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Indian Polity
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संसद की प्राक्कलन समिति के सदस्यों का कार्यकाल?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
1 वर्ष होता है।
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भारतीय संविधान के भाग-I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित आयोगों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को किसी राज्य के क्षेत्रफल को बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रयोजन के लिए राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के विधानमंडल को एक निश्चित समय-सीमा के भीतर अपने विचार व्यक्त करने के लिए विधेयक भेजा जाता है, किंतु राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त किए गए विचार राष्ट्रपति या संसद पर संवैधानिक रूप से बाध्यकारी (Binding) नहीं होते हैं।
2. वर्ष 1948 में गठित 'धार आयोग' (S.K. Dar Commission) ने भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की सिफारिश का पूर्ण समर्थन किया था, जिसके बाद जेवीपी समिति (JVP Committee) ने भी भाषाई आधार को राज्यों के गठन का एकमात्र मुख्य आधार स्वीकार कर लिया था।
3. फज़ल अली आयोग (Fazl Ali Commission), जिसने अपनी रिपोर्ट वर्ष 1955 में प्रस्तुत की थी, ने 'भाषाई राज्यों' के सिद्धांत को तो स्वीकार किया था, किंतु 'एक राज्य-एक भाषा' के सिद्धांत को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 67(b) के अनुसार उपराष्ट्रपति को राज्य सभा के ऐसे संकल्प द्वारा उसके पद से हटाया जा सकता है जिसे राज्य सभा के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत ने पारित किया हो और जिससे लोकसभा सहमत हो, किंतु इस प्रकार का कोई भी प्रस्ताव तब तक प्रस्तुत नहीं किया जा सकता जब तक कि इस आशय के प्रस्ताव की कम से कम चौदह दिन की पूर्व सूचना न दी गई हो।
2. अनुच्छेद 75(1) के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, तथा 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के पश्चात प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
3. सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के तहत मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होते हैं, जिसका तात्पर्य यह है कि मंत्रिमंडल का कोई भी निर्णय यदि संसद के किसी एक सदन में भी अस्वीकृत हो जाए, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को अपने पद से त्यागपत्र देना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) में निहित समाजवादी सिद्धांतों के क्रियान्वयन के लिए बनाई गई विधियों को केवल इस आधार पर अमान्य नहीं किया जा सकता है कि वे अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन करती हैं, बशर्ते उन्हें अनुच्छेद 31C का संरक्षण प्राप्त हो।
2. सर्वोच्च न्यायालय ने 'मिनर्वा मिल्स वाद' (1980) के निर्णय में यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया था कि संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) को बनाए रखने के लिए भाग-III (मूल अधिकार) और भाग-IV (नीति निर्देशक तत्व) के बीच संतुलन का होना अनिवार्य है, और इनमें से किसी एक को दूसरे पर पूर्ण प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।
3. यद्यपि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मौलिक हैं और देश की विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य है, तथापि संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार इन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा बलपूर्वक प्रवर्तित (Enforceable) कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकती है, जबकि अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को किसी राज्य के क्षेत्र को घटाने, बढ़ाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने की शक्ति दी गई है और इस प्रकार के किसी भी विधेयक को राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता।
2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी राज्य के नाम, सीमा या क्षेत्र में परिवर्तन करने वाले विधेयक को राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए भेजा जाता है, और राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित या अनुमत समय के भीतर व्यक्त किया गया विचार (मत) राष्ट्रपति या संसद के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होता है, जिससे यदि राज्य विधानमंडल विधेयक के विरुद्ध प्रस्ताव पारित कर दे तो संसद उस राज्य की सीमा में परिवर्तन नहीं कर सकती।
3. अनुच्छेद 4 यह स्पष्ट करता है कि अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों का प्रवेश, स्थापना, या राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने के लिए बनाई गई विधियों को संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' नहीं माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि ऐसे कानून साधारण बहुमत (Simple Majority) द्वारा पारित किए जा सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की अनुसूचियों, भागों और राजभाषा से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत अनुच्छेद 344 में यह उपबंध है कि राष्ट्रपति संविधान के प्रारंभ से पाँच वर्ष की अवधि समाप्त होने पर और उसके पश्चात प्रत्येक दस वर्ष की समाप्ति पर एक राजभाषा आयोग का गठन करेगा, जिसमें भारत की आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट सभी भाषाओं के प्रतिनिधियों का होना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाएगा।
2. भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें विभिन्न संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें, 92वें और 92वें संशोधनों के माध्यम से सिंधी, कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली, बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली) के पश्चात बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, किंतु इस अनुसूची में 'अंग्रेजी' भाषा को अभी तक आधिकारिक रूप से शामिल नहीं किया गया है।
3. राजनीतिक दलों के पंजीकरण से संबंधित प्रावधान मूल संविधान के किसी भी भाग या अनुसूची में नहीं दिए गए थे, बल्कि इन्हें जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत सांविधिक रूप से जोड़ा गया, जबकि राजनीतिक दलों के सदस्यों द्वारा दल-बदल के आधार पर अयोग्यता के संवैधानिक प्रावधान को 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा दसवीं अनुसूची के रूप में संविधान में जोड़ा गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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