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Indian Polity
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लोक लेखा समिति में कितने सदस्य होते हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
लोक लेखा समिति में 22 सदस्य होते हैं।
Related Questions
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में भाग IX-A जोड़ा गया, जिसमें अनुच्छेद 243-P से 243-ZG तक के प्रावधान शामिल हैं, तथा बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं की विधायी शक्तियों से संबंधित कुल 18 कार्यात्मक विषयों को सूचीबद्ध किया गया है।
2. अधिनियम के अनुसार नगरपालिकाओं के तीन प्रकार (नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद और नगर निगम) का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु 10 लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले महानगर क्षेत्र के लिए केवल 'नगर निगम' का गठन ही एकमात्र विकल्प है।
3. नगरपालिकाओं के सभी पदों के लिए प्रत्यक्ष निर्वाचन वार्डों की प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे जनता द्वारा होता है, किंतु इसके अतिरिक्त राज्य विधानमंडल विधि द्वारा संसद या राज्य विधानसभा के सदस्यों और लोकसभा/राज्यसभा सदस्यों को नगरपालिका की बैठकों में विशेष मताधिकार के साथ पदेन सदस्य के रूप में नामित कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों (जैसे 42वें और 44वें संशोधन) तथा राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा राष्ट्रपति को यह बाध्यकारी बना दिया गया कि वह मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार ही कार्य करेगा, तथा राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा संपूर्ण देश के साथ-साथ देश के किसी विशिष्ट भाग तक सीमित रखने का अधिकार भी इसी संशोधन द्वारा जोड़ा गया था।
2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को राष्ट्रीय आपातकाल के आधार के रूप में संविधान से हटाकर उसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को प्रतिस्थापित किया गया, तथा यह भी अनिवार्य किया गया कि मंत्रिमंडल का ऐसा निर्णय प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्रियों द्वारा लिखित रूप में राष्ट्रपति को संसूचित किया जाना चाहिए।
3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 358 के अंतर्गत अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, किंतु 44वें संशोधन के पश्चात अब अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को किसी भी परिस्थिति में, यहां तक कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी, निलंबित नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत और संविधान सभा द्वारा 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किया गया 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) भारतीय संविधान की प्रस्तावना का मूल आधार बना, जिसमें प्रस्तावना को संविधान के एक विशिष्ट भाग के रूप में स्वीकार करते हुए इसकी न्यायोचित (Justiciable) प्रकृति को स्पष्ट किया गया था।
2. प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संशोधन किया गया है, जिसके माध्यम से इसमें 'समाजवादी' (Socialist), 'पंथनिरपेक्ष' (Secular) और 'अखंडता' (Integrity) शब्दों को जोड़ा गया था।
3. केशवानंद भारती वाद (1973) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न हिस्सा है, और संसद अनुच्छेद 368 के तहत अपनी संविधान संशोधन शक्ति का प्रयोग करते हुए प्रस्तावना में संशोधन कर सकती है, बशर्ते कि इसके द्वारा संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) को क्षति न पहुँचे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के प्रथम भाग (संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र - अनुच्छेद 1 से 4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद को किसी राज्य के क्षेत्र को घटाने, बढ़ाने या उसके नाम में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, और इन दोनों ही अनुच्छेदों के तहत बनाई गई विधियाँ अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए संविधान संशोधन समझी जाएंगी।
2. अनुच्छेद 3 के परंतुक (Proviso) के अनुसार, किसी भी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम को प्रभावित करने वाला कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, तथा राष्ट्रपति को ऐसा विधेयक उस राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार व्यक्त करने के लिए भेजना अनिवार्य होता है, बशर्ते राज्य विधानमंडल द्वारा तय की गई समयावधि राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी हो।
3. बेरुबारी यूनियन (Berubari Union) मामले (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि भारतीय क्षेत्र के किसी हिस्से को किसी अन्य देश को सौंपने (Cede) के लिए अनुच्छेद 3 के तहत सामान्य बहुमत से साधारण विधि पारित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत एक संवैधानिक संशोधन अधिनियम पारित करना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग-I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत का वर्णन 'राज्यों का संघ' (Union of States) के रूप में किया गया है, न कि 'राज्यों का परिसंघ' (Federation of States), क्योंकि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है और न ही किसी राज्य को संघ से अलग होने की स्वतंत्रता है।
2. अनुच्छेद 2 संसद को यह शक्ति देता है कि वह विधि द्वारा ऐसे नियमों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकती है, तथा इसके अंतर्गत स्थापित किए जाने वाले नए राज्य वे भू-भाग हैं जो पहले से भारत संघ का आंतरिक हिस्सा नहीं थे।
3. अनुच्छेद 3 के तहत किसी राज्य के क्षेत्रफल को बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने संबंधी विधेयक को संसद में प्रस्तुत करने से पूर्व राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश अनिवार्य है, तथा राष्ट्रपति को ऐसा विधेयक संसद में प्रस्तुत करने से पूर्व संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजना अनिवार्य होता है, बशर्ते राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए संवैधानिक रूप से सर्वदा बाध्यकारी हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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