त्वरित लिंक्स
UPTET
1 views
बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) की विभिन्न अवस्थाओं और उनकी प्रमुख विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पूर्व संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage, 2 से 7 वर्ष) के दौरान बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) का गुण पूरी तरह विकसित हो जाता है, जिसके कारण वे यह समझ जाते हैं कि किसी वस्तु के आकार या रूप में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा, द्रव्यमान या आयतन अपरिवर्तित रहता है।
- 2. मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage, 7 से 11 वर्ष) में बालक वस्तुओं को उनके भौतिक गुणों के आधार पर क्रमबद्ध करना (Seriation), उनका वर्गीकरण करना (Classification) और 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) की क्षमता को भली-भांति सीख जाते हैं।
- 3. औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage, 11 वर्ष से आगे) में किशोरों के भीतर 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking) की क्षमता का पूर्ण विकास होता है, जिससे वे तार्किक रूप से समस्याओं के विभिन्न समाधानों की कल्पना कर सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है, क्योंकि 'संरक्षण' (Conservation) का गुण पूर्व संक्रियात्मक अवस्था में नहीं बल्कि 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (7 से 11 वर्ष) के दौरान विकसित होता है। पूर्व संक्रियात्मक अवस्था के बच्चों में संरक्षण का अभाव होता है और वे 'केन्द्रण' (Centration) की प्रवृत्ति से ग्रसित होते हैं (अर्थात वे एक समय में किसी वस्तु के केवल एक ही आयाम पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं)।
कथन 2 सत्य है, क्योंकि मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (7-11 वर्ष) में बालक वस्तुओं की तार्किक रूप से छंटनी, वर्गीकरण, क्रमबद्धता और विकेंद्रीकरण करने की योग्यता हासिल कर लेता है।
कथन 3 सत्य है, क्योंकि औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (11 वर्ष के बाद) में अमूर्त चिंतन और परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-Deductive Reasoning) जैसी उच्च मानसिक क्षमताएँ विकसित हो जाती हैं।
Related Questions
→
उत्तर प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप, चट्टानी संरचनाओं और खनिज संसाधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के दक्षिणी पठारी क्षेत्र (बुंदेलखंड और बघेलखंड का भाग) में प्राचीन काल की विंध्यन और आर्कियन क्रम की चट्टानें पाई जाती हैं, जहाँ ग्रेनाइट, संगमरमर, डायमंड और ऐंडालुसाइट जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।
2. 'सोनभद्र' जिला उत्तर प्रदेश का एकमात्र ऐसा जिला है जहाँ चूना पत्थर (Limestone), कोयला (Coal), और डोलोमाइट (Dolomite) जैसे खनिज बड़े पैमाने पर पाए जाते हैं, और यहीं पर उत्तर प्रदेश का एकमात्र सीमेंट कारखाना भी स्थित है।
3. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों में पाई जाने वाली नॉन-प्लास्टिक फायर क्ले (Fire Clay) का उपयोग मुख्य रूप से उच्च तापमान सहन करने वाली ईंटों और refractories के निर्माण में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प, पारंपरिक कलाओं और 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश सरकार की 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत 'मुरादाबाद' जिले को उसके प्रसिद्ध 'पीतल और धातु शिल्प' (Brass and Metal Craft) के लिए तथा 'भदोही' जिले को उसकी अनूठी 'कालीन बुनाई' (Carpet Weaving) के लिए वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने हेतु चयनित किया गया है।
2. उत्तर प्रदेश के 'लखनऊ' जिले में पारंपरिक 'चिकनकारी' (Chikankari) कढ़ाई के साथ-साथ 'जरी-ज़रदोजी' (Zari-Zardosi) शिल्प को भी भौगोलिक उपदर्शन (GI Tag) प्रदान किया गया है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध मुगलकालीन शिल्प परंपरा का प्रतीक है।
3. उत्तर प्रदेश के 'वाराणसी' जिले में बनाई जाने वाली प्रसिद्ध 'बनारसी रेशमी साड़ी' और 'लकड़ी के खिलौने' केवल स्थानीय बाजार तक सीमित हैं, और इन्हें अभी तक किसी भी प्रकार का भौगोलिक संकेत (GI Tag) या ODOP योजना के तहत शामिल नहीं किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम की रणनीतियाँ और शिक्षण तकनीक (Learning Strategies and Teaching Techniques)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जॉन हाटी (John Hattie) द्वारा प्रतिपादित 'दृश्यमान अधिगम' (Visible Learning) और 'पारस्परिक शिक्षण' (Reciprocal Teaching: अनुमान लगाना, प्रश्न पूछना, स्पष्ट करना और सारांश देना) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN), 'एन्टेरियर सिंग्युलेट कॉर्टेक्स' (ACC), और 'डॉसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC) के बीच मेटाकॉग्निटिव निगरानी, त्रुटि अन्वेषण, और सामाजिक-संज्ञानात्मक परिप्रेक्ष्य ग्रहण (Social-Cognitive Perspective Taking) की सक्रियण गतिकी, तथा लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'समीपस्थ विकास क्षेत्र' (ZPD - Zone of Proximal Development) और 'स्काफोल्डिंग' (Scaffolding) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-विजिबल लर्निंग ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Visible Learning Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में स्व-नियमित अधिगम (Self-Regulated Learning), सहयोगात्मक समस्या-समाधान व समग्र संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम शैलियाँ और वैयक्तिक भिन्नताएँ (Learning Styles and Individual Differences) के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों' के संदर्भ में, नील फ्लेming (Neil Fleming) द्वारा प्रतिपादित 'VARK मॉडल' (Visual, Auditory, Reading/Write, Kinesthetic) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'विजुअल कॉर्टेक्स' (Visual Cortex), 'प्राइमरी ऑडिटरी कॉर्टेक्स' (Primary Auditory Cortex), 'अंसुलेट गाइरस' (Angular Gyrus) और 'मोटर कॉर्टेक्स' (Motor Cortex) के बीच संवेदी इनपुट प्रसंस्करण, बहुसंवेदी एकीकरण और संज्ञानात्मक कोडिंग की सक्रियण गतिकी, तथा डेविड कोल्ब (David Kolb) द्वारा प्रतिपादित 'experiential learning cycle' (अनुभवात्मक अधिगम चक्र: अभिसारी, आत्मसातकर्ता, अपसारी और Accommodating शैलियाँ) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, विभेदित निर्देश (Differentiated Instruction) और विद्यार्थियों में संज्ञानात्मक विविधता, स्वायत्त अधिगम व वैयक्तिकृत ज्ञान निर्माण के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि के बहु-कारक एवं पदानुक्रमित सिद्धांतों' के संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) द्वारा प्रतिपादित 'बुद्धि का बहु-कारक सिद्धांत' (Multifactor Theory of Intelligence) के अंतर्गत वर्णित बुद्धि के चार प्रमुख atributos—'स्तर' (Level), 'क्षेत्र' (Area), 'क्षेत्राधिकार' (Range), और 'गति' (Speed)—के वैज्ञानिक स्वरूप, तथा फिलिप वर्नोन (Philip Vernon) द्वारा प्रतिपादित 'बुद्धि का पदानुक्रमित सिद्धांत' (Hierarchical Theory of Intelligence) के अंतर्गत 'सामान्य कारक (g)' से लेकर 'प्रमुख समूह कारकों' (verbal-educational, practical-mechanical) और 'विशिष्ट कारकों (s)' तक के विभाजन के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक बहु-स्तरीय कक्षा-कक्ष शिक्षण और विभेदित अनुदेशन (Differentiated Instruction) रणनीतियों में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.