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हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'संधि' और 'समास' के नियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दीर्घ स्वर संधि के अंतर्गत जब ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ, ऋ के पश्चात क्रमशः समान ह्रस्व या दीर्घ स्वर आते हैं, तो दोनों मिलकर क्रमशः आ, ई, ऊ, ऋ हो जाते हैं, जैसे— 'विद्या + आलय' में दीर्घ 'आ' का निर्माण होता है। 2. 'द्विगु समास' और 'कर्मधारय समास' दोनों में समानता यह है कि दोनों का उत्तर पद प्रधान होता है, परंतु द्विगु समास का पूर्व पद सदैव 'संख्यावाचक' होता है जो किसी समूह या समाहार का बोध कराता है, जबकि कर्मधारय समास में पूर्व और उत्तर पद के बीच 'विशेषण-विशेष्य' या 'उपमान-उपमेय' का संबंध होता है। 3. 'बहुव्रीहि समास' में दोनों पद प्रधान होते हैं और सामासिक पद अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी अन्य तीसरे पद या अर्थ का विशेष रूप से बोध कराता है, जैसे— 'चक्रपाणि' (चक्र है पाणि में जिसके अर्थात् विष्णु)। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि दीर्घ स्वर संधि (स्वर संधि का एक भेद) में 'अ+अ=आ', 'इ+ई=ई' आदि के नियम कार्य करते हैं और 'विद्या + आलय' इसका सटीक उदाहरण है। कथन 2 सही है क्योंकि द्विगु और कर्मधारय दोनों तत्पुरुष समास के ही उपभेद माने जाते हैं, जिनमें उत्तर पद प्रधान होता है; द्विगु में पूर्व पद संख्यावाची होता है और कर्मधारय में विशेषण-विशेष्य का संबंध होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि बहुव्रीहि समास में दोनों पद 'प्रधान नहीं' होते, बल्कि दोनों पद मिलकर किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत करते हैं।
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य सामान्य विद्यालयों में सभी बच्चों (चाहे वे शारीरिक, मानसिक, सामाजिक या आर्थिक रूप से किसी भी वर्ग के हों) को बिना किसी भेदभाव के एक साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है।
2. यह प्रणाली 'विशेष बच्चों' को मुख्यधारा की शिक्षा से अलग करके उनके लिए विशेष विद्यालयों और पृथक कक्षाओं की स्थापना पर बल देती है, ताकि वे अपनी गति से सीख सकें।
3. राष्ट्रीय पाठ्यकी रूपरेखा (NCF-2005) और भारतीय संविधान का 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE-2009)' भी समावेशी शिक्षा की वकालत करते हैं और इसे प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार मानते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में 'प्राथमिक स्तर पर सतत एवं व्यापक मूल्यांकन' (CCE) के अंतर्गत निम्नलिखित में से किस मुख्य उद्देश्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए?
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उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, लोक नाट्य और संगीत परंपराओं के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. 'ख्याल लोक नाट्य' - बुंदेलखंड क्षेत्र (यह मुख्य रूप से पुत्र जन्मोत्सव के अवसर पर रंग-बिरंगे कागजों और बाँस से बने मंदिरनुमा प्रतीकों को सिर पर रखकर किया जाने वाला एक प्रसिद्ध लोक नाट्य है।)
2. 'ढोला गायन व नृत्य' - आगरा और अलीगढ़ क्षेत्र (यह लोकगीत शैली पर आधारित है जिसमें ढोला महाकाव्य की कथाओं का गायन किया जाता है, जो इस क्षेत्र में अत्यंत लोकप्रिय है।)
3. 'नौटंकी' - हाथरस और कानपुर घराना (यह उत्तर प्रदेश का सबसे लोकप्रिय लोक नाट्य रूप है, जिसमें पौराणिक एवं सामाजिक कथाओं का मंचन वीर रस और श्रृंगार रस के माध्यम से किया जाता है।)
4. 'धुबिया नृत्य' - ब्रज क्षेत्र (यह धोबी समुदाय द्वारा केवल महिलाओं द्वारा किया जाने वाला एक धार्मिक अनुष्ठानिक नृत्य है जो भगवान कृष्ण की लीलाओं पर आधारित होता है।)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन सा/से सही सुमेलित है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप, मृदा प्रकार और कृषि अर्थव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के दक्षिण के पठारी (बुंदेलखंड) क्षेत्र में पाई जाने वाली लाल और पैंडुआ (Pandua) मृदा जलधारण क्षमता में अत्यधिक उच्च होती है, जिसके कारण इस क्षेत्र में बिना किसी सिंचाई सुविधा के वर्ष भर धान की सघन कृषि की जाती है।
2. उत्तर प्रदेश के गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में पाई जाने वाली 'नवीन जलोढ़' मृदा को 'खादर' कहा जाता है, जो बाढ़ के मैदानों में प्रतिवर्ष नई परतों के रूप में जमा होती है और इसकी उर्वरता बहुत अधिक होती है।
3. उत्तर प्रदेश के भाबर और तराई क्षेत्रों में नदियाँ बड़े-बड़े पत्कथरी पत्थरों और कंकड़ों के नीचे विलुप्त हो जाती हैं (भाबर क्षेत्र), जबकि तराई क्षेत्र में वही जल पुनः धरातल पर प्रकट होकर दलदली और नम भूमि का निर्माण करता है, जो गन्ने और धान के उत्पादन के लिए अत्यधिक अनुकूल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'वाक्य भेद', 'वाच्य' और 'पदबंध' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रचना या बनावट के आधार पर वाक्य के तीन प्रमुख भेद होते हैं - सरल वाक्य, मिश्र वाक्य और संयुक्त वाक्य; जबकि अर्थ के आधार पर वाक्य के कुल आठ भेद माने जाते हैं (जैसे विधानवाचक, निषेधवाचक, आज्ञावाचक आदि)।
2. 'कर्मवाच्य' (Passive Voice) का प्रयोग केवल अकर्मक क्रियाओं के साथ ही संभव है, क्योंकि इसमें कर्ता की प्रधानता होती है और कर्म का होना अनिवार्य नहीं होता है, जबकि 'कृतृवाच्य' में क्रिया का संबंध सीधे कर्म से होता है।
3. 'पदबंध' (Phrase) एक से अधिक पदों (शब्दों) का वह समूह है जो मिलकर एक ही पद (इकाई) का कार्य करता है और इसके प्रमुख पाँच भेद होते हैं - संज्ञा पदबंध, सर्वनाम पदबंध, विशेषण पदबंध, क्रिया पदबंध और क्रिया-विशेषण पदबंध।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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