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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के अंतर्गत 'जैव विविधता संरक्षण' (Biodiversity Conservation) के दृष्टिकोण से, 'स्व-स्थाने संरक्षण' (In-situ Conservation) और 'बाह्य-स्थाने संरक्षण' (Ex-situ Conservation) के बीच मुख्य अंतर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. स्व-स्थाने संरक्षण के अंतर्गत जीवों और वनस्पतियों का संरक्षण उनके प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) में ही किया जाता है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभ्यारण्य और जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र आते हैं।
- 2. बाह्य-स्थाने संरक्षण के तहत संकटग्रस्त प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर एक विशेष रूप से प्रबंधित कृत्रिम वातावरण में संरक्षित किया जाता है, जिसके प्रमुख उदाहरण वनस्पति उद्यान (Botanical Gardens), चिड़ियाघर (Zoos) और जीन बैंक (Gene Banks) हैं।
- 3. 'रेड डेटा बुक' (Red Data Book) का प्रकाशन करने वाली संस्था 'IUCN' मुख्य रूप से केवल बाह्य-स्थाने संरक्षण क्षेत्रों का प्रबंधन करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि 'स्व-स्थाने संरक्षण' (In-situ Conservation) में पौधों और जंतुओं का संरक्षण उनके प्राकृतिक आवासों में ही किया जाता है। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभ्यारण्य आदि आते हैं। कथन 2 भी सही है क्योंकि 'बाह्य-स्थाने संरक्षण' (Ex-situ Conservation) में जीवों को प्राकृतिक आवास से बाहर जैसे चिड़ियाघर, बॉटनिकल गार्डन और जीन बैंक में संरक्षित किया जाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि IUCN (अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ) कोई संरक्षण क्षेत्र प्रबंधित नहीं करती है, बल्कि यह संकटग्रस्त प्रजातियों की 'रेड डेटा बुक' जारी करती है।
Related Questions
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बच्चों में नैतिक विकास (Moral Development) के संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के सिद्धांत की विभिन्न अवस्थाओं और स्तरों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोहलबर्ग के 'पारंपरिक नैतिकता का स्तर' (Conventional Morality Level) के अंतर्गत आने वाले चौथे चरण (चरण 4 - कानून और व्यवस्था अभिविन्यास) में व्यक्ति का नैतिक तर्क सामाजिक नियमों, कानून के पालन और समाज में व्यवस्था बनाए रखने के कर्तव्य पर आधारित होता है।
2. 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता का स्तर' (Post-conventional Morality Level) के छठे चरण (चरण 6 - सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास) में व्यक्ति बाहरी नियमों या कानूनों से परे, अपने स्वयं के अंतःकरण (Conscience) और सार्वभौमिक न्याय, मानवाधिकारों और समानता के आंतरिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेता है।
3. कोहलबर्ग के अनुसार, नैतिक विकास के सभी स्तर और चरण एक निश्चित और सार्वभौमिक क्रम में आगे बढ़ते हैं, और कोई भी व्यक्ति किसी पूर्ववर्ती चरण को छोड़े बिना क्रमबद्ध रूप से ही आगे की अवस्थाओं में विकसित होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश की कृषि, मृदा प्रकार और जलवायु व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के दक्षिणी भाग में पाए जाने वाले पठारी और पहाड़ी क्षेत्रों की मृदा को 'बंडुआ' या 'मार' मृदा कहा जाता है, जो मुख्य रूप से कम उपजाऊ होती है और इसमें नाइट्रोजन एवं ह्यूमस की प्रचुर मात्रा पाई जाती है।
2. राज्य में 'तराई क्षेत्र' (Tarai Region) उत्तर प्रदेश के उत्तर में शिवालिक पहाड़ियों के ठीक नीचे एक संकीर्ण पट्टी के रूप में फैला हुआ है, जहाँ भारी वर्षा और घने जंगलों के कारण मृदा में नमी अधिक होती है तथा यहाँ धान और गन्ने की खेती प्रमुखता से की जाती है।
3. उत्तर प्रदेश में 'लाल मृदा' (Red Soil) मुख्य रूप से मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों के पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है, जिसका निर्माण लाल बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट चट्टानों के अपक्षय से हुआ है और इसमें लौह तत्वों की अधिकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disabilities) के संदर्भ में, वर्ष 1963 में सैमुअल किर्क (Samuel Kirk) द्वारा गढ़े गए इस पद के अंतर्गत, 'डिस्लेक्सिया' (Dyslexia) से पीड़ित बच्चों के तंत्रिका मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन (Neuropsychological Assessment) में 'फॉलो-अप' अध्ययन के दौरान, ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक मैकनॉटोन और अन्य शोधकर्ताओं द्वारा मस्तिष्क के किस विशिष्ट भाग या कॉर्टिकल क्षेत्र (Cortical Region) में संरचनात्मक और कार्यात्मक असामान्यता को पठन अक्षमता का मुख्य जैविक आधार माना गया है?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप, मृदा प्रकार और जलवायुिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश का मैदानी भाग मुख्यतः गंगा, यमुना और उनकी सहायक नदियों द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी से निर्मित है, जिसे स्थानीय रूप से 'बांगर' (पुरानी जलोढ़ मृदा) और 'खादर' (नई जलोढ़ मृदा) में विभाजित किया जाता है। खादर क्षेत्र में बाढ़ का पानी प्रतिवर्ष पहुँचता है जिसके कारण यह अधिक उपजाऊ होती है।
2. उत्तर प्रदेश के दक्षिण का पठारी क्षेत्र प्रायद्वीपीय पठार का उत्तर-पूर्वी विस्तार है, जिसके अंतर्गत ललितपुर, झाँसी, महोबा, बाँबा और सोनभद्र जिले आते हैं। इस क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' और 'काबर' मृदाएँ चिकनी और काली प्रकृति की होती हैं, जिनमें नमी धारण करने की अत्यधिक क्षमता होती है।
3. राज्य में ग्रीष्म ऋतु के दौरान बुंदेलखंड क्षेत्र में चलने वाली अत्यंत गर्म और शुष्क हवाओं को 'लू' कहा जाता है, तथा उत्तर प्रदेश में होने वाली कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 75% से 80% भाग दक्षिण-पश्चिम मानसून की अरब सागर शाखा से प्राप्त होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप और जलवायु के संदर्भ में, राज्य में ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली अत्यधिक गर्म और शुष्क हवाओं (लू) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
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