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Indian Polity
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जनहित याचिका (PIL) की अवधारणा का जनक किसे माना जाता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जस्टिस पी.एन. भगवती को भारत में PIL का जनक माना जाता है।
Related Questions
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण और मुख्यमंत्री की नियुक्ति से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की शक्ति वही होती है जो राज्य विधानमंडल द्वारा पारित अधिनियम की होती है, किंतु राज्यपाल किसी भी परिस्थिति में राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के बिना अध्यादेश प्रख्यापित नहीं कर सकता यदि उस विषय पर राज्य विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की संस्तुति आवश्यक हो।
2. अनुच्छेद 164 के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों में जनजातियों के कल्याण के लिए भारसाधक एक पृथक् मंत्री का होना अनिवार्य किया गया है।
3. राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति (अनुच्छेद 161) के अंतर्गत उसे राज्य सूची के विषयों से संबंधित विधियों के विरुद्ध अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु राज्यपाल को मृत्युदंड (Death Sentence) के मामले में क्षमादान देने तथा सेना के न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के विरुद्ध शक्ति का प्रयोग करने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायालयों की संरचना, अधिकारिता तथा शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालयों को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी अन्य प्रयोजन के लिए भी रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और उच्च न्यायालय का यह रिट अधिकार क्षेत्र (Writ Jurisdiction) उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट अधिकार क्षेत्र की तुलना में अधिक व्यापक है।
2. संविधान के अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और प्रमोशन संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात ही किए जाते हैं, तथा राज्यपाल इस प्रक्रिया में उच्च न्यायालय की सलाह मानने के लिए विधिक रूप से बाध्य नहीं होता है।
3. जिला न्यायालय से भिन्न अधीनस्थ न्यायालयों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा, राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय के नियमों के परामर्श से, राज्य न्यायिक सेवा के सदस्यों में से की जाती है।
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और नागरिकता अधिनियम, 1955 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 10 के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, वह ऐसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए भारत का नागरिक बना रहेगा जो संसद द्वारा बनाई जाए, जिसका तात्पर्य यह है कि संसद को नागरिकता के अधिकार के नियमन और निरंतरता से संबंधित कानून बनाने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है।
2. नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6 के तहत 'देशीकरण' (Naturalization) द्वारा भारत की नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि आवेदक को आवेदन देने से ठीक पहले कम से कम बारह वर्षों तक भारत में निवास करना आवश्यक होता है, जिसमें से पिछले बारह महीनों की निरंतर अवधि भी शामिल है।
3. संविधान के अनुच्छेद 11 के आधार पर संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में उपबंध करने की अनन्य शक्ति प्रदान की गई है, और इस शक्ति के अंतर्गत संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) या अनुच्छेद 21 के प्रावधानों का उल्लंघन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना में 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्शों को फ्रांसीसी क्रांति (1789) से लिया गया है, जबकि 'सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय' के आदर्श को रूसी क्रांति (1917) से प्रेरित होकर शामिल किया गया है।
2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में यह स्पष्ट किया गया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते यह संशोधन संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) को क्षति न पहुँचाए।
3. बेरूबारी यूनियन बाद (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है, इसलिए विधायिका इसमें संशोधन करने की शक्ति नहीं रखती है, और इस स्थिति को आज भी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पूर्णतः अपरिवर्तित रखा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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प्रथम संविधान संशोधन कब हुआ?
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