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भारतीय पर्यावरण कानून और 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) की विधिक संरचना तथा क्षेत्राधिकार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत स्थापित एनजीटी (NGT) को पर्यावरण से जुड़े उन विशिष्ट सिविल मामलों में न्यायनिर्णयन की व्यापक शक्ति प्राप्त है जो अधिनियम की अनुसूची I में सूचीबद्ध सात पर्यावरण कानूनों के प्रवर्तन से संबंधित हैं, किंतु इसके पास वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत आने वाले मामलों पर विचार करने का अधिकार नहीं है।
- 2. 'सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ' या NGT से जुड़े अन्य न्यायिक निर्णयों में यह स्पष्ट किया गया है कि अधिकरण के पास अपने आदेशों, निर्देशों या निर्णयों की अवमानना के लिए सिविल अवमानना (Civil Contempt) के तहत दंडित करने की वही शक्ति प्राप्त है जो देश के उच्च न्यायालयों को होती है।
- 3. 'मद्रास बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ' और NGT की कार्यप्रणाली से जुड़े मामलों में उच्चतम न्यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया है कि अधिकरण के किसी भी आदेश, निर्णय या पुरस्कार के विरुद्ध अपील सीधे भारत के उच्चतम न्यायालय में ही की जा सकती है, और NGT के फैसलों के खिलाफ देश के किसी भी उच्च न्यायालय के समक्ष संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकारक्षेत्र का प्रयोग नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 14 के अनुसार, NGT को पर्यावरण से जुड़े उन सिविल मामलों में अधिकार प्राप्त है जो अधिनियम की अनुसूची I में सूचीबद्ध सात कानूनों (पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, वन संरक्षण अधिनियम, सार्वजनिक दायित्व बीमा अधिनियम आदि) से संबंधित हैं। दिलचस्प बात यह है कि 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' और 'भारतीय वन अधिनियम, 1927' को NGT अधिनियम की अनुसूची I में शामिल नहीं किया गया है, इसलिए NGT को सीधे इनके तहत आने वाले मामलों पर विचार करने का अधिकार नहीं है। कथन 2 गलत है: NGT अधिनियम, 2010 की धारा 25 के तहत अधिकरण को अपने आदेशों या निर्णयों के निष्पादन के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के तहत शक्तियाँ तो प्राप्त हैं, किंतु अधिकरण के पास 'अदालत की अवमानना' (Contempt of Court) के तहत दंडित करने की अंतर्निहित शक्ति (Inherent Power of Contempt) प्राप्त नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने विभिन्न मामलों में स्पष्ट किया है कि वैधानिक निकायों को तब तक अवमानना का अधिकार नहीं मिलता जब तक कि उनके गठन संबंधी अधिनियम में इसका स्पष्ट और विशिष्ट प्रावधान न हो। कथन 3 सही है: राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 22 के अनुसार, NGT के किसी भी आदेश, निर्णय या पुरस्कार के विरुद्ध अपील सीधे भारत के उच्चतम न्यायालय में 90 दिनों के भीतर की जा सकती है। इसके अलावा, न्यायिक मिषांतों के अनुसार, चूँकि NGT एक विशेषीकृत अपीलीय निकाय है, अतः इसके निर्णयों के विरुद्ध सीधे उच्च न्यायालयों में अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर करके चुनौती नहीं दी जा सकती, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय का ही दरवाजा खटखटाना पड़ता है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 312' के अंतर्गत 'अखिल भारतीय सेवाओं' (All India Services) के सृजन और उनकी संवैधानिक स्थिति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प यह पारित करती है कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो संसद विधि द्वारा अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन का प्रावधान कर सकती है।
2. इस अनुच्छेद के तहत संसद द्वारा बनाई गई किसी भी विधि को संविधान के अनुच्छेद 368 के अर्थ के अंतर्गत 'संविधान संशोधन' नहीं माना जाएगा, भले ही वह मौजूदा सेवा नियमों या राज्यों की विधायी शक्तियों को प्रभावित करती हो।
3. अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों की नियुक्ति, अनुशासनिक नियंत्रण और अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन की अनन्य शक्ति भारत के राष्ट्रपति में निहित होती है, और राज्य सरकारों को इन अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कोई विधिक अधिकार प्राप्त नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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1858 के गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट के तहत सारी वित्तीय, विधायी व प्रशासनिक शक्तियां किसे प्राप्त थीं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 263' के अंतर्गत स्थापित 'अंतर-राज्य परिषद' (Inter-State Council) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अनुसार राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि किसी समय लोक हित में ऐसा प्रतीत हो कि अंतर-राज्य परिषद की स्थापना से राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जांच, उन पर विचार-विमर्श या उनकी सामान्य हित से संबंधित विषयों की बेहतर नीतिगत रूपरेखा तैयार करने में सहायता मिलेगी, तो वह इस परिषद की स्थापना कर सकता है।
2. अंतर-राज्य परिषद एक स्थायी संवैधानिक निकाय (Permanent Constitutional Body) है जिसका गठन संविधान के लागू होने के साथ ही वर्ष 1950 में कर दिया गया था, और यह अनिवार्य रूप से सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों की एक अनिवार्य बैठक के रूप में कार्य करती है।
3. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की सिफारिशों के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति की एक औपचारिक उद्घोषणा द्वारा अंतर-राज्य परिषद की स्थापना की गई थी, जिसके अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री होते हैं और प्रधानमंत्री इसके स्थायी सदस्यों में शामिल नहीं होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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फिरोजशाह कोटला का निर्माण किसने करवाया था?
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किसने कहा था कि 'संविधान सभा कांग्रेस नहीं है और कांग्रेस संविधान सभा नहीं है'?
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