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भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के अंतर्गत 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' (Civil Disobedience Movement, 1930) और उससे जुड़ी प्रमुख घटनाओं तथा समझौतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस आंदोलन की आधिकारिक शुरुआत महात्मा गांधी द्वारा 12 मार्च 1930 को अपने 78 चुने हुए अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से दांडी तक की 240 मील की ऐतिहासिक पदयात्रा (दांडी मार्च) के साथ की गई थी, और 6 अप्रैल 1930 को दांडी में नमक कानून तोड़कर सविनय अवज्ञा का श्रीगणेश किया गया था। 2. आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश (तत्कालीन संयुक्त प्रांत) में राजस्व अदायगी के विरोध में 'नो-टेक्स' (कर-बंदी) आंदोलन चलाया गया, विशेषकर किसानों द्वारा मालगुजारी न देने का व्यापक अभियान चलाया गया था। 3. आंदोलन की चरम सीमा के समय मार्च 1931 में संपन्न हुए 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत ब्रिटिश सरकार ने सविनय अवज्ञा आंदोलन से जुड़े सभी कैदियों को बिना किसी शर्त के तुरंत रिहा करने तथा हिंसा के आरोपियों सहित सभी पर चल रहे मुकदमों को पूरी तरह से वापस लेने की घोषणा की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत 12 मार्च 1930 को गांधी जी के दांडी मार्च से हुई थी और 6 अप्रैल 1930 को नमक कानून तोड़ा गया था। कथन 2 सही है क्योंकि उत्तर प्रदेश (संयुक्त प्रांत) में इस दौरान किसानों ने मालगुजारी और लगान न देने का कर-बंदी (नो-टेक्स) आंदोलन चलाया था। कथन 3 गलत है क्योंकि गांधी-इरविन समझौते (मार्च 1931) में सरकार ने केवल उन्हीं राजनीतिक बंदियों को रिहा करने पर सहमति दी थी जिन पर हिंसा का कोई आरोप नहीं था, तथा हिंसा के आरोपियों की रिहाई इस समझौते में शामिल नहीं थी।
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