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Indian Polity
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अनुच्छेद 324 किससे संबंधित है?

Detailed Explanation

चुनाव आयोग से संबंधित है।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक दायित्वों, उनके स्वतंत्र कामकाज और विशेषाधिकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अंतर्गत नियुक्त भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसके लिए यह अनिवार्य है कि वह उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने की योग्यता रखता हो, और उसे भारत सरकार के विधि मामलों में सलाह देने के साथ-साथ देश के किसी भी न्यायालय में सुनवाई का अधिकार प्राप्त होता है, किंतु वह भारत सरकार का पूर्णकालिक सरकारी सेवक नहीं होता है। 2. महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों या उसकी संयुक्त बैठक में तथा संसद की किसी भी समिति में, जिसका उसे सदस्य बनाया जाए, बोलने और उसकी कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु संविधान के अनुच्छेद 88 के तहत उसे संसद की किसी भी कार्यवाही में मतदान करने का कोई अधिकार नहीं दिया गया है। 3. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) का पद भारतीय शासन प्रणाली का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ है, और CAG भारत की संचित निधि तथा प्रत्येक राज्य व संघ राज्य क्षेत्र (जहाँ विधानसभा हो) की संचित निधि से होने वाले सभी व्ययों की लेखापरीक्षा करता है, तथा अपनी लेखापरीक्षा रिपोर्ट सीधे राष्ट्रपति और राज्यपालों के माध्यम से संसद और राज्य विधानमंडलों के समक्ष रखवाता है। 4. CAG को उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, और अपने पद से सेवानिवृत्त होने के बाद सीएजी भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के अन्य पद को धारण करने के लिए पात्र होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों की स्वतंत्रता, उनकी क्षेत्राधिकारिता तथा अधीनस्थ न्यायपालिका के नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी अन्य विधिक अधिकार (Legal Right) के प्रवर्तन के लिए भी प्रादेश (Writ) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और इस संदर्भ में उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता का प्रादेशिक एवं विषय-वस्तु का क्षेत्र सर्वोच्च न्यायालय की तुलना में अधिक व्यापक है। 2. संविधान के अनुच्छेद 227 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर आने वाले सभी न्यायालयों और न्यायाधिकरणों (Tribunals) पर अधीक्षण की शक्ति प्राप्त है, और यह अधीक्षण शक्ति केवल प्रशासनिक मामलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार न्यायिक निर्णयों की समीक्षा एवं विधिक त्रुटियों के सुधार तक भी होता है। 3. अनुच्छेद 233 के प्रावधानों के तहत किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति उस राज्य के राज्यपाल द्वारा संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात की जाती है, और जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि वह व्यक्ति कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या प्लीडर रहा हो तथा संघ या राज्य की न्यायिक सेवा में पहले से कार्यरत न हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? अनुच्छेद 343 क्या है? भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायपालिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने प्रादेशिक अधिकारक्षेत्र के सभी न्यायालयों और अधिकरणों (सैन्य अधिकरणों को छोड़कर) पर अधीक्षण (Superintendence) करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति केवल न्यायिक अधीक्षण तक सीमित है, प्रशासनिक अधीक्षण तक इसका विस्तार नहीं होता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 233 के अंतर्गत जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात की जाती है, तथा किसी व्यक्ति को जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किए जाने के लिए यह अनिवार्य है कि वह कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या प्लीडर रहा हो और संघ या राज्य की सेवा में पहले से कार्यरत न हो। 3. संविधान के अनुच्छेद 236 के निर्वचन के अनुसार 'जिला न्यायाधीश' के अंतर्गत नगर सिविल न्यायालय का न्यायाधीश, अपर जिला न्यायाधीश, संयुक्त जिला न्यायाधीश, सहायक जिला न्यायाधीश, लघु वाद न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश, मुख्य presidency मजिस्ट्रेट और सेशन न्यायाधीश सभी शामिल होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संवैधानिक उपबंधों, स्वतंत्रता और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग या किसी संयुक्त लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, और इनमें से प्रत्येक आयोग के कम से कम आधे सदस्य ऐसे व्यक्ति होंगे जो भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष तक पद धारण कर चुके हों। 2. संविधान के अनुच्छेद 317 के अंतर्गत लोक सेवा आयोग के किसी भी सदस्य को उसके पद से केवल राष्ट्रपति के आदेश द्वारा ही हटाया जा सकता है, भले ही वह संघ लोक सेवा आयोग का सदस्य हो या राज्य लोक सेवा आयोग का, और राज्यपाल को राज्य लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को हटाने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है। 3. संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य अपने पद की अवधि समाप्त होने पर उसी पद पर पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होते हैं, किंतु संघ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात संघ या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद के अलावा भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन के लिए पात्र होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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