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भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'संसदीय विशेषाधिकारों' (Parliamentary Privileges) एवं अनुच्छेद 105 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 105 के अनुसार, संसद के दोनों सदनों तथा उनके सदस्यों और समितियों को वे सभी विशेषाधिकार प्राप्त हैं जो ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के पास वर्ष 1950 में संविधान लागू होने के समय थे, क्योंकि भारतीय संविधान निर्माताओं ने ब्रिटिश परंपरा को बिना किसी परिवर्तन के पूर्ण रूप से अंगीकृत कर लिया था।
- 2. यदि संसद का कोई सदस्य सदन के भीतर अपने भाषण या मतदान के संबंध में न्यायालय में किसी कानूनी कार्रवाई का सामना करता है, तो उसे अनुच्छेद 105 के तहत पूर्ण उन्मुक्ति (Immunity) प्राप्त होती है, और यह संरक्षण संसद के सत्र के बाहर या सदन की बैठकों के अतिरिक्त अन्य गतिविधियों पर भी समान रूप से लागू होता है।
- 3. जब तक संसद विधि द्वारा अपने विशेषाधिकारों, immunities और शक्तियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं करती, तब तक इसके सदस्यों और समितियों को वे सभी विशेषाधिकार प्राप्त बने रहेंगे जो ब्रिटिश संसद के 'हाउस ऑफ कॉमन्स' के पास संविधान के प्रारंभ के समय थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: यद्यपि मूल संविधान के अनुच्छेद 105(3) में ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के विशेषाधिकारों का संदर्भ दिया गया था, किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा इस व्यवस्था को बदल दिया गया। इसके तहत अब यह प्रावधान किया गया है कि संसद के विशेषाधिकार वही होंगे जो 44वें संशोधन के लागू होने के समय थे (न कि संविधान लागू होने के समय)। इसके अलावा, भारतीय संसद ने अभी तक विशेषाधिकारों को संहिताबद्ध (Codify) नहीं किया है, लेकिन ब्रिटिश परंपरा को बिना परिवर्तन के ज्यों का त्यों स्वीकार नहीं किया गया है। कथन 2 गलत है: संसद सदस्यों को मिलने वाली उन्मुक्ति केवल सदन के भीतर कही गई बातों या दिए गए वोटों तक सीमित है (अनुच्छेद 105 का खंड 1 और 2)। यह संरक्षण सदन के बाहर, प्रेस कॉन्फ्रेंस में, या अन्य सार्वजनिक मंचों पर दिए गए बयानों पर लागू नहीं होता है। कथन 3 सही है: 44वें संविधान संशोधन, 1978 से पहले और उसके पश्चात भी जब तक संसद विशेषाधिकारों को विधिवत अधिनियमित (Codify) नहीं करती, तब तक ब्रिटिश 'हाउस ऑफ कॉमन्स' के विशेषाधिकारों का मानक (Standard) लागू रहता है।
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय लवणीयता' (Ocean Salinity) के वितरण तथा इसे प्रभावित करने वाले कारकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरों की सतह पर लवणीयता का मुख्य निर्धारण वाष्पीकरण (Evaporation) और वर्षण (Precipitation) के शुद्ध अंतर द्वारा होता है, यही कारण है कि भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में उच्च तापमान और भारी वाष्पीकरण के बावजूद वार्षिक भारी वर्षा के कारण कर्क और मकर रेखाओं की तुलना में सतह की लवणीयता कम पाई जाती है।
2. उच्च अक्षांशों (High Latitudes) में महासागरीय लवणीयता मुख्य रूप से समुद्र के जल के जमने (Freezing) और बर्फ के पिघलने (Melting of ice) की प्रक्रियाओं से अत्यधिक प्रभावित होती है, जहाँ सर्दियों में समुद्री बर्फ के निर्माण के कारण शेष जल में लवण की मात्रा बढ़ जाती है और लवणीयता उच्च हो जाती है।
3. अंतर्देशीय समुद्रों और झीलों (जैसे मृत सागर या वान झील) में यदि जल का बहिर्वाह (Outflow) पूरी तरह से अनुपस्थित हो और वाष्पीकरण की दर अत्यधिक उच्च हो, तो उनमें लवणीयता का स्तर सामान्य महासागरों की तुलना में कई गुना अधिक हो जाता है, जिससे वे अति-लवणीय (Hypersaline) प्रकृति के हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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लैटेराइट मिट्टी का निर्माण मुख्य रूप से किस प्रक्रिया से होता है?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) और इसके विधिक ढांचे तथा शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना वर्ष 2010 में 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रभावी और त्वरित प्रवर्तन के लिए की गई थी।
2. यह अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निहित सख्त न्यायिक प्रक्रियाओं से बाध्य नहीं है, बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है।
3. NGT को संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त 'स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार' को लागू करने का विशेष अधिकार प्राप्त है, और इसके आदेशों या निर्णयों के विरुद्ध केवल सीधे उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की जा सकती है, जबकि उच्च न्यायालयों के क्षेत्राधिकार से इसे पूरी तरह से बाहर रखा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकार' (National Biodiversity Authority - NBA) और 'जैव विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकार (NBA) एक सांविधिक (Statutory) और स्वायत्त निकाय है, जिसकी स्थापना जैव विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत भारत के जैविक संसाधनों के संरक्षण, उनके सतत उपयोग और जैव विविधता से प्राप्त लाभों के न्यायसंगत बँटवारे को विनियमित करने के लिए चेन्नई, तमिलनाडु में की गई है।
2. जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत किसी भी भारतीय नागरिक या भारत में पंजीकृत कंपनी को जैव विविधता से जुड़े किसी भी अध्ययन, अनुसंधान या व्यावसायिक उपयोग के लिए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकार (NBA) से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है, भले ही वे जैविक संसाधनों का उपयोग पारंपरिक रूप से स्थानीय समुदायों के सहयोग के बिना कर रहे हों।
3. राज्य स्तर पर जैव विविधता के संरक्षण और प्रबंधन के लिए 'राज्य जैव विविधता बोर्ड' (State Biodiversity Boards - SBBs) का गठन किया जाता है, तथा स्थानीय स्तर पर जैविक संसाधनों के संरक्षण के लिए पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों के स्तर पर 'जैव विविधता प्रबंधन समितियों' (Biodiversity Management Committees - BMCs) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जो स्थानीय स्तर पर 'लोक जैव विविधता रजिस्टरों' (People's Biodiversity Registers - PBR) को तैयार करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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