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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के अंतर्गत 'संविधान संशोधन प्रक्रिया' (Article 368) तथा न्यायिक समीक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में उच्चतम न्यायालय की 13-न्यायाधीशों की पीठ ने यह अभिनिर्धारित किया था कि संसद 'संविधान के बुनियादी ढाँचे' (Basic Structure) को नष्ट या क्षीण करने वाला कोई भी संशोधन नहीं कर सकती है।
- 2. 'मिनर्वा मिल वाद (1980)' में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का सिद्धांत, जो यह सुनिश्चित करता है कि संसद अपनी संशोधन शक्तियों का दुरुपयोग न करे, संविधान के बुनियादी ढाँचे का एक अनिवार्य और अभिन्न हिस्सा है।
- 3. संविधान (99वां संशोधन) अधिनियम, 2014 द्वारा स्थापित 'राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग' (NJAC) को 'सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-on-Record एसोसिएशन बनाम भारत संघ (2015)' मामले में उच्चतम न्यायालय ने इस आधार पर असंवैधानिक और शून्य घोषित कर दिया क्योंकि इसने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और शक्ति के पृथक्करण (Separation of Powers) के सिद्धांत को प्रभावित करते हुए संविधान के बुनियादी ढाँचे का उल्लंघन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) मामले में सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने यह प्रतिपादित किया था कि अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान में संशोधन करने की व्यापक शक्ति अवश्य प्राप्त है, परंतु इसके तहत संविधान के 'मूल ढाँचे' या 'आधारभूत लक्षणों' (Basic Structure) को बदला या नष्ट नहीं किया जा सकता है।
कथन 2 सही है: मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) के ऐतिहासिक निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट रूप से यह घोषित किया कि न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का अधिकार और शक्ति संविधान के बुनियादी ढाँचे का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और मौलिक हिस्सा है, जिसे संसद द्वारा समाप्त नहीं किया जा सकता है।
कथन 3 सही है: सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-on-Record एसोसिएशन बनाम भारत संघ (2015) - जिसे NJAC केस भी कहा जाता है - में उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने 99वें संविधान संशोधन अधिनियम और NJAC अधिनियम को असंवैधानिक करार दिया। न्यायालय ने माना कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता (Independence of the Judiciary) और शक्ति के पृथक्करण के सिद्धांत का हनन करता है, जो संविधान के मूल ढाँचे का अंग हैं। अतः तीनों कथन सही हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 368' के अंतर्गत 'संविधान संशोधन प्रक्रिया' और 'न्यायिक समीक्षा' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी उपबंध को जोड़ने, संशोधित करने या निरसित करने की शक्ति प्राप्त है, और इस अनुच्छेद के अधीन किए गए संविधान संशोधन पर भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 13' के प्रावधान लागू नहीं होते हैं।
2. ऐतिहासिक 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य' (1973) मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित 'बुनियादी ढांचा सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) के अनुसार, संसद संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है, बशर्ते वह संशोधन संविधान की मूल संरचना या बुनियादी विशेषताओं को नष्ट या क्षीण न करे।
3. 'मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ' (1980) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि संसद की संविधान संशोधन की सीमित शक्ति स्वयं संविधान के बुनियादी ढांचे का एक हिस्सा है, और 'संविधान (बयालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976' की धारा 55 को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया, जो अनुच्छेद 368 के तहत किए गए संशोधनों को किसी भी न्यायालय में प्रश्नगत किए जाने से वर्जित करती थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, प्राचीन भारतीय वास्तुकला की 'नागर शैली' (Nagara Style) और उससे जुड़े मंदिर निर्माण के विशिष्ट लक्षणों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नागर शैली के मंदिर आमतौर पर एक ऊंचे चबूतरे (जगती) पर बनाए जाते हैं, और इस शैली के मंदिरों में दक्षिण भारतीय (द्रविड़) शैली के विपरीत आमतौर पर विशाल प्रवेश द्वार (गोपुरम) और विशाल प्राचीर दीवारों (Boundary walls) की अनुपस्थिति होती है।
2. नागर शैली के मंदिरों का मुख्य शिखर (Garbhagriha tower) घुमावदार रेखीय होता है, जिसे 'शिखर' कहा जाता है, जिसके शीर्ष पर एक गोलाकार, कुशन जैसी आकृति वाली संरचना होती है जिसे 'आमलक' (Amalaka) कहा जाता है, और आमलक के ऊपर कलश स्थापित किया जाता है।
3. ओडिशा के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर (कोणार्क) और खजुराहो के मंदिर नागर शैली के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, तथा ओडिशा वास्तुकला में मुख्य मंदिर के सामने बनाए जाने वाले सभा मंडप को 'मंडप' कहा जाता है, जबकि नागर शैली के अन्य क्षेत्रों में इसे 'जगमोहन' के नाम से जाना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सतत विकास का मुख्य अर्थ क्या है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' (निर्वाचन - अनुच्छेद 324 से 329क) तथा राजनीतिक दलों के पंजीकरण एवं दलबदल विरोधी कानून (अनुच्छेद 102(2) और 191(2), एवं दसवीं अनुसूची) के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29क के तहत भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) को राजनीतिक दलों के पंजीकरण की शक्ति प्रदान की गई है, किंतु निर्वाचन आयोग को यह वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है कि वह किसी पंजीकृत राजनीतिक दल को उसके द्वारा आंतरिक लोकतंत्र का पालन न किए जाने या अपने संविधान में संशोधन करने के बाद उसे समय पर सूचित न करने पर उसकी मान्यता को रद्द (De-register) कर सके।
2. संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत 'दलबदल' (Defection) के आधार पर संसद या राज्य विधानमंडल के किसी सदस्य की अयोग्यता का प्रश्न यदि उठता है, तो उस सदन के सभापति या अध्यक्ष (Chairman or Speaker) का निर्णय अंतिम होता है, और सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णय (किहोटो होलोहन मामला, 1992) में यह स्पष्ट किया था कि पीठासीन अधिकारी का यह निर्णय न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से पूरी तरह बाहर है और इसे किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है।
3. यदि लोकसभा या राज्य विधानसभा का कोई निर्वाचित सदस्य किसी राजनीतिक दल का सदस्य है और वह स्वेच्छा से उस राजनीतिक दल की सदस्यता छोड़ देता है या सदन में अपने दल के व्हिप (Whip) के विपरीत मतदान करता है तथा उसके इस आचरण को संबंधित राजनीतिक दल द्वारा पंद्रह दिनों के भीतर क्षमा नहीं किया जाता है, तो वह सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य हो जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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