरिऑलिस बल), प्रचलित हवाओं (प्राथमिक पवनें), महासागरीय जल के तापमान और घनत्व में भिन्नता तथा महाद्वीपीय तटरेखाओं के आकार द्वारा नियंत्रित किया जाता है। 2. उत्तरी गोलार्ध में महासागरीय जलधाराएँ कोरिऑलिस प्रभाव के कारण अपनी मूल दिशा से दाईं ओर (घड़ी की सुई की दिशा में / Clockwise) तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर (घड़ी की सुई की विपरीत दिशा में / Counter-clockwise) विक्षेपित हो जाती हैं। 3. अटलांटिक महासागर में प्रवाहित होने वाली 'गल्फ स्ट्रीम' (Gulf Stream) एक ठंडी जलधारा है जो मैक्सिको की खाड़ी से उत्तर की ओर बहती हुई यूरोप के पश्चिमी तट पर जलवायु को अत्यधिक ठंडा और शुष्क बना देती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय आय लेखांकन' (National Income Accounting) तथा 'सकल घरेलू उत्पाद' (Gross Domestic Product - GDP) के मापन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी अर्थव्यवस्था की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की गणना करते समय 'उत्पाद विधि' (Product Method / Value Added Method) के अंतर्गत केवल अंतिम वस्तुओं और सेवाओं (Final Goods and Services) के बाजार मूल्य को शामिल किया जाता है, ताकि 'दोहरी गणना' (Double Counting) की समस्या से बचा जा सके। 2. 'सकल राष्ट्रीय उत्पाद' (Gross National Product - GNP) और 'सकल घरेलू उत्पाद' (GDP) के बीच का मुख्य अंतर 'शुद्ध विदेशी आय' (Net Factor Income from Abroad - NFIA) है, जिसका अर्थ है कि GNP में देश के नागरिकों द्वारा विदेशों से अर्जित आय को जोड़ा जाता है तथा विदेशियों द्वारा देश के भीतर अर्जित आय को घटाया जाता है। 3. बाजार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP at Market Price) में से 'अप्रत्यक्ष करों' (Indirect Taxes) को घटाने तथा 'सब्सिडी' (Subsidies) को जोड़ने पर 'कारक लागत पर सकल घरेलू उत्पाद' (GDP at Factor Cost) प्राप्त होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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