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उत्तर प्रदेश की 'लोक कला, संस्कृति और मेलों' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और सोनभद्र क्षेत्रों में प्रसिद्ध 'कजरी' लोकगीत मुख्य रूप से वर्षा ऋतु (सावन के महीने) में गाया जाता है, जो प्रकृति के सौंदर्य और राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंगों से जुड़ा हुआ है।
  2. 2. उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में लगने वाला 'देवा शरीफ का मेला' प्रसिद्ध सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की याद में आयोजित किया जाता है, जो हिन्दू-मुस्लिम एकता और साप्रदायिक सौहार्द का एक अनूठा प्रतीक है।
  3. 3. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में किया जाने वाला 'राई नृत्य' महिलाओं द्वारा केवल विवाह उत्सव के अवसर पर मयूर की भांति पंख पहनकर किया जाने वाला एक शास्त्रीय नृत्य है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि 'कजरी' मिर्जापुर, सोनभद्र और वाराणसी क्षेत्र का एक अत्यंत प्रसिद्ध वर्षाकालीन लोकगीत है, जो सावन के महीने में गाया जाता है। कथन 2 सही है क्योंकि बाराबंकी जिले में स्थित देवा शरीफ में सूफी संत हाजी वारिस अली शाह के उर्स पर प्रसिद्ध मेला लगता है जो सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है। कथन 3 गलत है क्योंकि बुंदेलखंड का 'राई नृत्य' मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा श्री कृष्ण जन्मोत्सव या मयूर नृत्य शैली में किया जाता है, लेकिन यह केवल विवाह उत्सव तक सीमित नहीं है और यह कोई 'शास्त्रीय नृत्य' (Classical Dance) नहीं बल्कि एक प्रमुख 'लोक नृत्य' (Folk Dance) है। उत्तर प्रदेश का एकमात्र शास्त्रीय नृत्य 'कथक' है।
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