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उत्तर प्रदेश के कला, संस्कृति, मेलों और लोकनृत्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और सोनभद्र क्षेत्रों में किया जाने वाला 'ढरकाहरी' और 'कर्मा' लोकनृत्य मुख्य रूप से आदिवासी जातियों (जैसे खरवार, गोड़) द्वारा प्रकृति की पूजा और अच्छी फसल की कामना के लिए किए जाते हैं।
- 2. 'बटेश्वर मेला' आगरा जिले में ऊँटों के क्रय-विक्रय के लिए प्रसिद्ध एक प्रसिद्ध पशु मेला है, जो यमुना नदी के तट पर कार्तिक मास में आयोजित किया जाता है।
- 3. उत्तर प्रदेश में 'कथक' शास्त्रीय नृत्य का घराना लखनऊ और वाराणसी को माना जाता है, तथा इस नृत्य शैली के विकास में नवाब वाजिद अली शाह का योगदान नगण्य था क्योंकि उन्होंने कला और संगीत पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: उत्तर प्रदेश के दक्षिण क्षेत्र (मिर्जापुर, सोनभद्र आदि) में कर्मा, ढरकाहरी, और सैरा जैसे लोकनृत्य आदिवासी समुदायों (जैसे खरवार, बैगा, गोड़) द्वारा प्रकृति और कृषि उत्सवों के रूप में किए जाते हैं। कथन 2 सही है: आगरा का बटेश्वर मेला एक ऐतिहासिक पशु मेला है जहाँ ऊँटों और अन्य पशुओं का क्रय-विक्रय किया जाता है और यह यमुना तट पर आयोजित होता है। कथन 3 गलत है: कथक के लखनऊ और वाराणसी घराने प्रसिद्ध हैं, परंतु अवध के नवाब वाजिद अली शाह का कथक और संगीत के विकास में बहुत बड़ा योगदान था, उन्होंने इसे अत्यधिक संरक्षण प्रदान किया था।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांतों' के संदर्भ में, लेव वायगोत्स्की (Lev Vygotsky) द्वारा प्रतिपादित 'सामाजिक-सांस्कृतिक विकास का सिद्धांत' (Socio-Cultural Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) और 'चान्त्वन/मचान' (Scaffolding) की अवधारणाओं के वैज्ञानिक स्वरूप, तथा जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) द्वारा प्रतिपादित 'अधिगम के स्वरूप'—जिसमें उन्होंने 'क्रियात्मक प्रतिनिधित्व' (Enactive Representation), 'प्रतिबिम्बात्मक प्रतिनिधित्व' (Iconic Representation), और 'प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व' (Symbolic Representation) को समझाया है—के पारस्परिक अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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2. 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्यवाद' (1973) के ऐतिहासिक निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते इसके 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) को कोई क्षति न पहुँचाई जाए।
3. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार संशोधन किया गया है, जिसके माध्यम से इसमें 'समाजवादी' (Socialist), 'पंथनिरपेक्ष' (Secular) और 'अखंडता' (Integrity) शब्दों को जोड़ा गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, जब एक बच्चा यह समझने लगता है कि किसी वस्तु का आकार या रूप बदलने पर भी उसकी मात्रा या द्रव्यमान (जैसे पानी की मात्रा या मिट्टी का गोला) अपरिवर्तित रहता है, तो पियाजे के इस संज्ञानात्मक कौशल को क्या कहा जाता है और यह किस अवस्था की मुख्य विशेषता है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अभिप्रेरणा और अधिगम के सिद्धांतों' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) द्वारा प्रतिपादित 'आवश्यकताओं का पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'लिम्बिक सिस्टम' (विशेष रूप से अमिगडाला और न्यूक्लियस एक्यूम्बेंस) और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex) के बीच होमियोस्टैटिक नियमन, डोपामाइनर्जिक रिवार्ड पाथवे (Dopaminergic Reward Pathway) और उच्च-स्तरीय आत्म-सिद्धि की सक्रियण गतिकी, तथा एडवर्ड डेसी (Edward Deci) और रिचर्ड रायन (Richard Ryan) द्वारा प्रतिपादित 'आत्म-निर्णय सिद्धांत' (Self-Determination Theory: स्वायत्तता, सक्षमता और संबद्धता) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, आंतरिक अभिप्रेरणा-आधारित रचनावादी शिक्षाशास्त्र (Intrinsic Motivation-based Constructivist Pedagogy) और विद्यार्थियों में भावनात्मक सुरक्षा, संज्ञानात्मक सहभागिता व समग्र अधिगम दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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