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भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency - Article 352) तथा इसके प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के संबंध में युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह (Armed Rebellion) के आधार पर की जा सकती है, और मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द का ही प्रयोग किया गया था जिसे बाद में 44वें संविधान संशोधन (1978) के माध्यम से बदला गया था।
- 2. जब राष्ट्रीय आपातकाल प्रवर्तन में होता है, तब अनुच्छेद 358 के तहत अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, और इसके लिए किसी अलग आदेश की आवश्यकता नहीं होती है, किंतु यह निलंबन केवल तभी प्रभावी होता है जब आपातकाल युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर घोषित किया गया हो, न कि सशस्त्र विद्रोह के आधार पर।
- 3. राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 359 के अंतर्गत एक पृथक आदेश जारी करके भाग III द्वारा प्रदत्त अन्य मूल अधिकारों (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) के प्रवर्तन को न्यायालयों में प्रवर्तित कराने के अधिकार को निलंबित किया जा सकता है, और यह आदेश संपूर्ण देश या उसके किसी विशिष्ट क्षेत्र तक सीमित हो सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द नहीं था, बल्कि इसके स्थान पर 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था। 'आंतरिक अशांति' शब्द को वर्ष 1978 के 44वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा हटाकर उसकी जगह 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द को जोड़ा गया था। कथन 2 सत्य है; अनुच्छेद 358 के तहत युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में अनुच्छेद 19 के अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, सशस्त्र विद्रोह के मामले में नहीं। कथन 3 सत्य है; अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह आदेश द्वारा अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर अन्य मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित कर सके।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 355' तथा 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत केंद्र की बाध्यताओं और राष्ट्रपति शासन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 355 केंद्र सरकार पर यह संवैधानिक कर्तव्य आरोपित करता है कि वह बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की रक्षा करे तथा यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार ही चलाई जा रही है।
2. 'एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994)' मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 355 के अंतर्गत आंतरिक अशांति या संवैधानिक तंत्र की विफलता के आधार पर किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की शक्ति का प्रयोग करने से पूर्व केंद्र सरकार के लिए यह अनिवार्य है कि वह राज्य सरकार को पहले एक औपचारिक चेतावनी जारी करे और उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दे, सिवाय उन अत्यधिक असाधारण मामलों के जहाँ तत्काल कार्रवाई आवश्यक हो।
3. अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा के पश्चात संसद के दोनों सदनों द्वारा इसका अनुमोदन दो महीने के भीतर साधारण बहुमत के बजाय केवल विशेष बहुमत (अर्थात उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत) से ही किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत में विटामिन सी का सबसे समृद्ध प्राकृतिक स्रोत किसे माना जाता है?
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भारतीय इतिहास और कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व शब्दावली के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सल्तनत काल में 'दीवान-ए-मुस्तखराज' (Diwan-i-Mustakhraj) नामक विभाग की स्थापना अलाउद्दीन खिलजी द्वारा की गई थी, जिसका प्रमुख कार्य लगान बकायेदारों की जाँच करना और राजस्व की वसूली में हुई हेराफेरी को रोकना था।
2. 'इक्ता प्रणाली' (Iqta System) के अंतर्गत सल्तनत के सुल्तानों द्वारा सैन्य अधिकारियों और अमीरों को वेतन के बदले भूमि के टुकड़े (इक्ता) प्रशासनिक नियंत्रण के लिए दिए जाते थे, तथा इल्तुतमिश के शासनकाल में ये इक्ता आनुवंशिक (Hereditary) बन गए थे और इनका हस्तांतरण पूर्णतः प्रतिबंधित था।
3. सल्तनत कालीन राजस्व व्यवस्था में 'खराज' (Kharaj) गैर-मुसलमानों पर लगाया जाने वाला भूमि कर था जो उनकी कुल उपज का एक-तिहाई से आधा हिस्सा होता था, जबकि 'जकात' (Zakat) मुसलमानों से उनकी संपत्ति पर लिया जाने वाला एक धार्मिक कर था जो केवल धार्मिक कार्यों और दान के लिए उपयोग किया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूकंपीय तरंगों' (Seismic Waves) और पृथ्वी के आंतरिक भाग की संरचना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूकंप के दौरान उत्पन्न होने वाली 'प्राथमिक तरंगें' (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं, जो ध्वनि तरंगों के समान होती हैं और ठोस, तरल तथा गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, हालांकि तरल माध्यम में प्रवेश करने पर इनकी गति कम हो जाती है।
2. 'द्वितीयक तरंगें' (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं, जिनकी प्रकृति प्रकाश तरंगों जैसी होती है, तथा ये केवल ठोस माध्यम से ही गुजर सकती हैं और तरल या गैसीय माध्यम में प्रवेश करते ही लुप्त हो जाती हैं, जिसका उपयोग वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के बाहरी क्रोड़ (Outer Core) के तरल होने का पता लगाने के लिए किया है।
3. धरातल पर सबसे अंत में पहुँचने वाली 'सतह तरंगें' (Surface Waves या L-waves) सबसे कम विनाशकारी होती हैं, क्योंकि इनकी आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य बहुत अधिक होती है, जिसके कारण ये केवल पृथ्वी के क्रस्ट (Crust) तक ही सीमित रहती हैं और आंतरिक भागों को प्रभावित नहीं करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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