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UPTET
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बाल विकास के विभिन्न सिद्धांतों और विकासात्मक आयामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. विकास की प्रक्रिया सिर से पैर की दिशा (मस्तकोधोमुख विकास - Cephalocaudal Trend) और शरीर के केंद्र से परिधि की ओर (समीपदूराभिमुख विकास - Proximodistal Trend) दोनों नियमों का एक साथ अनुसरण करती है।
  2. 2. एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, बाल्यावस्था (School Age) के दौरान 'उद्योग बनाम हीनता' (Industry vs. Inferiority) का संकट उत्पन्न होता है, जहाँ बालक अपनी योग्यताओं का प्रदर्शन करके समाज में निपुणता हासिल करना चाहता है।
  3. 3. जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत की 'पूर्व संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage) में बालक 'संरक्षण' (Conservation) और 'सकर्मक अनुमान' (Transitive Inference) के गुणों को पूरी तरह से आत्मसात कर लेता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि बाल विकास हमेशा मस्तकोधोमुख (सिर से पैर) और समीपदूराभिमुख (केंद्र से बाहर) दिशाओं में ही अग्रसर होता है। कथन 2 सही है क्योंकि एरिक एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास सिद्धांत के अनुसार 6 से 12 वर्ष की अवस्था (स्कूल जाने की आयु) में 'उद्योग बनाम हीनता' (Industry vs. Inferiority) का चरण आता है, जिसमें बालक स्कूल और सामाजिक परिवेश में अपनी क्षमताओं को साबित करने का प्रयास करता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि 'संरक्षण' (Conservation) और 'सकर्मक अनुमान' की क्षमता का विकास पियाजे की 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage, 7-11 वर्ष) में होता है, न कि पूर्व संक्रियात्मक अवस्था (2-7 वर्ष) में। अतः केवल 1 और 2 सही हैं।
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