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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण अधिगम प्रक्रिया और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के दिशा-निर्देशों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. NCF 2005 के अनुसार प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन को एक पृथक विषय के रूप में पढ़ाने के बजाय 'परिवार और मित्र', 'आश्रय', 'जल', 'भोजन', 'यात्रा' और 'हम चीजें कैसे बनाते हैं' जैसी छह अंतर्संबंधित थीमों (Themes) के अंतर्गत एकीकृत रूप में पढ़ाया जाना चाहिए।
- 2. पर्यावरण अध्ययन के शिक्षण में 'रचनात्मक मूल्यांकन' (Formative Assessment) के अंतर्गत बच्चों के पोर्टफोलियो, सहपाठियों के आकलन, अवधारणा मानचित्रण (Concept Mapping) और गुणात्मक टिप्पणियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि केवल योगात्मक परीक्षाओं को।
- 3. पर्यावरण अध्ययन की पाठ्यपुस्तकों में स्थानीय ज्ञान, पारंपरिक तकनीकों और स्वदेशी समुदायों के अनुभवों को स्थान देना आवश्यक है ताकि बच्चे अपने परिवेश से जुड़कर 'करके सीखने' (Learning by Doing) के सिद्धांत को आत्मसात कर सकें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के अनुसार प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन (EVS) को विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की अलग-अलग सीमाओं में न बांधकर एक एकीकृत (Integrated) विषय के रूप में प्रस्तुत किया गया है। कथन 1 बिल्कुल सही है क्योंकि EVS पाठ्यक्रम को छह मुख्य थीमों में विभाजित किया गया है। कथन 2 भी सही है क्योंकि EVS में मूल्यांकन का उद्देश्य रटने की क्षमता की जांच करना नहीं बल्कि बच्चों के गुणात्मक विकास, पोर्टफोलियो और अवधारणा मानचित्रण जैसे उपकरणों के माध्यम से उनके सीखने की प्रक्रिया में सुधार करना है। कथन 3 भी सत्य है, क्योंकि NCF 2005 और बाल-केंद्रित शिक्षा स्थानीय ज्ञान, स्वदेशी परंपराओं और 'करके सीखने' को सर्वोपरि मानती है।
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उत्तर प्रदेश की मृदा एवं कृषि प्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्यवर्ती मैदानी क्षेत्रों में पाई जाने वाली प्राचीन जलोढ़ मृदा को 'भांगर' (Bhangar) कहा जाता है, जो बाढ़ की पहुँच से दूर होती है और जिसमें कैल्सियम कार्बोनेट के कंकड़ पाए जाते हैं।
2. बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' (Mar) और 'काबर' (Kabar) मृदाएँ चिकनी और भारी काली मिट्टी के समान होती हैं, जो सूखने पर अत्यंत कठोर हो जाती हैं और जिनमें नमी बनाए रखने की अद्भुत क्षमता होती है।
3. राज्य के पर्वतीय एवं पठारी ढलानों पर पाई जाने वाली 'राँड़' (Randh) मृदा अत्यधिक उपजाऊ और नाइट्रोजनयुक्त होती है, जिसके कारण इसमें बिना किसी रासायनिक उर्वरक के धान की सर्वाधिक उपज प्राप्त होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के वन्यजीव विहारों (Wildlife Sanctuaries) और उनकी स्थापना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हस्तिनापुर वन्यजीव विहार उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा वन्यजीव विहार है, जो मेरठ, मुजफ्फरपुर, गाजियाबाद, बिजनौर और अमरोहा जिलों तक फैला हुआ है।
2. चंद्रप्रभा वन्यजीव विहार उत्तर प्रदेश का सबसे पुराना वन्यजीव विहार है, जिसकी स्थापना वर्ष 1957 में चंदौली जिले में की गई थी।
3. कछुआ वन्यजीव विहार उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में गंगा नदी के संरक्षण के लिए स्थापित किया गया एकमात्र विशेष वन्यजीव विहार है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि परीक्षण और मापन' के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक आर्थर जेनसेन (Arthur Jensen) द्वारा मानसिक योग्यताओं के पदानुक्रमित वर्गीकरण (Hierarchical Theory of Intelligence) के अंतर्गत बौद्धिक कार्यों को मुख्य रूप से दो स्तरों—'लेवल-I (Level-I Learning)' और 'लेवल-II (Level-II Learning)'—में विभाजित किया गया है। इनमें से 'लेवल-I' की क्षमता का संबंध निम्नलिखित में से किससे है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) की अवधारणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य सामान्य विद्यालयों में सभी बालकों को, चाहे उनकी शारीरिक, मानसिक, सामाजिक या आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, बिना किसी भेदभाव के समान शिक्षण अधिगम अवसर प्रदान करना है।
2. यह प्रणाली विशेष बालकों (दिव्यांगों) के लिए केवल पृथक् (Segregated) विशेष विद्यालयों की स्थापना पर जोर देती है ताकि उनका विशेष शिक्षकों द्वारा अलग से विकास किया जा सके।
3. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-2005) और निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act - 2009) दोनों ही देश में समावेशी शिक्षा प्रणाली के सशक्त क्रियान्वयन की वकालत करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के अंतर्गत 'पर्यावरणीय प्रदूषण' (Environmental Pollution) और इसके नियंत्रण से संबंधित विभिन्न अधिनियमों व प्रोटोकॉल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यापक कानून के रूप में 'पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम' (Environment Protection Act) वर्ष 1986 में पारित किया गया था, जिसे 'छाता विधान' (Umbrella Legislation) भी कहा जाता है क्योंकि यह स्टॉकहोम सम्मेलन (1972) के निर्णयों को लागू करने के लिए बनाया गया था और इसके अंतर्गत केंद्र सरकार को देश भर में पर्यावरणीय गुणवत्ता की सुरक्षा व सुधार के लिए व्यापक शक्तियाँ प्राप्त हैं।
2. 'वन्यजीव संरक्षण अधिनियम' (Wildlife Protection Act) भारत में वर्ष 1972 में लागू किया गया था, जिसके अंतर्गत विभिन्न अनुसूचियों के माध्यम से दुर्लभ और संकटग्रस्त वन्यजीवों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाती है, तथा इसी अधिनियम के तहत वर्ष 1973 में देश में 'प्रोजेक्ट टाइगर' की शुरुआत की गई थी।
3. वायुमंडल में ओजोन परत के क्षरण को रोकने और ओजोन-क्षयकारी पदार्थों (ODSs) के उत्पादन व उपभोग को नियंत्रित करने के लिए वर्ष 1985 की 'विएना कन्वेंशन' और वर्ष 1987 के 'मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल' को अपनाया गया था, जिसमें मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल आधिकारिक रूप से 1 जनवरी 1989 से प्रभावी हुआ था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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