त्वरित लिंक्स
UPTET
14 views
उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना, भूवैज्ञानिक विशेषताओं और कृषि-पारिस्थितिकी (Agro-Ecological) क्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उत्तर प्रदेश के दक्षिणी पठारी क्षेत्र (बुंदेलखंड क्षेत्र) में पाई जाने वाली 'मार' और 'काबर' मृदाएँ क्रमशः काली और चिकनी होती हैं, जिनमें अत्यधिक नमी धारण करने की क्षमता होती है, लेकिन ये सिंचाई के अभाव में अत्यधिक ठोस और दरारयुक्त हो जाती हैं।
- 2. राज्य के पश्चिमी मैदानी और तराई क्षेत्रों में भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन और नहरों के रिसाव के कारण क्षारयुक्त और रेतीली मृदा का विस्तार हुआ है, जिसे स्थानीय रूप से 'भूड़' (Bhoor) या 'रेह' (Reh) कहा जाता है, जो कृषि के लिए अत्यधिक उपजाऊ मानी जाती है।
- 3. उत्तर प्रदेश की नवीन जलोढ़ मृदा को 'खादर' कहा जाता है, जो प्रतिवर्ष बाढ़ के पानी द्वारा लाई जाती है और इसमें पोटाश तथा चूने की प्रचुरता होती है, जबकि पुरानी जलोढ़ मृदा को 'बांगर' कहा जाता है जो बाढ़ के मैदानों से दूर ऊँचे स्थानों पर पाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' (चिकनी काली मृदा) और 'काबर' (हल्के भूरे रंग की चिकनी मृदा) में जल धारण करने की अद्भुत क्षमता होती है, और सूखने पर इनमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं।
कथन 2 गलत है: 'भूड़' (Bhoor) और 'रेह' (Reh) दोनों अलग हैं। 'रेह' या 'कल्लर' एक क्षारीय (Alkaline/Saline) मृदा है जो कृषि के लिए अनुपयुक्त या कम उपजाऊ होती है, जबकि 'भूड़' गंगा-यमुना दोआब के ऊँचे क्षेत्रों में मिलने वाली असंगठित रेतीली मिट्टी है।
कथन 3 सही है: उत्तर प्रदेश की नवीन जलोढ़ मृदा को 'खादर' कहा जाता है जो हर साल बाढ़ से नवीनीकृत होती है, और पुरानी जलोढ़ को 'बांगर' कहते हैं जो बाढ़ की पहुँच से दूर होती है।
Related Questions
→
उत्तर प्रदेश के ऊर्जा संसाधनों, तापीय तथा जल विद्युत परियोजनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश में तापीय ऊर्जा (Thermal Power) का उत्पादन करने वाली 'ओबरा तापीय परियोजना' सोनभद्र जिले में स्थित है, जिसे सोवियत संघ (USSR) के सहयोग से स्थापित किया गया था।
2. उत्तर प्रदेश की सबसे पुरानी नहर प्रणाली 'पूर्वी यमुना नहर' है, जबकि राज्य में जल विद्युत उत्पादन के लिए ऊपरी गंगा नहर पर सबसे पहले 'बहादराबाद जल विद्युत गृह' स्थापित किया गया था।
3. 'परीक्षा तापीय विद्युत परियोजना' झाँसी जिले में बेतवा नदी के तट पर स्थित है, जो बुंदेलखंड क्षेत्र को प्रमुख रूप से विद्युत आपूर्ति प्रदान करती है।
4. उत्तर प्रदेश में परमाणु ऊर्जा के उत्पादन के लिए एकमात्र 'नरोरा परमाणु ऊर्जा संयंत्र' बुलंदशहर जिले में गंगा नदी के तट पर स्थित है, जिसकी पहली इकाई ने वर्ष 1991 में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
बच्चों के भाषा विकास और संज्ञानात्मक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के अनुसार भाषा केवल विचारों को व्यक्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संज्ञानात्मक विकास को आकार देने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण सांस्कृतिक उपकरण है।
2. नोम चोमस्की (Noam Chomsky) के 'भाषा अर्जन उपकरण' (Language Acquisition Device - LAD) सिद्धांत के अनुसार, बच्चों में भाषा सीखने की जन्मजात क्षमता होती है और व्याकरण के सार्वभौमिक नियम उनके अंतर्जात होते हैं।
3. जीन पियाजे (Jean Piaget) के अनुसार भाषा का विकास बच्चे के अहंकेंद्रित वाक् (Egocentric Speech) से शुरू होता है और धीरे-धीरे सामाजिक वाक् में परिवर्तित होता है, जो वाइगोत्स्की के इस विचार से पूरी तरह मेल खाता है कि निजी वाक् (Private Speech) पूरी तरह से सामाजिक अंतःक्रिया का परिणाम है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
वाइगोत्스키 के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत में 'मोर नॉलेजेबल अदर' (MKO) से क्या तात्पर्य है?
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अभिप्रेरणा' (Motivation) के संदर्भ में, अमेरिकी मनोवैज्ञानिक अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) द्वारा प्रतिपादित 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) के अंतर्गत, सर्वोच्च स्तर पर पाई जाने वाली आवश्यकता यानी 'आत्म-सिद्धि' (Self-Actualization) की प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ने से पहले, किसी व्यक्ति को पदानुक्रम के चौथे स्तर पर मौजूद किस मनोवैज्ञानिक आवश्यकता को संतुष्ट करना अनिवार्य होता है?
→
उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना, कृषि जलवायु प्रदेशों और उनकी विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को योजना आयोग द्वारा कुल 9 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जबकि कृषि विभाग के वर्गीकरण के अनुसार राज्य में कुल 20 कृषि-जलवायु क्षेत्र पाए जाते हैं।
2. बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली 'राँकर' (Rankar) मृदा ढलान वाले क्षेत्रों में पाई जाने वाली एक अनूठा प्रकार की पतली और कंकरीली मिट्टी है, जिसमें उपजाऊ तत्वों की कमी होती है और यह अत्यधिक अपरदन से ग्रसित रहती है।
3. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में पाई जाने वाली 'ऊसर' और 'कल्लर' मिट्टी में सोडियम लवणों (विशेषकर सोडियम कार्बोनेट और बाइकार्बोनेट) की अधिकता के कारण यह कृषि के लिए अनुपयुक्त होती है, जिसके सुधार के लिए जिप्सम का प्रयोग किया जाता है।
4. गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में पाई जाने वाली 'नवीन जलोढ़' मृदा को 'खादर' कहा जाता है, जिसमें पोटाश और चूने की प्रचुरता होती है, किंतु नाइट्रोजन और ह्यूमस की मात्रा अपेक्षाकृत कम पाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.