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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और बौद्ध शिक्षा के संदर्भ में, 'प्रव्रज्या' (Pravrajya) संस्कार का मुख्य उद्देश्य और उसकी विशेषता निम्नलिखित में से क्या थी?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली में बौद्ध शिक्षा पद्धति का विशेष स्थान था। बौद्ध संघ या मठों में प्रवेश के लिए 'प्रव्रज्या' संस्कार अनिवार्य था। लगभग 8 वर्ष की आयु पूरी होने पर बालक इस संस्कार के माध्यम से गृह त्याग कर बौद्ध भिक्षु के रूप में संघ में प्रवेश करता था। प्रव्रज्या का शाब्दिक अर्थ 'बाहर जाना' (संन्यास की ओर कदम बढ़ाना) है। इस संस्कार के पश्चात छात्र को 'श्रामणेर' (Novice) कहा जाता था, जो मठ के कठोर नियमों का पालन करते हुए बौद्ध ग्रंथों और शिक्षाओं का अध्ययन करता था। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए 20 वर्ष की आयु में 'उपासंपदा' संस्कार होता था। अतः विकल्प (b) इस संदर्भ में सबसे सटीक और सही उत्तर है।
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