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भारतीय संविधान के भाग-IV में वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (Directive Principles of State Policy - DPSP) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?

Detailed Explanation

राज्य के नीति निर्देशक तत्व (DPSP) भारतीय संविधान के भाग-IV (अनुच्छेद 36-51) में निहित हैं। इन्हें आयरलैंड के संविधान से लिया गया है। नीति निर्देशक तत्व 'अवादयोग्य' (Non-justiciable) होते हैं, अर्थात इन्हें न्यायालय द्वारा कानूनी रूप से लागू नहीं कराया जा सकता है (अनुच्छेद 37)। इसके विपरीत, मौलिक अधिकार वाद योग्य होते हैं। इसलिए विकल्प (b) असत्य है, क्योंकि इसमें इन्हें 'वाद योग्य' बताया गया है। अन्य सभी कथन सत्य हैं।
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→ उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक, राजनीतिक और विधायी इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश का वर्तमान नाम वर्ष 1950 में पूर्णतः अस्तित्व में आया, इससे पूर्व ब्रिटिश शासन काल में इस विस्तृत भू-भाग को 'संयुक्त प्रान्त आगरा एवं अवध' (United Provinces of Agra and Oudh) के नाम से जाना जाता था, जिसे संक्षिप्त करके वर्ष 1937 में केवल 'संयुक्त प्रान्त' (United Provinces) कर दिया गया था। 2. उत्तर प्रदेश में द्विसदनीय विधानमंडल (Bicameral Legislature) की व्यवस्था है, जिसके अंतर्गत विधान परिषद (Legislative Council) राज्य की उच्च सदन है और इसका गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 के प्रावधानों के तहत किया गया है, जिसमें कुल सदस्यों की संख्या 100 निर्धारित है। 3. राज्य की प्रथम विधानसभा का गठन स्वतंत्रता के तुरंत पश्चात वर्ष 1952 में किया गया था और इसके प्रथम निर्वाचित अध्यक्ष (Speaker) पुरुषोत्तम दास टंडन थे, जबकि स्वतंत्रता पूर्व वर्ष 1937 में गठित संयुक्त प्रान्त की पहली विधानसभा के अध्यक्ष आदरणीय राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन ही थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? → हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'संधि' और 'समास' के नियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दीर्घ स्वर संधि के अंतर्गत जब ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ, ऋ के पश्चात क्रमशः समान ह्रस्व या दीर्घ स्वर आते हैं, तो दोनों मिलकर क्रमशः आ, ई, ऊ, ऋ हो जाते हैं, जैसे— 'विद्या + आलय' में दीर्घ 'आ' का निर्माण होता है। 2. 'द्विगु समास' और 'कर्मधारय समास' दोनों में समानता यह है कि दोनों का उत्तर पद प्रधान होता है, परंतु द्विगु समास का पूर्व पद सदैव 'संख्यावाचक' होता है जो किसी समूह या समाहार का बोध कराता है, जबकि कर्मधारय समास में पूर्व और उत्तर पद के बीच 'विशेषण-विशेष्य' या 'उपमान-उपमेय' का संबंध होता है। 3. 'बहुव्रीहि समास' में दोनों पद प्रधान होते हैं और सामासिक पद अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी अन्य तीसरे पद या अर्थ का विशेष रूप से बोध कराता है, जैसे— 'चक्रपाणि' (चक्र है पाणि में जिसके अर्थात् विष्णु)। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? → लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, किस स्तर पर बालक का नैतिकता से संबंधित निर्णय बाह्य पुरस्कारों या दंडों पर आधारित होता है? → उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम की रणनीतियाँ और शिक्षण तकनीक (Learning Strategies and Teaching Techniques)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जॉन हाटी (John Hattie) द्वारा प्रतिपादित 'दृश्यमान अधिगम' (Visible Learning) और 'पारस्परिक शिक्षण' (Reciprocal Teaching: अनुमान लगाना, प्रश्न पूछना, स्पष्ट करना और सारांश देना) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN), 'एन्टेरियर सिंग्युलेट कॉर्टेक्स' (ACC), और 'डॉसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC) के बीच मेटाकॉग्निटिव निगरानी, त्रुटि अन्वेषण, और सामाजिक-संज्ञानात्मक परिप्रेक्ष्य ग्रहण (Social-Cognitive Perspective Taking) की सक्रियण गतिकी, तथा लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'समीपस्थ विकास क्षेत्र' (ZPD - Zone of Proximal Development) और 'स्काफोल्डिंग' (Scaffolding) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-विजिबल लर्निंग ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Visible Learning Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में स्व-नियमित अधिगम (Self-Regulated Learning), सहयोगात्मक समस्या-समाधान व समग्र संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? → उत्तर प्रदेश की मृदा एवं कृषि प्रणालियों के संदर्भ में, 'गंगा-यमुना दोआब' क्षेत्र में पाई जाने वाली नवीन जलोढ़ मृदा (Khadar Soil) और इसकी विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. खादर मृदा को स्थानीय भाषा में 'नयी जलोढ़' या 'कच्छ' मृदा भी कहा जाता है, जिसका निर्माण प्रत्येक वर्ष बाढ़ के दौरान नदियों द्वारा लाई जाने वाली नई उपजाऊ गाद (Silt) के निक्षेपण से होता है। 2. इस मृदा में चूने, पोटाश और मैग्नीशियम की प्रचुरता पाई जाती है, जबकि इसमें नाइट्रोजन और ह्यूमस (Humus) की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है, जिसके कारण इसमें धान, गेहूँ और गन्ने की फसलें अत्यधिक मात्रा में पैदा होती हैं। 3. यह मृदा उत्तर प्रदेश के दक्षिणी पठारी क्षेत्रों (जैसे झाँसी, महोबा और ललितपुर) में सबसे अधिक क्षेत्रफल में विस्तृत है, जहाँ यह कठोर चट्टानों के अपक्षय (Weathering) के परिणामस्वरूप बनती है और इसमें जल धारण करने की क्षमता शून्य होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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