त्वरित लिंक्स
Civil services
14 views
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 352' के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) की उद्घोषणा, इसके अनुमोदन और इसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर ही नहीं, बल्कि ऐसी आसन्न संकटापस्थिति के आधार पर भी राष्ट्रपति द्वारा पहले ही की जा सकती है, जिसके बारे में राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है कि युद्ध या बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह का आसन्न खतरा वास्तव में मौजूद है।
- 2. '44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978' के माध्यम से यह अनिवार्य किया गया कि मंत्रिमंडल (Cabinet - जिसमें प्रधानमंत्री और कैबिनेट मंत्री शामिल हैं) द्वारा राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के लिए लिखित रूप में संस्तुति दी जानी चाहिए, और संसद के दोनों सदनों द्वारा इस उद्घोषणा का अनुमोदन इसके जारी होने की तारीख से 'एक महीने' के भीतर विशेष बहुमत द्वारा किया जाना आवश्यक है।
- 3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 19' द्वारा प्रदत्त सभी छह मूल अधिकार स्वतः और बिना किसी अपवाद के निलंबित हो जाते हैं, और इसके लिए अलग से कोई कार्यकारी आदेश जारी करने की आवश्यकता नहीं होती है, भले ही आपातकाल की उद्घोषणा का आधार 'सशस्त्र विद्रोह' ही क्यों न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 352 (1) के अनुसार, राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा तब भी कर सकता है जब युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह का वास्तविक खतरा न होकर केवल 'आसन्न संकटापस्थिति' (Imminent Danger) का खतरा हो और राष्ट्रपति का ऐसा समाधान हो जाए।
कथन 2 सही है: 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा तभी कर सकता है जब प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) का निर्णय उसे लिखित रूप में संसूचित किया जाए। इसके साथ ही, इस उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा जारी होने की तारीख से 'एक महीने' (मूल रूप से दो महीने था, जिसे 44वें संशोधन द्वारा घटाकर एक महीना किया गया) के भीतर संसद के विशेष बहुमत द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है।
कथन 3 गलत है: 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के अनुसार, अनुच्छेद 19 के तहत प्रदत्त मूल अधिकार केवल तभी निलंबित हो सकते हैं जब राष्ट्रीय आपातकाल का आधार 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' (War or External Aggression) हो। यदि आपातकाल का आधार 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) है, तो अनुच्छेद 19 के अंतर्गत प्राप्त मूल अधिकार स्वतः निलंबित नहीं होते हैं। इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को आपातकाल के दौरान भी निलंबित नहीं किया जा सकता है।
Related Questions
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' (संघ - अनुच्छेद 52 से 151) के अंतर्गत 'भारत के महान्यायवादी' (Attorney General for India - AG) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार, भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और वह व्यक्ति इस पद पर नियुक्त होने के लिए अर्ह होगा जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए योग्य हो, अथवा राष्ट्रपति की दृष्टि में एक प्रख्यात विधिवेत्ता हो।
2. महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार भी है, किंतु उसे संसद में किसी भी प्रश्न पर मतदान करने का अधिकार प्राप्त नहीं होता है।
3. महान्यायवादी भारत सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार होता है, और वह एक पूर्णकालिक (Full-time) सरकारी कर्मचारी होता है, जिसके लिए यह सांविधिक रूप से अनिवार्य किया गया है कि वह अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी निजी मुकदमे या प्रैक्टिस में वकालत नहीं कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संसद के 'विशेषाधिकार प्रस्ताव' (Privilege Motion) तथा संसद सदस्यों के विशेषाधिकारों के हनन (Breach of Privilege) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विशेषाधिकार प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन के किसी भी सदस्य द्वारा उस मंत्री या सदस्य के विरुद्ध लाया जा सकता है, जिस पर यह आरोप हो कि उसने सदन या उसके किसी सदस्य के विशेषाधिकारों का हनन किया है या सदन के समक्ष तथ्यात्मक रूप से गलत, भ्रामक या तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किए गए तथ्यों के माध्यम से सदन को गुमराह किया है।
2. लोकसभा में विशेषाधिकार प्रस्ताव की ग्राह्यता (Admissibility) पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) के पास होता है, और अध्यक्ष इस मामले को सीधे तौर पर प्रारंभिक जांच के लिए 'विशेषाधिकार समिति' (Privilege Committee) के पास भेज सकते हैं या स्वयं सदन में इस पर बहस की अनुमति दे सकते हैं।
3. 'संसद में प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियम' के अनुसार, यदि किसी मंत्री के विरुद्ध विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है, तो उस संबंधित मंत्री को अपने बचाव में सदन में व्यक्तिगत स्पष्टीकरण देने का कोई संवैधानिक या प्रक्रियात्मक अवसर नहीं दिया जाता है, क्योंकि सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के तहत मंत्रिपरिषद स्वतः दोषी मानी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
IPL इतिहास में 200 विकेट लेने वाले पहले तेज गेंदबाज कौन बने हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' (पंचायतों से संबंधित - अनुच्छेद 243 से 243-O) के अंतर्गत 'जिला योजना समिति' (District Planning Committee - DPC) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243ZD के अनुसार, प्रत्येक राज्य में जिले स्तर पर एक जिला योजना समिति का गठन किया जाएगा ताकि उस जिले के लिए विकास योजनाएँ तैयार की जा सकें, और इस समिति के गठन का मुख्य संवैधानिक दायित्व राज्य विधानमंडल को सौंपा गया है जो इसके सदस्यों की संरचना और उनके निर्वाचन के संबंध में विधि का निर्माण करता है।
2. जिला योजना समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम चार-चौथाई (75 प्रतिशत) सदस्य उस जिले की पंचायतों (जिला पंचायत और मध्यवर्ती/ब्लॉक पंचायतों) तथा नगरपालिकाओं (नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों) के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से ही चुने जाने चाहिए, और इन सदस्यों का अनुपात जिले में ग्रामीण और शहरी आबादी के अनुपात के आधार पर होना चाहिए।
3. जिला योजना समिति के अध्यक्ष को उस जिले का केंद्रीय मंत्री या संबंधित राज्य का राज्यपाल नामित करता है, तथा समिति द्वारा तैयार की गई जिला विकास योजना को अंतिम रूप देने के बाद उसे सीधे केंद्र सरकार की योजना आयोग की तर्ज पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय को भेजा जाता है, जिसे राज्य सरकार द्वारा संशोधित या अस्वीकार नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया संविधान के किस अनुच्छेद में दी गई है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.