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UPTET
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बालकों (CWSN) के लिए 'सार्वभौमिक डिज़ाइन अधिगम' (Universal Design for Learning - UDL) के सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. UDL एक ऐसा पाठ्यक्रम और शिक्षण ढांचा है जो अधिगम की बाधाओं को दूर करने के लिए शिक्षण विधियों, सामग्रियों और मूल्यांकन के तरीकों में शुरुआत से ही लचीलापन और बहुविकल्प प्रदान करता है।
  2. 2. UDL के तीन मुख्य मनोवैज्ञानिक और तंत्रिका-वैज्ञानिक आधार हैं: सहभागिता के बहुविध साधन (Multiple Means of Engagement), प्रस्तुति के बहुविध साधन (Multiple Means of Representation), और अभिव्यक्ति के बहुविध साधन (Multiple Means of Action and Expression)।
  3. 3. यह दृष्टिकोण केवल दिव्यांग या बौद्धिक रूप से पिछड़े बच्चों के लिए ही अनुकूलित है, और सामान्य अथवा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए इसका उपयोग करने से उनके उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक विकास में बाधा उत्पन्न होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि 'सार्वभौमिक डिज़ाइन अधिगम' (UDL) एक ऐसा दृष्टिकोण है जो सभी प्रकार के शिक्षार्थियों की विविध आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शिक्षण सामग्री, विधियों और मूल्यांकन में लचीलापन और बहुविकल्पीय उपागम प्रदान करता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि UDL रूपरेखा मुख्य रूप से तीन सिद्धांतों पर आधारित है: सहभागिता (क्यों सीखें), प्रस्तुति (क्या सीखें - ज्ञान का प्रतिनिधित्व), और अभिव्यक्ति (कैसे सीखें - प्रदर्शन के साधन)। कथन 3 गलत है क्योंकि UDL किसी एक विशिष्ट समूह (जैसे केवल दिव्यांग) तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामान्य, प्रतिभाशाली और विशेष आवश्यकता वाले सभी विद्यार्थियों के लिए समान रूप से अत्यधिक प्रभावी और लाभकारी होता है।
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