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सामाजिक अध्ययन (Social Studies) शिक्षण के अंतर्गत 'इतिहास' विषय के शिक्षण में 'कालक्रम (Chronology)' और 'ऐतिहासिक स्रोतों (Historical Sources)' के समालोचनात्मक विश्लेषण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं तार्किक है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इतिहास शिक्षण में केवल तिथियों को रटने के बजाय ऐतिहासिक स्रोतों (साक्ष्यों) का समालोचनात्मक (Critical) विश्लेषण करना अत्यंत आवश्यक है। इससे विद्यार्थियों में यह समझ विकसित होती है कि इतिहास का निर्माण किस प्रकार विभिन्न साक्ष्यों के आधार पर हुआ है, जिससे उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking) को बढ़ावा मिलता है।
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1. पूर्व मीमांसा दर्शन के संस्थापक महर्षि जैमिनी हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य वेदों के कर्मकांडीय हिस्से (ब्राह्मण ग्रंथों) की व्याख्या करना और वैदिक यज्ञों व अनुष्ठानों की अनिवार्यता को स्थापित करना है।
2. इस दर्शन के अनुसार, धर्म ही वह सर्वोच्च नियम है जो मनुष्य को उसके कर्तव्यों का बोध कराता है, और वेदों को 'अपौरुषेय' (किसी पुरुष या देवता द्वारा रचित नहीं बल्कि शाश्वत) माना गया है।
3. उत्तर मीमांसा (वेदांत दर्शन), जिसे बादरायण द्वारा रचित ब्रह्मसूत्र पर आधारित माना जाता है, पूर्व मीमांसा के बिल्कुल विपरीत केवल ज्ञान मार्ग पर बल देती है, जबकि पूर्व मीमांसा कर्म मार्ग पर जोर देती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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