त्वरित लिंक्स
UPTET
17 views
उत्तर प्रदेश के भौतिक विभाजनों और उनके भौगोलिक लक्षणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उत्तर प्रदेश का भाबर क्षेत्र शिवालिक पहाड़ियों के ठीक गिरिपद (Foothills) में पश्चिम में सहारनपुर से लेकर पूर्व में कुशीनगर तक एक संकीर्ण पट्टी के रूप में फैला है, जहाँ नदियाँ कंकड़-पत्थर और मोटे अवसादों का निक्षेपण करती हैं और अधिकांश नदियाँ इस अदृश्य क्षेत्र में विलुप्त हो जाती हैं।
- 2. बांगड़ क्षेत्र पुरानी जलोढ़ मिट्टी से निर्मित मैदान है जो नदियों की बाढ़ की पहुँच से ऊँचाई पर स्थित होता है, और इस क्षेत्र में अक्सर भूमि के अत्यधिक उपजाऊपन में कमी आने से 'रेह' या 'कल्लर' (नमकीन एवं क्षारीय उर भूमि) की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
- 3. विंध्यन पर्वतीय एवं पठारी क्षेत्र के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के दक्षिण में सोनभद्र, मिर्ज़ापुर, चंदौली और प्रयागराज के मेजा व करछना तहसीलों का भूभाग शामिल है, जहाँ बलुआ पत्थर, चूना पत्थर और गेरू जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उत्तर प्रदेश के भौतिक विभाजन से संबंधित तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। 1. भाबर क्षेत्र शिवालिक के तलहटी में स्थित है जहाँ नदियाँ बड़े कंकड़-पत्थर और बोल्डर जमा करती हैं, जिससे जल सतह के नीचे बहता है और नदियाँ यहाँ विलुप्तप्राय प्रतीत होती हैं। 2. बांगड़ क्षेत्र प्राचीन जलोढ़ मिट्टी (Old Alluvium) का मैदान है, और अत्यधिक सिंचाई या जल निकासी के अभाव के कारण यहाँ क्षारीय एवं नमकीन परत जम जाती है जिसे 'रेह' या 'कल्लर' कहा जाता है। 3. दक्षिण का पठारी और विंध्य क्षेत्र सोनभद्र, मिर्ज़ापुर, चंदौली आदि जिलों तक विस्तृत है, जो प्राचीन प्रायद्वीपीय पठार का उत्तरward विस्तार है और यहाँ बलुआ पत्थर व चूना पत्थर जैसे खनिज बहुतायत में मिलते हैं। अतः विकल्प (d) सही है।
Related Questions
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमताओं और उपचारात्मक शिक्षण' के संदर्भ में, सैमुअल किर्क (Samuel Kirk) द्वारा प्रतिपादित 'डेटा-आधारित उपचारात्मक शिक्षण मॉडल' के अंतर्गत नैदानिक चरणों—जैसे त्रुटि विश्लेषण, कारण पहचान, और लक्षित हस्तक्षेप—तथा गेरहार्ड क्रूग (Gerhard Krueger) और अन्य शोधकर्ताओं द्वारा विकसित 'मेटাকॉग्निटिव स्ट्रेटेजी ट्रेनिंग' (Metacognitive Strategy Training) के अंतर्गत विद्यार्थियों की 'स्वयं-नियमन' (Self-Regulation), 'स्वयं-निगरानी' (Self-Monitoring), और 'स्वयं-मूल्यांकन' (Self-Evaluation) क्षमताओं के वैज्ञानिक स्वरूप के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक समावेशी और विशिष्ट कक्षा-कक्ष प्रबंधन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
→
उत्तर प्रदेश के लोक नृत्यों और उनसे संबंधित सांस्कृतिक क्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. ख्याल नृत्य (Khayal Dance) - बुंदेलखंड क्षेत्र (पुत्र जन्मोत्सव के अवसर पर रंग बिरंगे कागजों और बांस से मंदिरनुमा प्रतिकृति सिर पर रखकर किया जाता है)
2. धोबिया नृत्य (Dhobiya Dance) - पूर्वांचल क्षेत्र (यह नृत्य मुख्य रूप से धोबी समुदाय द्वारा किया जाता है, जिसमें संगीत और नृत्य के माध्यम से कपड़े धोने की कला और जीवन शैली का प्रदर्शन होता है)
3. पाई-डंडा नृत्य (Paiji-Danda Dance) - ब्रज क्षेत्र (यह गुजरात के गरबा नृत्य के समान लाठियों से खेलते हुए किया जाने वाला एक अहिरवार और यादव समुदाय का युद्ध नृत्य है)
4. चरकुला नृत्य (Charkula Dance) - ब्रज क्षेत्र (इसमें बैलगाड़ी या रथ के पहिये पर कई सारे जलते हुए दीये रखकर महिला सिर पर संतुलन बनाकर नृत्य करती है)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
→
बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे के अनुसार संज्ञानात्मक विकास कोई निरंतर चलने वाली प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह गुणात्मक रूप से भिन्न चार क्रमिक अवस्थाओं (चरणों) के माध्यम से होती है, जिसमें प्रत्येक अवस्था पूर्वगामी अवस्था का पुनर्निर्माण करती है।
2. 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) और 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) की क्षमता पूर्ण रूप से विकसित हो जाती है, जिससे वे किसी वस्तु के आकार या रूप में परिवर्तन होने के बावजूद उसके मूल गुणों को समझ पाते हैं।
3. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage - लगभग 7 से 11 वर्ष) में बालक वस्तुओं को श्रेणियों या उप-श्रेणियों में वर्गीकृत करने की योग्यता (Classification) और 'क्रमबद्धता' (Seriation) सीख जाते हैं, लेकिन वे अमूर्त और काल्पनिक प्रस्तावनाओं पर तार्किक रूप से विचार करने में असमर्थ होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
ले Vygotsky के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत में 'स्कैफोल्डिंग' (Scaffolding) शब्द का क्या अर्थ है?
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बाल विकास एवं शिक्षण विधि' के अंतर्गत, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' की अंतिम अवस्था यानी 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) के दौरान प्रकट होने वाली सबसे प्रमुख तार्किक क्षमता, जिसमें व्यक्ति बिना वास्तविक वस्तुओं की उपस्थिति के केवल प्रतीकों, बयानों और अमूर्त प्रस्तावों (Abstract Propositions) के आधार पर मानसिक रूप से तार्किक निष्कर्ष निकाल सकता है, को निम्नलिखित में से किस विशिष्ट नाम से जाना जाता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.