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Indian Polity
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किस संशोधन द्वारा मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
61वें संशोधन (1988) द्वारा आयु 18 वर्ष की गई।
Related Questions
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भारतीय संविधान के भाग-III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) शब्द की व्यापक परिभाषा दी गई है, जिसके तहत संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए अधिनियमों के अलावा अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम, विनियम और अधिसूचना जैसे प्रत्यायोजित विधान (Delegated Legislation) को भी शामिल किया गया है, किंतु इसके दायरे में संविधान संशोधन अधिनियम (Constitutional Amendment Acts) शामिल नहीं हैं।
2. अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति न्यायक्षेत्र (Jurisdiction) के मामले में उच्च न्यायालयों की अनुच्छेद 226 के तहत प्रदत्त रिट अधिकारिता से अधिक व्यापक है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय केवल मूल अधिकारों के उल्लंघन पर ही नहीं बल्कि अन्य विधिक अधिकारों के उल्लंघन पर भी रिट जारी कर सकता है।
3. अनुच्छेद 34 संसद को यह अधिकार देता है कि वह देश के किसी भी भू-भाग पर मार्शल लॉ (Military Law) लागू होने की स्थिति में, सरकारी कर्मचारियों या अन्य व्यक्तियों द्वारा शांति या व्यवस्था बनाए रखने के लिए किए गए किसी भी कार्य को वैध बनाने के लिए संसद द्वारा भूतलक्षी प्रभाव (Retrospective Effect) से क्षतिपूर्ति अधिनियम (Indemnity Act) बना सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना पंडित नेहरू द्वारा प्रस्तुत और संविधान सभा द्वारा 22 जनवरी 1947 को अपनाए गए 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) पर आधारित है, और इसे संविधान का अंग होने के कारण अनुच्छेद 368 के तहत विधिवत संशोधित किया जा सकता है।
2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया गया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है, जबकि 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में इस निर्णय को पलटते हुए यह कहा गया कि प्रस्तावना संविधान का अंग नहीं है।
3. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को रूसी क्रांति (1917) से लिया गया है, जबकि 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्श को फ्रांसीसी क्रांति (1789) से प्रेरित होकर शामिल किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और लोकसभा व राज्यसभा के अंतःसंबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनर्स्थापित किया जा सकता है और राज्यसभा इसे न तो अस्वीکار कर सकती है और न ही इसमें संशोधन कर सकती है, किंतु राज्यसभा को इस विधेयक पर अपनी सिफारिशें देने के लिए अधिकतम 30 दिन की समय-सीमा दी गई है।
2. अनुच्छेद 108 के अंतर्गत राष्ट्रपति को दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) आहूत करने की शक्ति प्राप्त है, और यह प्रावधान साधारण विधेयकों तथा वित्तीय विधेयकों (श्रेणी-I) दोनों पर लागू होता है, किंतु संविधान संशोधन विधेयकों या धन विधेयकों के मामले में संयुक्त बैठक बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है।
3. जब लोकसभा द्वारा पारित कोई साधारण विधेयक राज्यसभा में भेजा जाता है और राज्यसभा द्वारा उसमें संशोधन किए बिना उसे वापस कर दिया जाता है या राज्यसभा उस पर कोई कार्रवाई नहीं करती, तो उस विधेयक के संबंध में राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त बैठक आहूत करने की शक्ति का प्रयोग तभी किया जा सकता है जब राज्यसभा में विधेयक प्राप्ति की तारीख से छह मास की अवधि व्यतीत हो चुकी हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों का प्रावधान मूल संविधान का हिस्सा नहीं था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IV-A और अनुच्छेद 51-A के तहत अंतःस्थापित किया गया था।
2. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से संविधान में एक नया मूल कर्तव्य जोड़ा गया, जिसके तहत छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे या प्रपाल्य के लिए शिक्षा के अवसर प्रदान करना माता-पिता या संरक्षक का कर्तव्य बनाया गया है।
3. ये मूल कर्तव्य प्रकृति से न्यायोचित (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक इनका उल्लंघन करता है, तो संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा विधिवत बनाए गए कानूनों के माध्यम से उसे न्यायलय द्वारा सीधे दंडित किया जा सकता है, और मूल अधिकारों की भाँति ही इनके प्रवर्तन के लिए सीधे उच्चतम न्यायालय में अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर की जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 67 के अनुसार उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए राज्य सभा द्वारा ऐसा संकल्प पारित किया जाना चाहिए जिससे राज्य सभा के तत्समय सभी सदस्यों के बहुमत द्वारा सहमति व्यक्त की गई हो और लोक सभा उस संकल्प से सहमत हो, किंतु इस प्रकार का कोई भी प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए चौदह दिन की पूर्व सूचना देना अनिवार्य है और इसके लिए लोक सभा के महाभियोग जैसी औपचारिक प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती है।
2. संविधान के अनुच्छेद 75(1) के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, तथा किसी भी स्थिति में मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या (प्रधानमंत्री सहित) लोक सभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती है, जिसे 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा जोड़ा गया था।
3. 'सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत' (Principle of Collective Responsibility) के तहत संविधान के अनुच्छेद 75(3) में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोक सभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ है कि यदि लोक सभा द्वारा मंत्रिपरिषद के विरुद्ध कोई अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है, तो प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्रियों को त्यागपत्र देना पड़ता है।
4. केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) शब्द का मूल संविधान के अनुच्छेद 352 में प्रारंभिक रूप से कोई उल्लेख नहीं था, और इसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा केवल आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में संविधान में पहली बार समाविष्ट किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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