त्वरित लिंक्स
Civil services
17 views
भारतीय पर्यावरण कानून और 'वन अधिकार अधिनियम, 2006' (Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers (Recognition of Forest Rights) Act, 2006) के प्रावधानों तथा उनके कार्यान्वयन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. यह अधिनियम वन क्षेत्रों में पीढ़ियों से निवास करने वाले अनुसूचित जातियों (SCs) और अन्य पारंपरिक वनवासियों (OTFDs) को व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों प्रकार के वन अधिकारों की मान्यता देता है, बशर्ते यह साबित करना अनिवार्य हो कि वे कम से कम पिछले 75 वर्षों से उस विशिष्ट वन भूमि पर निवास कर रहे थे।
- 2. अधिनियम के अंतर्गत 'ग्राम सभा' (Gram Sabha) को वन अधिकार दावों का सत्यापन करने, उन्हें प्रारंभिक स्तर पर संसाधित करने और वन क्षेत्रों के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए एक स्वतंत्र निकाय के रूप में वैधानिक शक्ति प्रदान की गई है।
- 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'वाइल्डलाइफ फर्स्ट बनाम पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (2019)' मामले में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय के तहत, जिन वनवासियों के दावे खारिज कर दिए गए थे, उन्हें वनों से बेदखल करने का आदेश दिया गया था, जिससे इस अधिनियम के अंतर्गत वन अधिकार दावों की पारदर्शी प्रक्रिया और उसकी सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि वन अधिकार अधिनियम, 2006 (FRA) के अनुसार, अन्य पारंपरिक वनवासियों (OTFDs) के लिए यह साबित करना आवश्यक है कि वे 'कम से कम तीन पीढ़ियों' (यानी 75 वर्षों की अवधि, 13 दिसंबर 2005 से ठीक पहले) से वन भूमि पर प्राथमिक रूप से निवास कर रहे थे और अपनी आजीविका के लिए वनों पर निर्भर थे, न कि अनुसूचित जातियों (SCs) के लिए यह शर्त है (यह अधिनियम अनुसूचित जनजातियों और OTFDs पर लागू होता है)। कथन 2 सत्य है क्योंकि अधिनियम की धारा 6 के तहत 'ग्राम सभा' को वन अधिकारों के दावों की जांच करने और उन्हें संस्तुति प्रदान करने की प्राथमिक और अत्यंत महत्वपूर्ण शक्ति दी गई है। कथन 3 सत्य है कि वर्ष 2019 में 'वाइल्डलाइफ फर्स्ट बनाम पर्यावरण एवं वन मंत्रालय' मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने जिनके दावे खारिज हो चुके थे, उन्हें बेदखल करने का आदेश दिया था, जिस पर बाद में न्यायालय द्वारा ही रोक लगाई गई थी।
Related Questions
→
भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, भारत में 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (National Board for Wildlife - NBWL) तथा 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' के विधिक एवं संस्थागत प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (NBWL) वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 5A के तहत स्थापित एक सांविधिक (Statutory) और शीर्ष सलाहकार निकाय है, जिसके अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते हैं, तथा इसके उपाध्यक्ष केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री होते हैं।
2. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनुसार, देश के भीतर किसी भी राष्ट्रीय उद्यान (National Park) या वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary) की सीमाओं में परिवर्तन करने अथवा किसी संरक्षित क्षेत्र के 'कोर या बफर' जोनों में किसी भी प्रकार के वाणिज्यिक या औद्योगिक विकास कार्यों को अनुमति देने के लिए 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति' (Standing Committee of NBWL) की पूर्व अनुशंसा प्राप्त करना अनिवार्य है।
3. वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2022 के माध्यम से मूल अधिनियम में किए गए संशोधनों के तहत NBWL के सदस्यों की कुल संख्या को युक्तिसंगत बनाया गया है, और यह प्रावधान किया गया है कि अब NBWL की स्थायी समिति के निर्णयों या अनुशंसाओं को चुनौती देने के लिए किसी भी नागरिक को पहले 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (NGT) के समक्ष अपील दायर करनी होगी, और NBWL के अध्यक्ष की व्यक्तिगत अनुमति के बिना सीधे सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर नहीं की जा सकती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
निम्नलिखित में से कौन भारतीय संविधान सभा के सदस्य नहीं थे?
→
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किस अधिवेशन में मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय आर्थिक नीति के प्रस्तावों को पारित किया गया था?
→
हीराकुंड बांध किस नदी पर स्थित है?
→
भारतीय कला, संस्कृति और प्राचीन इतिहास के संदर्भ में, बौद्ध धर्म की महायान (Mahayana) और वज्रयान (Vajrayana) शाखाओं के विकास तथा दार्शनिक मान्यताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महायान बौद्ध धर्म में बुद्ध को एक अलौकिक शक्ति और भगवान के रूप में पूजे जाने की परंपरा शुरू हुई, तथा इसमें 'बोधिसत्व' की अवधारणा का उदय हुआ, जिसमें वे व्यक्ति जो स्वयं निर्वाण प्राप्त करने के योग्य हैं, अन्य जीवों के उद्धार के लिए अपनी मुक्ति को स्थगित कर देते हैं।
2. वज्रयान शाखा, जो मुख्य रूप से गुप्त काल के उत्तरार्ध और पाल काल के दौरान पूर्वी भारत (विशेषकर बंगाल और बिहार) में विकसित हुई, ने तांत्रिक अनुष्ठानों, मंत्रों, मुद्राओं और मंडल (Mandala) के प्रयोग को मुक्ति प्राप्ति के प्राथमिक साधन के रूप में मान्यता दी।
3. बौद्ध धर्म की शून्यवाद (Madhyamaka) विचारधारा के संस्थापक नागार्जुन थे, जिन्होंने यह प्रतिपादित किया कि समस्त वस्तुएं और धर्म 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (Dependent Origination) के कारण स्वभावतः शून्य (स्वयं के स्वतंत्र अस्तित्व से रहित) हैं, और इस दार्शनिक दृष्टिकोण को महायान बौद्ध मत का वैचारिक आधार माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.