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UPTET
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उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक, राजनीतिक और विधायी इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश का वर्तमान नाम वर्ष 1950 में पूर्णतः अस्तित्व में आया, इससे पूर्व ब्रिटिश शासन काल में इस विस्तृत भू-भाग को 'संयुक्त प्रान्त आगरा एवं अवध' (United Provinces of Agra and Oudh) के नाम से जाना जाता था, जिसे संक्षिप्त करके वर्ष 1937 में केवल 'संयुक्त प्रान्त' (United Provinces) कर दिया गया था। 2. उत्तर प्रदेश में द्विसदनीय विधानमंडल (Bicameral Legislature) की व्यवस्था है, जिसके अंतर्गत विधान परिषद (Legislative Council) राज्य की उच्च सदन है और इसका गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 के प्रावधानों के तहत किया गया है, जिसमें कुल सदस्यों की संख्या 100 निर्धारित है। 3. राज्य की प्रथम विधानसभा का गठन स्वतंत्रता के तुरंत पश्चात वर्ष 1952 में किया गया था और इसके प्रथम निर्वाचित अध्यक्ष (Speaker) पुरुषोत्तम दास टंडन थे, जबकि स्वतंत्रता पूर्व वर्ष 1937 में गठित संयुक्त प्रान्त की पहली विधानसभा के अध्यक्ष आदरणीय राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन ही थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। ब्रिटिश काल में 1902 से इस क्षेत्र का नाम 'आगरा और अवध का संयुक्त प्रान्त' था, जिसे 1937 में छोटा करके 'संयुक्त प्रान्त' (United Provinces) कर दिया गया। स्वतंत्रता के पश्चात 24 जनवरी 1950 को इसका नाम आधिकारिक रूप से 'उत्तर प्रदेश' रखा गया। उत्तर प्रदेश में द्विसदनीय व्यवस्था है जहाँ विधान परिषद में कुल 100 सदस्य हैं (जो भारत में सर्वाधिक है)। राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन 1937 में संयुक्त प्रान्त की विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष चुने गए थे और वे स्वतंत्रता के बाद भी 1950 तक इस पद पर रहे।
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