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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भू-गर्भीय विभाजन के अंतर्गत 'भाबर क्षेत्र' (Bhabar Region) की विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भाबर क्षेत्र हिमालय के गिरिपद (Foot Hills) में शिवालिक श्रेणी के ठीक दक्षिण में एक संकीर्ण (लगभग 8 से 16 किमी चौड़ी) पेटी के रूप में सहारनपुर से लेकर कुशीनगर तक पश्चिम से पूर्व फैला हुआ है।
  2. 2. इस क्षेत्र में नदियाँ ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों से उतरते समय अपने साथ भारी मात्रा में बड़े-बड़े बोल्डर, कंकड़ और पत्थर बहाकर लाती हैं और उन्हें यहाँ निक्षेप कर देती हैं, जिसके परिणामस्वरूप इस अत्यधिक पारगम्य (Permeable) क्षेत्र में अधिकांश छोटी नदियाँ धरातल के नीचे विलुप्त (गायब) होकर प्रवाहित होती हैं।
  3. 3. अत्यधिक पथरीली और कंकड़-पत्थर युक्त मृदा होने के कारण भाबर क्षेत्र कृषि के लिए अत्यधिक उपयुक्त माना जाता है, जहाँ गेحूँ और गन्ने की सघन खेती की जाती है, जबकि यहाँ बड़े पैमाने पर सघन वन भी पाए जाते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि भाबर क्षेत्र पश्चिम में सहारनपुर से शुरू होकर पूर्व में देवरिया/कुशीनगर तक नहीं बल्कि मुख्य रूप से सोनभद्र या पूर्वी सीमा तक नहीं फैला है, बल्कि इसकी भौगोलिक स्थिति सहारनपुर से पडरौना/कुशीनगर तक नहीं बल्कि मुख्य रूप से तराई के साथ पश्चिमी से पूर्वी जिलों तक है, किंतु मुख्य रूप से कथन 1 में भौगोलिक विस्तार के संदर्भ में यह ध्यान रखना है कि यह पश्चिम में सहारनपुर से लेकर पूर्व में नेपाल सीमा तक फैला है, लेकिन कुशीनगर तक इसकी निरंतरता नहीं मानी जाती; और सबसे मुख्य कारण कथन 3 का असत्य होना है: भाबर क्षेत्र की मृदा अत्यधिक पथरीली, कंकड़ और बोल्डर युक्त होने के कारण कृषि के लिए अनुपयुक्त होती है (यहाँ कृषि नहीं की जा सकती, यहाँ बड़े और कंटीले वन पाए जाते हैं)। कृषि योग्य भूमि तराई क्षेत्र में होती है, भाबर में नहीं। अतः केवल कथन 2 सही है क्योंकि यहाँ नदियाँ कंकड़-पत्थरों के नीचे विलुप्त हो जाती हैं।
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