BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

UPTET
16 views

बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत 'लॉरेंस कोहलबर्ग' (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) की विभिन्न अवस्थाओं और उनके स्तरों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कोहलबर्ग के सिद्धांत के 'पूर्व-पारंपरिक नैतिकता' (Pre-conventional Morality) स्तर के अंतर्गत आने वाली पहली अवस्था 'ज्ञानेन्द्रिय-प्रेरक अवस्था' (Sensory-Motor Stage) कहलाती है, जिसमें बालक दूसरों के तर्कों को सुने बिना केवल अपनी शारीरिक इच्छाओं के अनुसार नैतिक निर्णय लेता है।
  2. 2. 'पारंपरिक नैतिकता' (Conventional Morality) स्तर के अंतर्गत 'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की' (Good Boy-Good Girl) अभिविन्यास और 'कानून एवं व्यवस्था' (Law and Order) अभिविन्यास शामिल हैं, जहाँ व्यक्ति सामाजिक नियमों, अधिकार और समाज की स्वीकृत परंपराओं को बनाए रखने को ही सर्वोच्च नैतिकता मानता है।
  3. 3. 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता' (Post-conventional Morality) स्तर की अंतिम अवस्था 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःचेतना अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation) है, जिसमें व्यक्ति व्यक्तिगत विवेक और आंतरिक नैतिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेता है, भले ही वे नियम या कानून समाज के मौजूदा प्रावधानों या कानूनों के विरुद्ध क्यों न हों।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि कोहलबर्ग के सिद्धांत के प्रथम स्तर 'पूर्व-पारंपरिक नैतिकता' के अंतर्गत पहली अवस्था 'आज्ञाकारिता एवं सजा अभिविन्यास' (Obedience and Punishment Orientation) है, न कि 'ज्ञानेन्द्रिय-प्रेरक अवस्था' (जो कि जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास की पहली अवस्था है)। कथन 2 बिल्कुल सही है; पारंपरिक नैतिकता स्तर (लगभग 10 से 13 वर्ष) के अंतर्गत 'अच्छा लड़का-अच्छा लड़की' और 'कानून एवं व्यवस्था' अभिविन्यास आते हैं, जिसमें व्यक्ति समाज द्वारा बनाए गए नियमों और दूसरों की नजरों में अच्छा बनने के प्रति सजग रहता है। कथन 3 भी बिल्कुल सही है; उत्तर-पारंपरिक नैतिकता का अंतिम चरण 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःचेतना अभिविन्यास' है, जहाँ व्यक्ति अपने स्वविवेक, न्याय और मानवता के व्यापक सिद्धांतों के आधार पर कार्य करता है, भले ही इसके लिए उसे कानूनी दंड का सामना क्यों न करना पड़े।
Share:

Related Questions

→ उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सृजनात्मकता और अपसारी चिंतन' (Creativity and Divergent Thinking) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जॉय पॉल गुइफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित 'अपसारी चिंतन के घटकों' (धारावाहिक प्रवाह, लचीलापन, मौलिकता और विस्तार) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN), 'कार्यकारी नियंत्रण नेटवर्क' (Executive Control Network - ECN) और 'पालि संवेदी क्षेत्र' (Salience Network) के बीच विचारों के सहज उत्पादन, संज्ञानात्मक लचीलेपन और वैकल्पिक समस्या-समाधान की सक्रियण गतिकी, तथा एलिस पॉल टॉरेंस (E.P. Torrance) द्वारा प्रतिपादित 'सृजनात्मक चिंतन के परीक्षण' (Torrance Tests of Creative Thinking) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, मुक्त-अंत प्रश्न आधारित शिक्षाशास्त्र (Open-Ended Pedagogy) और विद्यार्थियों में कल्पनाशीलता, मौलिक विचारों के सृजन व समग्र समस्या-समाधान दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? → उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सृजनात्मकता' (Creativity) के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक जे. पी. गिलफोर्ड (J. P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित 'बुद्धि की संरचना' (Structure of Intellect - SOI) मॉडल तथा 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) के तत्वों में से 'मौलिकता' (Originality), 'धाराप्रवाहता' (Fluency), 'लचीलापन' (Flexibility) और 'विस्तरीकरण' (Elaboration) के वैज्ञानिक स्वरूप के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? → समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (Children with Special Needs - CWSN) के शिक्षण-अधिगम संदर्भ में, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-2005) तथा बाल-केंद्रित शिक्षा के सिद्धांतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य सामान्य विद्यालयों में सभी बच्चों (चाहे वे शारीरिक, मानसिक, सामाजिक या आर्थिक रूप से किसी भी भिन्नता से युक्त हों) को एक साथ समान अवसर प्रदान करना है, जिसमें शिक्षण विधियों और मूल्यांकन प्रणालियों को बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार लचीला (Flexible) बनाया जाता है। 2. 'विशिष्ट बालकों' के अंतर्गत केवल तीव्र बुद्धि या प्रतिभाशाली (Gifted) बालकों को शामिल किया जाता है, जबकि अधिगम अक्षमता (Learning Disabilities) और शारीरिक रूप से बाधित बालकों के लिए केवल पृथक् विशेष विद्यालयों (Segregated Special Schools) की स्थापना करना ही NCF-2005 का प्राथमिक और एकमात्र संस्तुत दृष्टिकोण है। 3. समावेशी कक्षाओं में 'विभेदीकृत अनुदेशन' (Differentiated Instruction) का तात्पर्य ऐसी शिक्षण रणनीति से है, जहाँ शिक्षक प्रत्येक छात्र की अद्वितीय अधिगम शैली, गति और पूर्व ज्ञान को ध्यान में रखते हुए विषय-वस्तु, प्रक्रिया और उत्पादों में उचित संशोधन करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? → उत्तर प्रदेश में 'बटेश्वर मेला' किस जिले में आयोजित किया जाता है? → उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास, शासन-प्रणाली और स्थानीय स्वशासन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 'उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम' वर्ष 1947 में पारित किया गया था, जिसके अंतर्गत राज्य में त्रि-स्तरीय पंचायत प्रणाली की स्थापना की गई। 2. उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (Legislative Council) का गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत किया गया है, और यह देश की सबसे बड़ी विधान परिषदों में से एक है जिसकी कुल सदस्य संख्या 100 है। 3. राज्य में 'क्षेत्र पंचायत' और 'ग्राम पंचायत' के बीच समन्वय स्थापित करने तथा ग्रामीण विकास योजनाओं को लागू करने के लिए जिला स्तर पर 'जिला पंचायत' सर्वोच्च संस्था होती है, जिसका अध्यक्ष प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा सार्वभौमिक मताधिकार के आधार पर चुना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.