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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भू-गर्भीय इतिहास के संदर्भ में, 'बुंदेलखंड पठार' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. यह क्षेत्र प्राचीनतम 'गोंडवानालैंड' का एक भाग है, जिसका निर्माण मुख्य रूप से प्री-कैम्बियन युग की नीस (Gneiss), ग्रेनाइट और विंध्यन क्रम की बलुआ पत्थरों एवं चूना पत्थर की चट्टानों से हुआ है।
- 2. इस पठारी क्षेत्र में मिलने वाली अधिकांश नदियाँ (जैसे- चंबल, बेतवा, केन और धसान) वर्षा पर आधारित होने के कारण मौसमी (Non-perennial) प्रकृति की हैं और इन्होंने यहाँ गहरी खड्डों (Ravines) एवं बीहड़ों का निर्माण किया है।
- 3. इस क्षेत्र की प्रमुख मृदा 'मार' और 'काबर' हैं, जो अत्यधिक उपजाऊ और जल सोखने की क्षमता वाली चिकनी मिट्टी हैं, जिसके कारण यहाँ सिंचाई की आवश्यकता न्यूनतम होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: बुंदेलखंड का पठार प्रायद्वीपीय पठार का उत्तर की ओर फैला हुआ हिस्सा है, जो प्राचीन गोंडवानालैंड का भाग है तथा यहाँ प्री-कैम्बियन युग की ग्रेनाइट, नीस एवं विंध्यन क्रम की चट्टानें पाई जाती हैं। कथन 2 सही है: बुंदेलखंड क्षेत्र की नदियाँ (चंबल, बेतवा, केन आदि) मौसमी होती हैं और बहते हुए भू-कटाव के कारण यहाँ बीहड़ (Ravines) का निर्माण करती हैं। कथन 3 गलत है: 'मार' और 'काबर' मृदाओं में नमी धारण करने की क्षमता तो अधिक होती है और सूखने पर उनमें गहरी दरारें पड़ती हैं, परंतु यह क्षेत्र शुष्क जलवायु और कम वर्षा वाला है, जिसके कारण यहाँ कृषि के लिए 'सिंचाई की आवश्यकता सर्वाधिक होती है', न कि न्यूनतम। अतः कथन 3 असत्य है।
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उत्तर प्रदेश के वन्यजीव विहारों (Wildlife Sanctuaries) और उनकी स्थापना से संबंधित जनपदों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. हस्तिनापुर वन्यजीव विहार - मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, अमरोहा और हापुड़ - यह उत्तर प्रदेश का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा वन्यजीव विहार है, जिसकी स्थापना वर्ष 1986 में की गई थी और यह मुख्य रूप से दलदली हिरण (बारासिंगा) तथा गंगा डॉल्फिन संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।
2. चंद्रप्रभा वन्यजीव विहार - चंदौली जिला - यह उत्तर प्रदेश का प्रथम (सबसे पुराना) वन्यजीव विहार है, जिसकी स्थापना वर्ष 1957 में विंध्य पर्वत श्रृंखला के वनों में एशियाई शेरों के पुनरुत्पादन एवं संरक्षण के उद्देश्य से की गई थी।
3. किशनपुर वन्यजीव विहार - लखीमपुर खीरी जिला - यह दुधवा टाइगर रिजर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो मुख्यतः बारहसिंगा, बाघ और दलदली क्षेत्रों के विशिष्ट वन्यजीवों के लिए जाना जाता है।
4. महावीर स्वामी वन्यजीव विहार - ललितपुर जिला - यह उत्तर प्रदेश का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा वन्यजीव विहार है, जिसकी स्थापना वर्ष 1977 में की गई थी और यह विशेष रूप से काले हिरण (Blackbuck) तथा तेंदुए के संरक्षण के लिए जाना जाता है।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सामाजिक-सांस्कृतिक अधिगम सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) द्वारा प्रतिपादित 'समीपस्थ विकास क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) और 'मचान (Scaffolding)' की अवधारणाओं के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (Mirror Neuron System - MNS), 'लैंग्वेज नेटवर्क' (Broca's and Wernicke's Areas), और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex) के बीच सामाजिक-संज्ञानात्मक अनुकरण (Socio-cognitive Imitation), आंतरिक भाषण (Inner Speech) और बाह्य मार्गदर्शन के एकीकरण की सक्रियण गतिकी, तथा जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'सांस्कृतिक मचान' (Cultural Scaffolding) के सिद्धांत के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'सोशियो-कंस्ट्रक्टिविस्ट पेडागोजी' (Socio-Constructivist Pedagogy) और विद्यार्थियों में सहयोगात्मक समस्या-समाधान, भाषाई मध्यस्थता व समग्र संज्ञानात्मक विकास के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण तथा जैव-रासायनिक चक्रों (Biogeochemical Cycles) के संदर्भ में 'नाइट्रोजन चक्र' (Nitrogen Cycle) और इसकी विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वायुमंडलीय नाइट्रोजन (N2) को पौधों द्वारा सीधे सीधे रूप में ग्रहण नहीं किया जा सकता है, इसलिए 'नाइट्रोजन स्थिरीकरण' (Nitrogen Fixation) प्रक्रिया के तहत कुछ विशिष्ट सूक्ष्मजीव जैसे राइजोबियम (Rhizobium), एजोटोबैक्टर (Azotobacter) और नीले-हरे शैवाल (Cyanobacteria) इसे अमोनिया या नाइट्रेट यौगिकों में बदलते हैं।
2. 'नाइट्रीकरण' (Nitrification) वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत मृदा में मौजूद अमोनिया को पहले नाइट्रोसोमोनास (Nitrosomonas) बैक्टीरिया द्वारा नाइट्राइट में और फिर नाइट्रोबैक्टर (Nitrobacter) बैक्टीरिया द्वारा नाइट्रेट में परिवर्तित किया जाता है, जिसे पौधे आसानी से अवशोषित कर लेते हैं।
3. 'डिट्रीफिकेशन' (Denitrification) या विनाइट्रीकरण प्रक्रिया के दौरान स्यूडोमोनास (Pseudomonas) जैसे विनाइट्रीकारी बैक्टीरिया मृदा में उपस्थित नाइट्रेट्स को वापस गैसीय नाइट्रोजन (N2) में बदलकर वायुमंडल में मुक्त कर देते हैं, जिससे नाइट्रोजन का वैश्विक संतुलन बना रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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