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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, 'विभेदित अनुदेशन' (Differentiated Instruction) की अवधारणा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. विभेदित अनुदेशन एक ऐसा अध्यागम दृष्टिकोण है जहाँ शिक्षक विद्यार्थियों की व्यक्तिगत भिन्नताओं (जैसे उनकी अधिगम शैली, तत्परता स्तर और रुचियों) को ध्यान में रखते हुए शिक्षण सामग्री, प्रक्रियाओं और उत्पादों में लचीलापन अपनाता है।
- 2. यह दृष्टिकोण केवल विशेष आवश्यकता वाले बालकों (CWSN) के लिए अनुकूलित है और सामान्य कक्षाओं में प्रतिभाशाली या औसत बालकों के शिक्षण परिणामों पर इसका कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
- 3. विभेदित अनुदेशन का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक छात्र को उसकी क्षमता के अनुरूप अधिकतम प्रगति करने के अवसर प्रदान करना और सहयोगात्मक अधिगम वातावरण का निर्माण करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
समावेशी शिक्षा में 'विभेदित अनुदेशन' (Differentiated Instruction) एक महत्वपूर्ण शिक्षण रणनीति है। कथन 1 सही है क्योंकि यह दृष्टिकोण विद्यार्थियों की व्यक्तिगत भिन्नताओं (जैसे सीखने की गति, रुचि और पूर्व ज्ञान) के अनुसार शिक्षण विधियों को ढालने पर जोर देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि विभेदित अनुदेशन केवल विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि कक्षा के सभी बच्चों—चाहे वे प्रतिभाशाली हों, औसत हों या धीमी गति से सीखने वाले हों—के लिए समान रूप से उपयोगी होता है। कथन 3 सही है, इसका मुख्य उद्देश्य प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत क्षमता का विकास और समावेशी तथा सहयोगात्मक वातावरण तैयार करना है। अतः केवल कथन 1 और 3 सही हैं।
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