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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संरक्षण के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (National Biodiversity Authority - NBA) तथा 'जैव विविधता प्रबंधन समितियों' (Biodiversity Management Committees - BMCs) के कार्यों एवं विधिक शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत देश के सभी स्थानीय निकायों (चाहे वे ग्रामीण हों या शहरी) के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे अपने स्थानीय स्तर पर जैविक संसाधनों के संरक्षण, सतत उपयोग और दस्तावेजीकरण के लिए जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) का गठन करें।
- 2. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) को जैव विविधता अधिनियम के उल्लंघन से जुड़े मामलों की जांच करते समय 'सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908' के तहत किसी गवाह को समन भेजने, उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने और दस्तावेजों के प्रकट करने या उनका उत्पादन करने की मांग करने के मामले में एक सिविल कोर्ट (दीवानी अदालत) की शक्तियां प्राप्त होती हैं।
- 3. जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित 'राष्ट्रीय जैव विविधता निधि' (National Biodiversity Fund) का उपयोग केवल और केवल केंद्रीय स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों के वेतन और कार्यालय के रखरखाव के लिए किया जा सकता है, तथा इस निधि का एक भी हिस्सा स्थानीय समुदायों या लाभ-साझाकरण (Benefit Claimants) के कल्याण के लिए उपयोग में नहीं लाया जा सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 41 के अनुसार, भारत के सभी स्थानीय निकायों (पंचायत और नगरपालिका स्तर पर) के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में जैविक संसाधनों के संरक्षण, सतत उपयोग और पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (PBR) के तैयार करने हेतु जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) का गठन करें। कथन 2 सही है: जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 50 के प्रावधानों के तहत, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) या राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBB) को अधिनियम के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का निर्वहन करते समय 'सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908' के अधीन मुकदमों की सुनवाई के दौरान सिविल कोर्ट की कुछ विशिष्ट शक्तियां प्राप्त होती हैं, जैसे गवाहों को समन करना और दस्तावेजों की मांग करना। कथन 3 गलत है: राष्ट्रीय जैव विविधता निधि का उपयोग प्रशासनिक खर्चों के साथ-साथ मुख्य रूप से उन स्थानीय समुदायों और व्यक्तियों के कल्याण या लाभ-साझाकरण (Benefit Sharing) के लिए किया जाता है जिनके पारंपरिक ज्ञान या जैविक संसाधनों का व्यावसायिक उपयोग किया गया है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) और 'सार्वजनिक हित याचिका' (PIL) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी की जा सकती है, और इस अनुच्छेद को संविधान का 'हृदय और आत्मा' कहा गया है, जिसे राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति के आदेश द्वारा भी निलंबित किया जा सकता है।
2. 'लोकू एंड इंटरेस्ट लिटिगेशन' या सार्वजनिक हित याचिका (PIL) की अवधारणा को भारतीय न्यायशास्त्र में न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्णा अय्यर द्वारा 1980 के दशक की शुरुआत में स्थापित किया गया था, जिसके तहत 'लोकस स्टैंडी' (Locus Standi) के पारंपरिक नियम को शिथिल किया गया।
3. अधिकार पृच्छा (Quo-Warranto) वह रिट है जो किसी सार्वजनिक पद पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ जारी की जाती है, और इस रिट को प्राप्त करने के लिए याचिकाकर्ता के लिए यह साबित करना अनिवार्य होता है कि उस अवैध नियुक्ति से उसके स्वयं के किसी व्यक्तिगत विधिक अधिकार का सीधा हनन हुआ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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प्रोजेक्ट चेतक का 47वां स्थापना दिवस बीकानेर (राजस्थान) में मनाया गया। प्रोजेक्ट चेतक किस संगठन द्वारा चलाया जा रहा है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, 'संसद के विशेषाधिकार' (Parliamentary Privileges - अनुच्छेद 105 और 194) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत संसद के दोनों सदनों, उसके सदस्यों और समितियों को कुछ विशेष अधिकार और उन्मुक्तियाँ प्रदान की गई हैं, और ये विशेषाधिकार केवल तभी उपलब्ध होते हैं जब संसद सत्र में हो या विधाई कार्य चल रहा हो; सत्र के सत्रावसान या विघटन के दौरान ये स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
2. 'संसदीय विशेषाधिकारों' के अंतर्गत प्रत्येक सदन को यह अनन्य अधिकार प्राप्त है कि वह अपनी कार्यवाही के प्रकाशन को रोक सकता है और सदन के सदस्यों या बाहरी व्यक्तियों द्वारा विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) या सदन की अवमानना (Contempt of the House) के लिए उन्हें दंडित या भर्त्सना कर सकता है।
3. यद्यपि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105(3) में यह प्रावधान किया गया है कि जब तक संसद विशेषाधिकारों को संहिताबद्ध (Codify) नहीं करती है, तब तक इसके विशेषाधिकार वही माने जाएंगे जो ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के पास संविधान लागू होने के समय (26 जनवरी 1950 को) थे, तथापि आज तक भारतीय संसद द्वारा इन विशेषाधिकारों को पूरी तरह से संहिताबद्ध करने के लिए कोई व्यापक कानून नहीं बनाया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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