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भारतीय अर्थव्यवस्था में 'कोर इन्फ्लेशन' (Core Inflation) और 'शीर्ष मुद्रास्फीति' (Headline Inflation) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. शीर्ष मुद्रास्फीति (Headline Inflation) अर्थव्यवस्था में सभी वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य स्तर में होने वाले कुल परिवर्तन को मापती है, जिसके अंतर्गत अत्यधिक अस्थिर रहने वाले खाद्य पदार्थों (Food items) और ऊर्जा (ईंधन एवं बिजली) के मूल्यों को भी शामिल किया जाता है।
- 2. कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) की गणना करते समय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) या थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की टोकरी से उन वस्तुओं और उत्पादों को बाहर कर दिया जाता है जिनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव या मौसमी कारकों के कारण अत्यधिक अस्थिर होती हैं।
- 3. भारत में मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा मुद्रास्फीति के लक्ष्य निर्धारण (Inflation Targeting) और ब्याज दर से जुड़े नीतिगत निर्णयों के लिए मुख्य रूप से कोर इन्फ्लेशन को ही एकमात्र आधिकारिक संकेतक के रूप में उपयोग किया जाता है, जबकि शीर्ष मुद्रास्फीति की उपेक्षा की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: शीर्ष मुद्रास्फीति (Headline Inflation) उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित कुल मुद्रास्फीति को दर्शाती है, जिसमें खाद्य और ईंधन जैसी अत्यधिक अस्थिर वस्तुएं भी शामिल होती हैं।
कथन 2 सही है: कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) में खाद्य और ऊर्जा (ईंधन) जैसे अस्थिर घटकों को हटा दिया जाता है ताकि मुद्रास्फीति के दीर्घकालिक और अंतर्निहित (underlying) रुझान का सटीक आकलन किया जा सके।
कथन 3 गलत है: भारत में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण के लिए 'शीर्ष मुद्रास्फीति' (विशेषकर संयुक्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक - CPI Combined) को आधिकारिक बेंचमार्क के रूप में उपयोग करती है, न कि केवल कोर इन्फ्लेशन को। अतः कथन 3 असत्य है।
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भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1919 के 'मॉण्टग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार' (Montagu-Chelmsford Reforms) और उनके अंतर्गत स्थापित 'द्वैध शासन प्रणाली' (Dyarchy) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मॉण्टग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों के आधार पर भारत सरकार अधिनियम, 1919 पारित किया गया, जिसके तहत प्रांतीय विषयों को दो भागों—'आरक्षित' (Reserved) और 'हस्तांतरित' (Transferred) में विभाजित किया गया, जहाँ आरक्षित विषयों का प्रशासन गवर्नर द्वारा कार्यकारी पार्षदों की सहायता से किया जाता था जो प्रांतीय विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी नहीं थे।
2. हस्तांतरित विषयों में स्वास्थ्य, शिक्षा, स्थानीय स्वशासन और कृषि जैसे विषय शामिल किए गए थे, जिनका प्रशासन गवर्नर द्वारा मंत्रियों की सहायता से चलाया जाता था, और ये मंत्री प्रांतीय विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी होते थे तथा विधानमंडल द्वारा हटाए जा सकते थे।
3. इस अधिनियम के तहत केंद्र स्तर पर भी द्वैध शासन प्रणाली लागू की गई, जिसके अंतर्गत केंद्रीय विधानमंडल को दो सदनों (राज्य परिषद और केंद्रीय विधानसभा) में विभाजित किया गया तथा गवर्नर-जनरल को यह पूर्ण अधिकार दिया गया कि वह विधानमंडल द्वारा अस्वीकृत किए गए किसी भी विधेयक को कानून के रूप में प्रख्यापित (Certify) कर सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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स्वतंत्र भारत में प्रशासनिक सुधारों और लोक सेवाओं के अध्ययन के संदर्भ में, वर्ष 1966 में गठित 'प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग' (First Administrative Reform Commission - ARC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस आयोग के प्रथम अध्यक्ष मोरारजी देसाई थे, लेकिन उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद हनुमानंथैया (K. Hanumanthaiah) को इस आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था।
2. इस आयोग ने केंद्र और राज्य स्तर पर 'लोकपाल' और 'लोकआयुक्तालय' जैसी संस्थाओं के गठन की जोरदार सिफारिश की थी, ताकि मंत्रियों और उच्च लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच की जा सके।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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लंदन शहर किस नदी के किनारे स्थित है?
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भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1920-1922 के दौरान चलाए गए 'असहयोग आंदोलन' (Non-Cooperation Movement) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920) में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का कांग्रेस द्वारा औपचारिक रूप से समर्थन और अनुमोदन किया गया था, जहाँ सी.आर. दास ने इस प्रस्ताव को स्वयं प्रस्तावित किया था, जबकि इसके ठीक पहले कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में लाला लाजपत राय ने इस आंदोलन के प्रस्ताव को प्रस्तुत किया था।
2. आंदोलन के दौरान कार्यक्रम के सकारात्मक पहलुओं (Constructive Programmes) पर भी विशेष बल दिया गया, जिसके अंतर्गत देश भर में राष्ट्रीय विद्यालयों और कॉलेजों की स्थापना की गई, सरकारी अदालतों का बहिष्कार करते हुए पंचायतों के माध्यम से आपसी विवादों का निपटारा किया गया, और खादी के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ 'अस्पृश्यता निवारण' को भी इसके मुख्य एजेंडे में शामिल किया गया।
3. फरवरी 1922 में गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा नामक स्थान पर हुई हिंसा की घटना से क्षुब्ध होकर महात्मा गांधी ने कांग्रेस की कार्य समिति की सहमति के बिना ही व्यक्तिगत रूप से एकतरफा निर्णय लेते हुए बारդोली (Bardoli) में असहयोग आंदोलन को अचानक स्थगित करने की घोषणा कर दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' के अंतर्गत 'अखिल भारतीय सेवाएँ' तथा 'लोक सेवा आयोग' (अनुच्छेद 315 से 323) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 315 के अनुसार संघ के लिए एक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) होगा, किंतु दो या अधिक राज्य यह करार कर सकते हैं कि उनमें से प्रत्येक राज्य के लिए एक संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JPSC) हो, जिसका गठन संसद द्वारा विधि बनाकर किया जाता है, न कि राष्ट्रपति के आदेश द्वारा।
2. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को राष्ट्रपति के आदेश द्वारा उसके पद से उसी रीति से हटाया जा सकता है जिस रीति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, तथा कदाचार के आरोपों की स्थिति में राष्ट्रपति को मामले को उच्चतम न्यायालय के पास जाँच के लिए भेजना अनिवार्य होता है, और न्यायालय की सलाह राष्ट्रपति पर बाध्यकारी होती है।
3. राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के अध्यक्ष या सदस्य को उसके पद से हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास है, राज्यपाल के पास नहीं, भले ही उनकी नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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