BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
18 views

भारतीय राजव्यवस्था और संविधान में उल्लिखित 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) और 'संविधान की मूल संरचना के सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत के संविधान में 'न्यायिक समीक्षा' शब्दावली को सीधे तौर पर परिभाषित नहीं किया गया है, किंतु संविधान के अनुच्छेद 13, 32, 136, 142 और 226 जैसे विभिन्न प्रावधान न्यायपालिका को विधायी और कार्यकारी कार्यों की संवैधानिकता का परीक्षण करने की प्रत्यक्ष शक्ति प्रदान करते हैं।
  2. 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में प्रतिपादित 'मूल संरचना का सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) केवल संसद द्वारा किए जाने वाले संविधान संशोधनों पर ही लागू होता है, और इसके दायरे में कार्यपालिका द्वारा जारी किए जाने वाले कार्यकारी आदेशों या अध्यादेशों को शामिल नहीं किया जाता है।
  3. 3. संविधान की नौवीं अनुसूची (Ninth Schedule) में शामिल किए गए किसी भी कानून को न्यायिक समीक्षा के दायरे से पूर्ण और आजीवन उन्मुक्ति प्राप्त है, और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'IR कोल्हो वाद (2007)' में दिए गए निर्णय के बावजूद संसद इस अनुसूची के माध्यम से मौलिक अधिकारों के उल्लंघन करने वाले कानूनों को न्यायिक पुनरावलोकन से बचा सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के मूल पाठ में 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) शब्द का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन अनुच्छेद 13 (मूल अधिकारों से असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाले कानून शून्य होंगे), अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचारों का अधिकार), अनुच्छेद 136 (अपील के लिए विशेष अनुमति), और अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता) जैसे अनुच्छेद अप्रत्यक्ष रूप से न्यायपालिका को न्यायिक समीक्षा की शक्ति प्रदान करते हैं। कथन 2 गलत है: 'मूल संरचना का सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) केवल संविधान संशोधनों तक ही सीमित नहीं है; न्यायपालिका ने समय-समय पर यह स्पष्ट किया है कि कार्यपालिका के प्रशासनिक कार्यों, नीतियों और विधायी अधिनियमों (Ordinary Legislation) की संवैधानिकता की जांच भी न्यायिक समीक्षा और मूल संरचना की कसौटी पर की जा सकती है। कथन 3 गलत है: सर्वोच्च न्यायालय ने 'I.R. Coelh (2007)' के ऐतिहासिक मामले में यह स्पष्ट कर दिया था कि 24 अप्रैल 1973 (केशवानंद भारती निर्णय की तिथि) के बाद नौवीं अनुसूची में जोड़े गए सभी कानूनों की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है यदि वे संविधान के भाग III (मौलिक अधिकारों) और 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का उल्लंघन करते हैं।
Share:

Related Questions

→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' के अंतर्गत 'आपात उपबंध' (Emergency Provisions - अनुच्छेद 352 से 360) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार, राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) की उद्घोषणा राष्ट्रपति द्वारा केवल तभी की जा सकती है जब मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा लिखित रूप में ऐसा निर्णय राष्ट्रपति को संसूचित किया जाए, तथा मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द के स्थान पर 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था, जिसे बाद में 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा बदला गया था। 2. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा करने वाले संसद के प्रत्येक सदन द्वारा संकल्प को उद्घोषणा की तिथि से एक महीने के भीतर विशेष बहुमत (Special Majority) द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक होता है, तथा एक बार अनुमोदित होने के बाद राष्ट्रीय आपातकाल अनिश्चित काल तक जारी रह सकता है, बशर्ते इसे हर छह महीने में संसद के अनुमोदन से आगे बढ़ाया जाए। 3. संविधान के अनुच्छेद 359 के प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन को छोड़कर अन्य सभी मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित करने के लिए आदेश जारी कर सकता है, तथा ऐसे आदेश संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग पर लागू हो सकते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → किस सुल्तान ने भारत में पहली बार सांकेतिक मुद्रा (Token Currency) का प्रयोग किया था? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XII' के अंतर्गत 'वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद' (Finance, Property, Contracts and Suits - Articles 264-300A) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 267 के अनुसार संसद को 'भारत की संचित निधि' (Consolidated Fund of India) की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, जिसमें सरकार को प्राप्त होने वाले सभी राजस्व, उसके द्वारा जुटाए गए ऋण और ऋणों की वसूली से प्राप्त सभी धन जमा किए जाते हैं, तथा इस निधि से बिना संसद की पूर्व स्वीकृति के एक भी रुपया निकाला नहीं जा सकता। 2. अनुच्छेद 267 के अंतर्गत ही 'भारत की आकस्मिकता निधि' (Contingency Fund of India) की स्थापना का प्रावधान है, जिसे राष्ट्रपति के распоря (Discretion) या नियंत्रण में रखा जाता है, और इसका उपयोग किसी अप्रत्याशित या आकस्मिक व्यय को पूरा करने के लिए संसद की पूर्व स्वीकृति के बिना किया जा सकता है, बशर्ते बाद में इसके लिए संसद से विधिवत अनुमोदन प्राप्त कर लिया जाए। 3. अनुच्छेद 282 के तहत संघ या किसी राज्य को यह अधिकार दिया गया है कि वह अपने राजस्व से किसी ऐसे सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अनुदान दे सकता है जो उसके विधायी शक्तियों के दायरे से बाहर हो, और इस प्रावधान का उपयोग अक्सर केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को विशिष्ट विकासात्मक योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता (Grants) प्रदान करने के वास्ते किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'भारत का महान्यायवादी' (Attorney-General for India - अनुच्छेद 76) तथा 'महाधिवक्ता' (Advocate-General - अनुच्छेद 165) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह व्यक्ति महान्यायवादी नियुक्त होने के लिए अर्हित होगा जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्ह है, तथा संविधान ने महान्यायवादी के लिए कोई निश्चित पदावधि (Term of office) निर्धारित नहीं की है। 2. महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है और उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों तथा संसद की किसी भी समिति में, जिसका वह सदस्य नामित किया गया हो, बोलने और भाग लेने का अधिकार है, किंतु उसे मतदान का कोई अधिकार प्राप्त नहीं होता है। 3. राज्य स्तर पर महाधिवक्ता (Advocate-General) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, और महान्यायवादी की तरह ही महाधिवक्ता को भी राज्य के विधानमंडल के दोनों सदनों (जहाँ द्विसदनीय व्यवस्था है) या समितियों की कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का अधिकार है, तथा उसे भी विधानमंडल में मतदान करने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार प्राप्त होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → छठी अनुसूची में किन राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन का उल्लेख है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.