BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
17 views

भारतीय पर्यावरण कानून और 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) की विधिक संरचना, शक्तियों तथा न्यायिक समीक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत स्थापित एनजीटी (NGT) देश का एकमात्र ऐसा विशेष वैधानिक निकाय है जिसे पर्यावरण से जुड़े मामलों में सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) के सख्त नियमों का पालन करने से छूट प्राप्त है और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) के आधार पर कार्य करता है।
  2. 2. NGT को पर्यावरण से संबंधित किसी भी कानूनी अधिकार के प्रवर्तन या प्रदूषण और अन्य पर्यावरणीय क्षति से जुड़े मामलों में आदेश, निर्देश या निर्णय देने की व्यापक शक्ति प्राप्त है, किंतु यह अधिकरण संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारक्षेत्र की तरह स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने की विधिक शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकता है, जब तक कि कोई औपचारिक याचिका या आवेदन न दायर किया जाए।
  3. 3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण के किसी आदेश, निर्णय या पुरस्कार के विरुद्ध अपील सीधे उच्चतम न्यायालय में ही की जा सकती है, और अधिकरण के निर्णय के खिलाफ देश के किसी भी उच्च न्यायालय के समक्ष रिट अधिकारक्षेत्र (Article 226/227) के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत स्थापित NGT सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) के सख्त नियमों से बाध्य नहीं है और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के आधार पर कार्य करता है। कथन 2 सही है: NGT अधिनियम, 2010 के मूल प्रावधानों के अनुसार अधिकरण को स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने की स्पष्ट शक्ति प्राप्त नहीं थी (यद्यपि हाल के कुछ न्यायिक मामलों में इस पर चर्चा हुई है, किंतु वैधानिक रूप से यह औपचारिक याचिकाओं पर ही कार्य करता है और उच्च न्यायालयों की तरह अनुच्छेद 226 जैसी व्यापक स्वतः संज्ञान शक्ति इसमें निहित नहीं मानी जाती)। कथन 3 गलत है: राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 22 के अनुसार NGT के आदेश के खिलाफ अपील सीधे उच्चतम न्यायालय में की जा सकती है, किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि उच्च न्यायालयों का संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 के तहत प्राप्त न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का अधिकार समाप्त हो गया है। मद्रास उच्च न्यायालय और अन्य निर्णयों में यह स्पष्ट किया गया है कि NGT के आदेशों के विरुद्ध संबंधित उच्च न्यायालयों में रिट याचिका दायर की जा सकती है।
Share:

Related Questions

→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 312' के अंतर्गत 'अखिल भारतीय सेवाओं' (All India Services) के सृजन और उनकी विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ और राज्यों के लिए संयुक्त रूप से एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाओं (जिनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा शामिल हैं) का सृजन कर सके, बशर्ते कि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित करे कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक है। 2. भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service - IFS) को वर्ष 1966 में 'अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951' के तहत संसद द्वारा एक नई अखिल भारतीय सेवा के रूप में सृजित किया गया था, और वर्तमान में संविधान के तहत कुल चार (4) अखिल भारतीय सेवाएं अस्तित्व में हैं। 3. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की सेवा की शर्तें और उनके वेतन-भत्ते आदि संसद द्वारा निर्धारित किए जाते हैं, किंतु इन सेवाओं के अधिकारियों पर अनुशासनात्मक नियंत्रण (Disciplinary Control) और अंतिम दंडात्मक कार्रवाई करने की शक्ति केवल संबंधित राज्य सरकारों के पास होती है, केंद्र सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत् विकास के संदर्भ में, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा संचालित मौद्रिक नीति और उसके 'साख नियंत्रण उपकरणों' (Credit Control Instruments) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मात्रात्मक साख नियंत्रण उपकरणों (Quantitative Instruments) के अंतर्गत 'वैधानिक तरलता अनुपात' (SLR) वह न्यूनतम प्रतिशत है जो प्रत्येक वाणिज्यिक बैंक को अपनी कुल मांग और समय देयताओं (NDTL) का एक निश्चित हिस्सा तरल परिसंपत्तियों (जैसे नकदी, स्वर्ण या अनुमोदित प्रतिभूतियों) के रूप में अपने पास रखना होता है, जिसे RBI के पास रखना अनिवार्य होता है। 2. गुणात्मक या चयनात्मक साख नियंत्रण उपकरणों (Qualitative/Selective Instruments) के तहत 'सीमांत आवश्यकता' (Margin Requirement) ऋण के लिए गिरवी रखी गई संपार्श्विक (Collateral) संपत्ति के बाजार मूल्य और बैंक द्वारा उस संपत्ति के एवज में दिए जाने वाले ऋण के बीच का अंतर होता है, जिसे अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के दौरान बढ़ा दिया जाता है। 3. 'सीमांत स्थायी सुविधा' (MSF) एक ऐसी व्यवस्था है जिसके अंतर्गत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक अपनी कुल NDTL के एक निश्चित प्रतिशत तक की आपातकालीन अल्पकालिक तरलता की कमी को पूरा करने के लिए RBI से रेपो रेट से भी अधिक ब्याज दर पर ओवरनाइट ऋण प्राप्त कर सकते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline - NIP) और 'पीएम गति शक्ति' (PM GatiShakti) राष्ट्रीय मास्टर प्लान के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) एक अंतर-मंत्रालयी कार्यदल द्वारा तैयार की गई एक पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्तपोषित करना है, जिसमें कुल अनुमानित व्यय का सबसे बड़ा हिस्सा ऊर्जा (Energy) क्षेत्र के लिए आवंटित किया गया है। 2. 'पीएम गति शक्ति' राष्ट्रीय मास्टर प्लान को multimodal connectivity के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में लॉन्च किया गया है, जिसके तहत देश के सभी आर्थिक क्षेत्रों और अवसंरचना परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन में विभिन्न मंत्रालयों तथा राज्य सरकारों के बीच समन्वय स्थापित किया जाता है। 3. 'पीएम गति शक्ति' योजना केवल सड़क, रेलवे और विमानन जैसे परिवहन के केंद्रीय मंत्रालयों तक सीमित है और इसमें ग्रामीण विकास, कृषि तथा पर्यावरण से जुड़े राज्य-स्तरीय बुनियादी ढांचे के डेटा को शामिल नहीं किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → क्या राष्ट्रपति संविधान संशोधन विधेयक के लिए संयुक्त बैठक बुला सकते हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' (राजभाषा - अनुच्छेद 343 से 351) और उससे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार, संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा इसके अतिरिक्त अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप (International form of Indian numerals) होगा, किंतु संसद को यह अधिकार दिया गया है कि वह विधि द्वारा पंद्रह वर्ष की अवधि (1965 तक) के बाद भी सरकारी प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा के निरंतर प्रयोग को प्राधिकृत कर सके। 2. संविधान की 'आठवीं अनुसूची' में मूल रूप से चौदह भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से बढ़ाया गया, जिसके तहत वर्ष 2003 के 92वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाओं को शामिल किए जाने के पश्चात वर्तमान में इस अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ मान्यता प्राप्त हैं। 3. संविधान के अनुच्छेद 351 के अनुसार, यह संघ का कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति (Composite culture) के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके, और इसके विकास के लिए उसे अन्य भारतीय भाषाओं - विशेष रूप से संस्कृत से - शब्दावली ग्रहण करने का निर्देश दिया गया है, न कि किसी अन्य विदेशी भाषा से।
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.