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Indian Polity
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लोकसभा में सदस्यों की अधिकतम संख्या?

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550।
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→ भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियों (Pardoning Powers) और वीटो शक्तियों (Veto Powers) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को सेना न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के मामले में तथा उन सभी मामलों में जिनमें दंड या दंडादेश किसी ऐसे विषय के संबंध में है जिस तक संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार होता है, क्षमा, प्रवलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, और इस न्यायिक शक्ति के प्रयोग के लिए राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए पूर्णतः बाध्य है तथा इसके विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में कोई न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती। 2. राष्ट्रपति को किसी विधेयक पर वीटो शक्ति का प्रयोग करते समय संविधान संशोधन विधेयकों के मामले में 'संविधान (चौबीसवां संशोधन) अधिनियम, 1971' के पश्चात अपनी अनुमति (Assent) देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य कर दिया गया है, अर्थात् राष्ट्रपति संविधान संशोधन विधेयक पर अपनी अनुमति रोकने या उसे पुनर्विचार के लिए वापस भेजने की शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकता है। 3. पॉकेट वीटो (Pocket Veto) के मामले में, जिसका प्रयोग राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ेल सिंह द्वारा 1986 में 'भारतीय डाकघर (संशोधन) विधेयक' के संदर्भ में किया गया था, संविधान में राष्ट्रपति के लिए कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है कि वह संसद द्वारा पारित विधेयक पर कितने समय के भीतर अपनी अनुमति या अस्वीकृति दे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारत के महान्यायवादी (Attorney General) को संसद के किस सदन में बोलने का अधिकार है? → भारतीय संविधान के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अनुसार राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि किसी समय लोक हित में यह प्रतीत हो कि अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना से राज्यों के बीच विवादों की जाँच करने, उन पर सलाह देने या सामान्य हित के विषयों पर चर्चा करने में सहायता मिलेगी, तो वह ऐसी परिषद् की स्थापना कर सकता है, और यह एक स्थायी संवैधानिक निकाय है। 2. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission, 1983-88) ने अपनी सिफारिश में यह सुझाव दिया था कि अनुच्छेद 263 के तहत एक स्थायी 'अंतर-राज्यीय परिषद्' का गठन किया जाना चाहिए, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा इस परिषद् की स्थापना की गई थी। 3. संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत गठित वित्त आयोग (Finance Commission) एक अर्ध-न्यायिक निकाय है, जो केंद्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण तथा राज्यों को दी जाने वाली सहायता अनुदान (Grants-in-Aid) के सिद्धांतों की सिफारिश करता है, और इसके द्वारा की गई सिफारिशें केंद्र सरकार के लिए प्रकृति में अनिवार्य रूप से बाध्यकारी होती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की विधायी, कार्यकारी और वीटो शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत जब संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित कोई विधेयक राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो राष्ट्रपति के पास यह शक्ति होती है कि वह अपनी 'निलंबकारी वीटो' (Suspensive Veto) शक्ति का प्रयोग करते हुए विधेयक को संसद के पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है, किंतु यदि संसद उस विधेयक को संशोधनों के साथ या बिना संशोधनों के पुनः पारित कर राष्ट्रपति के पास भेज देती है, तो राष्ट्रपति को उस पर अपनी अनुमति देना अनिवार्य होता है, सिवाय उस स्थिति के जब वह धन विधेयक (Money Bill) हो। 2. राष्ट्रपति को संविधान के अनुच्छेद 123 के अंतर्गत अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति संसद के दोनों सदनों के सत्र में न होने पर ही प्रयोग की जा सकती है, तथा राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया अध्यादेश संसद की पुनर्बैठक के छह सप्ताह के भीतर अनुमोदित न होने पर स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, भले ही इस अध्यादेश की अधिकतम अवधि छह महीने से कम क्यों न हो। 3. राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियों (Pardoning Power) के अंतर्गत अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को सैन्य न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के मामलों में भी क्षमा, प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, और मृत्युदंड के मामलों में केवल राष्ट्रपति के पास ही पूर्ण क्षमादान (Pardon) की शक्ति होती है, राज्यपाल के पास नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत राजभाषा के उपबंधों, अनुसूचियों और राजनीतिक दलों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा का उपबंध किया गया है, जिसके तहत संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी घोषित की गई है, तथा यह भी प्रावधान है कि संविधान लागू होने के 15 वर्षों की अवधि (अर्थात 1965 तक) के बाद भी सरकारी कार्यों के लिए अंग्रेजी भाषा के निरंतर प्रयोग को प्राधिकृत करने की शक्ति संसद को दी गई है। 2. संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, दलबदल के आधार पर संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों की निर्हता से संबंधित उपबंध करती है, और इसके तहत किसी राजनीतिक दल के 'विलय' (Merger) के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि उस दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3rd) सदस्य विलय के पक्ष में हों। 3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत निर्वाचन आयोग में पंजीकृत प्रत्येक राजनीतिक दल को आम चुनावों के दौरान स्टार प्रचारकों की नियुक्ति करने का अधिकार स्वतः प्राप्त हो जाता है, और यदि कोई दल अपनी मान्यता खो देता है, तो निर्वाचन आयोग को स्वतः उस दल का पंजीकरण रद्द करने की पूर्ण वैधानिक शक्ति प्राप्त है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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