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UPTET
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) और राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के अंतर्संबंधों के संदर्भ में, भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के किस ऐतिहासिक वाद में यह स्पष्ट किया गया था कि 'संविधान की मूल संरचना' (Basic Structure) को प्रभावित किए बिना सामाजिक-आर्थिक न्याय के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संसद नीति निर्देशक तत्वों को लागू करने हेतु मौलिक अधिकारों में संशोधन कर सकती है, बशर्ते वह प्रस्तावना के मूल उद्देश्यों के अनुकूल हो?

Detailed Explanation

मिनर्वा मिल्स वाद (1980) में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के संतुलन पर आधारित है। इनमें से किसी एक को दूसरे की कीमत पर सर्वोपरि नहीं बनाया जा सकता, बल्कि दोनों मिलकर सामाजिक-आर्थिक न्याय के उस लक्ष्य को प्राप्त करते हैं जिसकी परिकल्पना संविधान की प्रस्तावना में की गई है। न्यायालय ने यह भी कहा कि संसद नीति निर्देशक तत्वों को लागू करने के लिए संविधान में संशोधन कर सकती है, बशर्ते वह संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) का उल्लंघन न करे।
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