त्वरित लिंक्स
Civil services
1 views
भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'सहकारी संघवाद' (Cooperative Federalism) तथा वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद से संबंधित 'संविधान (एक सौ एकवाँ संशोधन) अधिनियम, 2016' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत स्थापित वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं और इसमें सभी राज्यों के वित्त मंत्री इसके सदस्य के रूप में शामिल होते हैं।
- 2. GST परिषद के निर्णय लेते समय केंद्र सरकार के पास कुल डाले गए मतों का एक-तिहाई (1/3rd) भार होता है, जबकि सभी राज्यों की सरकारों के पास संयुक्त रूप से कुल डाले गए मतों का दो-तिहाई (2/3rd) भार होता है, और किसी भी निर्णय को पारित होने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम तीन-चौथाई (3/4th) बहुमत की आवश्यकता होती है।
- 3. 'मोहम्मद हलीम बनाम भारत संघ' या कर संरचना से जुड़े अन्य न्यायिक मामलों में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि GST परिषद की सिफारिशें केवल एक सलाहकार प्रकृति की होती हैं और संघ तथा राज्यों की विधानसभाओं पर किसी भी परिस्थिति में बाध्यकारी नहीं होती हैं, क्योंकि यह भारतीय संविधान के संघीय संतुलन और विधायी संप्रभुता का उल्लंघन करेंगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद कोई सामान्य 'सांविधिक निकाय' (Statutory Body) नहीं है, बल्कि इसकी स्थापना सीधे संविधान के अनुच्छेद 279A के अंतर्गत राष्ट्रपति के आदेश द्वारा एक 'संवैधानिक निकाय' (Constitutional Body) के रूप में की गई है। कथन 2 बिल्कुल सही है; संविधान के अनुच्छेद 279A(9) के अनुसार, निर्णय लेते समय केंद्रीय मत का भार कुल डाले गए मतों का एक-तिहाई (33.33%) होता है और राज्यों के मतों का भार संयुक्त रूप से दो-तिहाई (66.67%) होता है, तथा कोई भी निर्णय उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम तीन-चौथाई (75%) बहुमत से ही लिया जाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने 'संघ मामला (2022)' में यह निर्णय दिया था कि GST परिषद की सिफारिशें सहकारी संघवाद के तहत एक अनूठा उदाहरण हैं, और हालांकि संसद तथा राज्य विधानसभाओं को कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, किंतु परिषद की सिफारिशों का भारतीय कर व्यवस्था में एक अत्यधिक persuasive (प्रेरक) और नीतिगत प्रभाव होता है, और इसे पूरी तरह से 'गैर-बाध्यकारी' या केवल 'सलाहकार' कहना कानून की गलत व्याख्या है।
Related Questions
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XX' (संविधान का संशोधन - अनुच्छेद 368) तथा संवैधानिक संशोधन प्रक्रिया के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान संशोधन का विधेयक संसद के किसी भी सदन में (लोकसभा या राज्यसभा) पुरःस्थापित किया जा सकता है, किंतु इसे प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Prior Recommendation) लेना अनिवार्य है।
2. यदि संविधान संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग विशेष बहुमत से पारित कर दिया जाता है, और दोनों सदनों के बीच संशोधन के प्रावधानों को लेकर कोई गतिरोध उत्पन्न हो जाता है, तो संविधान के अनुच्छेद 108 के प्रावधानों के तहत संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाकर इस गतिरोध को दूर किया जा सकता है।
3. संविधान के कुछ विशिष्ट प्रावधानों (जैसे राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया या संघ और राज्यों की कार्यपालिका शक्तियों का विस्तार) में संशोधन के लिए न केवल संसद के दोनों सदनों के विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है, बल्कि कम-से-कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा साधारण बहुमत से उसका अनुसमर्थन (Ratification) किया जाना भी अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' (Biological Diversity Act, 2002) और उससे जुड़े संस्थागत तंत्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 रियो डी जेनेरियो में आयोजित 'जैविक विविधता पर कन्वेंशन' (CBD) के प्रति भारत की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए अधिनियमित किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य जैविक संसाधनों का संरक्षण, उनके घटकों का सतत उपयोग और जैविक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न होने वाले लाभों का न्यायसंगत और निष्पक्ष बंटवारा करना है।
2. इस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय स्तर पर 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA) की स्थापना की जाती है, जो कि एक सांविधिक निकाय है, तथा यह प्राधिकरण विदेशी नागरिकों, निगमों या अनिवासी भारतीयों (NRIs) द्वारा किसी भी जैविक संसाधन को प्राप्त करने या जैव-सर्वेक्षण करने के लिए पूर्व अनुमति देना अनिवार्य बनाता है।
3. इस त्रि-स्तरीय प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत राज्य स्तर पर 'राज्य जैव विविधता बोर्ड' (SBB) और स्थानीय स्तर पर गठित 'जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ' (BMCs) आती हैं, जिनमें 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' को देश के सभी क्षेत्रों में जैव विविधता विरासत स्थल (Biodiversity Heritage Sites) घोषित करने की अनन्य और अंतिम शक्ति प्राप्त होती है, जिसमें राज्य सरकारों की सहमति की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 368' के अंतर्गत संविधान संशोधन की प्रक्रिया तथा इससे संबंधित 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) के दायरे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी उपबंध को जोड़ने, संशोधित करने या निरूपित करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु इस अनुच्छेद के अंतर्गत संशोधन विधेयक को संसद के किसी भी सदन में केवल 'विशेष बहुमत' (उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत) द्वारा ही नहीं, बल्कि प्रत्येक सदन में कुल सदस्य संख्या के पूर्ण बहुमत द्वारा भी पारित किया जाना अनिवार्य है।
2. 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यह ऐतिहासिक निर्णय दिया था कि संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की असीमित शक्ति है, और संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) का सिद्धांत केवल विधायी कानूनों (Ordinary Laws) पर लागू होता है, संविधान संशोधनों पर नहीं।
3. 'मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि संविधान का अनुच्छेद 368 स्वयं अपनी संशोधन शक्ति को असीमित या व्यापक बनाने के लिए संशोधित नहीं किया जा सकता, तथा न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) संविधान की मूल संरचना का एक अनिवार्य हिस्सा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष (Provisional President) कौन चुने गए थे?
→
भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'हरित बांड' (Green Bonds) और भारत में उनके नियमन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हरित बांड एक प्रकार का निश्चित आय वाला उपकरण (Fixed-income instrument) है, जिसे विशेष रूप से जलवायु-अनुकूल और पर्यावरण के प्रति सकारात्मक परियोजनाओं, जैसे कि अक्षय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, और संधारणीय जल प्रबंधन के वित्तपोषण के लिए पूंजी जुटाने हेतु जारी किया जाता है।
2. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 'SEBI (Issue and Listing of Non-Convertible Securities) Regulations, 2021' के अंतर्गत हरित ऋण पत्रों (Green Debt Securities) के लिए विशिष्ट दिशा-निर्देश और प्रकटीकरण मानक निर्धारित किए हैं, जिसके तहत जारीकर्ता को जुटाई गई आय के उपयोग पर स्वतंत्र तृतीय-पक्षीय प्रमाणन (Third-party certification) प्राप्त करना अनिवार्य होता है।
3. भारत सरकार द्वारा संप्रभु हरित बांड (Sovereign Green Bonds) फ्रेमवर्क के तहत जारी किए गए बांडों से प्राप्त होने वाली आय को देश के समेकित निधि (Consolidated Fund of India) में जमा किया जाता है, जिसका उपयोग केंद्र सरकार के सामान्य राजकोषीय घाटे को पाटने के लिए किसी भी सरकारी उद्देश्य हेतु किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.