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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं राष्ट्रीय आय के समष्टि आर्थिक (Macroeconomic) संकेतकों के संदर्भ में, 'सकल मूल्य वर्धन' (Gross Value Added - GVA) और 'सकल घरेलू उत्पाद' (Gross Domestic Product - GDP) के मध्य संबंधों तथा उनकी गणना पद्धतियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी अर्थव्यवस्था में उत्पादक क्षेत्रों द्वारा सृजित 'सकल मूल्य वर्धन' (GVA) का आकलन करने के लिए कुल उत्पादन (Output) के मूल्य में से मध्यवर्ती उपभोग (Intermediate Consumption) के मूल्य को घटाया जाता है, और यह माप अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र) की आपूर्ति पक्ष की स्थिति को स्पष्ट करता है।
- 2. बाजार मूल्यों पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP at Market Prices) प्राप्त करने के लिए बुनियादी मूल्यों पर सकल मूल्य वर्धन (GVA at Basic Prices) में उत्पादों पर लगने वाले करों (Taxes on Products) को जोड़ा जाता है तथा उत्पादों पर दी जाने वाली सब्सिडी (Subsidies on Products) को घटाया जाता है।
- 3. भारत में केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO), जो अब राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) का हिस्सा है, द्वारा वर्तमान में आर्थिक विकास की वृद्धि दरों को मापने के लिए मुख्य रूप से कारक लागत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP at Factor Cost) को ही आधिकारिक बेंचमार्क संकेतक के रूप में उपयोग किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: सकल मूल्य वर्धन (GVA) किसी अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य (Output) में से मध्यवर्ती उपभोग (Intermediate Consumption या कच्चे माल की लागत) के मूल्य को घटाकर निकाला जाता है। यह अर्थव्यवस्था का आपूर्ति-पार्श्व (Supply-side) दृष्टिकोण प्रदान करता है।
कथन 2 सही है: बाजार मूल्यों पर GDP और GVA के बीच का संबंध इस प्रकार है: GDP at Market Prices = GVA at Basic Prices + उत्पादों पर कर (Taxes on Products) - उत्पादों पर सब्सिडी (Subsidies on Products)।
कथन 3 गलत है: फरवरी 2015 में भारत ने राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी के बेस ईयर (2011-12) में संशोधन के साथ अंतरराष्ट्रीय मानकों (SNA 2008) के अनुरूप जीडीपी मापने के लिए 'कारक लागत पर जीडीपी' (GDP at Factor Cost) के पुराने कॉन्सेप्ट को त्याग दिया और अब मुख्य रूप से 'बाजार मूल्यों पर सकल घरेलू उत्पाद' (GDP at Market Prices) और 'बुनियादी मूल्यों पर GVA' (GVA at Basic Prices) का उपयोग आर्थिक वृद्धि के संकेतक के रूप में करता है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 108' के अंतर्गत संसद के 'संयुक्त अधिवेशन' (Joint Sitting) की प्रक्रिया और उसके संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 108 दोनों सदनों के बीच गतिरोध की स्थिति में राष्ट्रपति को संसद के संयुक्त अधिवेशन आहूत करने की शक्ति प्रदान करता है, और यह प्रावधान धन विधेयक (Money Bill) तथा संविधान संशोधन विधेयक (Constitutional Amendment Bill) दोनों पर समान रूप से लागू होता है।
2. संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) द्वारा की जाती है, और उनकी अनुपस्थिति में लोकसभा के उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) तथा उनकी भी अनुपस्थिति में राज्य सभा के उपसभापति (Deputy Chairman) द्वारा इसकी अध्यक्षता की जाती है; किंतु राज्य सभा के सभापति (Chairman/Vice-President) कभी भी संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता नहीं कर सकते हैं।
3. संयुक्त अधिवेशन में कोई भी नया संशोधन विधेयक में तब तक प्रस्तावित नहीं किया जा सकता है जब तक कि वह विधेयक दोनों सदनों में गतिरोध का मूल कारण न रहा हो, सिवाय उन संशोधनों के जो समय बीतने के कारण आवश्यक हो गए हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 323A' और 'अनुच्छेद 323B' के अंतर्गत स्थापित 'प्रशासनिक अधिकरणों' (Administrative Tribunals) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 323A के तहत संसद को केवल संघ के मामलों और उसके अधीन लोक सेवाओं में लगे व्यक्तियों के विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए प्रशासनिक अधिकरण स्थापित करने की शक्ति प्राप्त है, जबकि अनुच्छेद 323B के तहत संसद और राज्य विधानमंडल दोनों को कराधान, विदेशी मुद्रा, आयात-निर्यात और श्रम जैसे अन्य विशिष्ट विषयों के लिए अधिकरण स्थापित करने की शक्ति प्रदान की गई है।
2. 'चंद्र कुमार बनाम भारत संघ (1997)' मामले में उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने यह व्यवस्था दी थी कि प्रशासनिक अधिकरणों (Tribunals) के निर्णय अंतिम हैं और उनके आदेशों के विरुद्ध उच्च न्यायालयों के 'अनुच्छेद 226' के तहत रिट क्षेत्राधिकार (Writ Jurisdiction) का मार्ग पूरी तरह से वर्जित है।
3. अधिकरणों (Tribunals) के सदस्यों की नियुक्ति और सेवा शर्तों के संबंध में संसद को यह असीमित शक्ति प्राप्त है कि वह न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांत को दरकिनार करते हुए कार्यकारी नियंत्रण को सर्वोच्च बना सकती है और इसके लिए किसी स्वतंत्र चयन समिति की आवश्यकता नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 124' के अंतर्गत 'उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति' और इसके लिए 'कॉलेजियम प्रणाली' के विकास से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के मूल पाठ में यह प्रावधान था कि उच्चतम न्यायालय के प्रत्येक न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के ऐसे न्यायाधीशों से परामर्श करने के पश्चात की जाएगी, जिनसे परामर्श करना राष्ट्रपति के लिए संवैधानिक रूप से अनिवार्य था।
2. 'द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993)' में उच्चतम न्यायालय की नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह निर्णय दिया था कि 'परामर्श' (Consultation) शब्द का अर्थ 'सहमति' (Concurrence) है, और इसके तहत मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम की राय राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी होगी।
3. 'नब्बेवां संविधान संशोधन अधिनियम, 2011' के माध्यम से 'राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग' (NJAC) की स्थापना की गई थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने 'चौथे न्यायाधीश मामला (2015)' में संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन मानते हुए असंवैधानिक और शून्य घोषित कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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शिमला सम्मेलन किस योजना को क्रियान्वित करने के लिए बुलाया गया था?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 355' और 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत केंद्र के दायित्वों तथा राष्ट्रपति शासन के प्रयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत यह संघ का कर्तव्य है कि वह बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की रक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार इस संविधान के उपबंधों के अनुसार चलाई जाए।
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3. 'एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994)' के ऐतिहासिक मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह व्यवस्था दी थी कि अनुच्छेद 356 के तहत राज्य विधानसभा का विघटन केंद्र द्वारा राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद ही किया जा सकता है, उससे पहले नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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