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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और दर्शन के संदर्भ में, 'वैशेषिक दर्शन' और उसके प्रणेता महर्षि कणाद द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक महर्षि कणाद (उलूक) हैं, और यह एक भौतिकवादी एवं pluralistic (बहुवादी) दर्शन है जो इस ब्रह्मांड की रचना 'परमाणुवाद' (Atomic Theory) के सिद्धांत पर आधारित मानता है।
- 2. इस दर्शन के अनुसार, संपूर्ण भौतिक जगत अदृश्य और अविभाज्य 'परमाणुओं' से मिलकर बना है, और पृथ्वी, जल, तेज (अग्नि) तथा वायु- इन चार द्रव्यों के परमाणु नित्य होते हैं, जबकि आकाश को परमाणु नहीं बल्कि एक अमूर्त विभु द्रव्य माना गया है।
- 3. वैशेषिक दर्शन न्याय दर्शन के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है (इसे न्याय-वैशेषिक युग्म भी कहा जाता है), और यह मोक्ष प्राप्ति के लिए 'पदार्थों के तत्वज्ञान' (षड्धर्मों या छह श्रेणियों- द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष और समवाय का ज्ञान) को आवश्यक मानता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वैशेषिक दर्शन भारतीय दर्शन के छह आस्तिक (orthodox) दर्शनों में से एक है। इसके प्रवर्तक महर्षि कणाद हैं। यह दर्शन परमाणुवाद (Atomic Theory) का जनक माना जाता है, जिसके अनुसार संसार के सभी भौतिक पदार्थ अत्यंत सूक्ष्म, अविभाज्य कणों यानी परमाणुओं से बने हैं। इसके अनुसार पृथ्वी, जल, अग्नि और वायु के परमाणु नित्य हैं, जबकि आकाश नित्य तो है परंतु इसका परमाणु नहीं होता क्योंकि यह सर्वव्यापी (विभु) है। वैशेषिक दर्शन ने पदार्थों का वर्गीकरण करने के लिए छह (बाद में सात) श्रेणियां (पदार्थ) बताई हैं- द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय और (बाद में जुड़ा) अभाव। न्याय और वैशेषिक दोनों दर्शनों का संलयन बाद में हुआ, इसलिए इन्हें 'समान तंत्र' भी कहा जाता है। अतः दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं।
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हिंदी व्याकरण के अंतर्गत, 'यद्यपि' शब्द में कौन सी संधि है तथा इसका सही संधि-विच्छेद क्या होगा?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं जलवायु संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश की जलवायु मुख्य रूप से 'उष्णकटिबंधीय मानसूनी' (Tropical Monsoon) प्रकार की है, जिसमें ग्रीष्म ऋतु में अत्यधिक गर्मी और शीत ऋतु में ठंडक मुख्य विशेषताएँ हैं।
2. राज्य में सर्वाधिक वर्षा बंगाल की खाड़ी की मानसूनी शाखा से होती है, और जैसे-जैसे हम पूर्व से पश्चिम की ओर तथा दक्षिण से उत्तर की ओर (पर्वत की तरफ) बढ़ते हैं, वर्षा की मात्रा में क्रमिक कमी आती जाती है।
3. उत्तर प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 6 प्रतिशत से अधिक भाग वच्छाच्छादित (Forest Cover) एवं वृक्ष आच्छादित है, जिसमें तराई एवं दक्षिणी पठारी जिलों (जैसे सोनभद्र, चंदौली, मिर्जापुर) में सर्वाधिक वन घनत्व पाया जाता है।
4. उत्तर प्रदेश में ग्रीष्मकाल में चलने वाली गर्म एवं शुष्क पछुआ हवाओं को 'लू' (Loo) कहा जाता है, जिसका सर्वाधिक प्रभाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्यवर्ती मैदानों में देखने को मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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लेव वायगोत्สกी के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत में पाद (Scaffolding) शब्द किसे इंगित करता है?
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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के अंतर्गत 'जैव भू-रासायनिक चक्रों' (Biogeochemical Cycles) में 'फॉस्फोरस चक्र' (Phosphorus Cycle) की मुख्य विशेषता निम्नलिखित में से क्या है?
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उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना, कृषि और फसल उत्पादन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में पाई जाने वाली 'लोमी' (दोमट) और जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil) धान, गेहूँ और गन्ने की सघन खेती के लिए अत्यधिक उपजाऊ मानी जाती है, क्योंकि इसमें पोटाश और चूने की प्रचुरता होती है।
2. 'राँड़' (Raad) और 'मार' (Mar) प्रकार की मृदाएँ मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के उत्तर में स्थित तराई पट्टी में पाई जाती हैं, जो अत्यधिक उपजाऊ होती हैं और जिनमें धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।
3. उत्तर प्रदेश में 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना' (Soil Health Card Scheme) के अंतर्गत किसानों को उनके खेतों की मिट्टी की पोषक तत्वों की स्थिति की जानकारी दी जाती है, ताकि उर्वरकों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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