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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 25' और 'अनुच्छेद 26' के अंतर्गत प्रदत्त 'धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार' (Right to Freedom of Religion) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत अंतःकरण की स्वतंत्रता और किसी भी धर्म को मानने, आचरण करने तथा प्रचार करने का अधिकार केवल भारत के नागरिकों को ही प्राप्त है, विदेशी नागरिकों को यह अधिकार नहीं दिया गया है।
- 2. अनुच्छेद 25 के अंतर्गत 'धर्म के प्रचार करने के अधिकार' (Right to propagate) में किसी अन्य व्यक्ति को अपने धर्म में बलपूर्वक या कपटपूर्ण तरीके से धर्मान्तरित करने (Conversion) का मूल अधिकार शामिल नहीं है।
- 3. अनुच्छेद 26 के अनुसार प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी अनुभाग को धार्मिक और दान प्रयोजनों के लिए संस्थाओं की स्थापना और पोषण करने का अधिकार है, तथा इस अनुच्छेद के तहत प्राप्त अधिकार केवल सार्वजनिक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य के अधीन हैं, इन्हें 'भारत की संप्रभुता और अखंडता' के आधार पर प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत 'अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को मानने, आचरण करने तथा प्रचार करने का अधिकार' न केवल भारत के नागरिकों को बल्कि भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर सभी व्यक्तियों (नागरिकों और विदेशियों दोनों) को प्राप्त है। (तुलना के लिए, अनुच्छेद 15, 16, 19, 29 और 30 केवल नागरिकों के लिए हैं)।
कथन 2 सही है: उच्चतम न्यायालय ने '斯坦िसलास बनाम मध्य प्रदेश राज्य' वाद में यह स्पष्ट किया था कि अनुच्छेद 25 के तहत 'प्रचार करने' (Propagate) के अधिकार में किसी अन्य व्यक्ति को अपने धर्म में बलपूर्वक, प्रलोभन या कपटपूर्ण तरीके से धर्मान्तरित करने का अधिकार शामिल नहीं है। धर्म परिवर्तन से किसी अन्य व्यक्ति की अंतःकरण की स्वतंत्रता का अतिक्रमण होता है।
कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 26 के अंतर्गत धार्मिक संप्रदायों को प्राप्त अधिकार 'सार्वजनिक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य' (Public order, morality and health) के अधीन हैं। यहाँ यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अनुच्छेद 25 के विपरीत, अनुच्छेद 26 में 'भारत की संप्रभुता और अखंडता' या 'राज्य की सुरक्षा' जैसे शब्दों का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं है, लेकिन न्यायालय के अनुसार अनुच्छेद 26 के तहत प्राप्त अधिकार भी व्यापक संवैधानिक व्यवस्था और अन्य मौलिक अधिकारों के साथ सामंजस्य बिठाने के अधीन हैं; हालाँकि तथ्यात्मक रूप से इसके प्रतिबंधात्मक आधारों में 'संप्रभुता और अखंडता' सीधे तौर पर अनुच्छेद 26 के पाठ में नहीं लिखे गए हैं जैसा कि अनुच्छेद 25(1) में जोड़े गए संशोधन (16वें संशोधन, 1963 द्वारा) के बाद है। सबसे महत्वपूर्ण त्रुटि यह है कि कथन 1 गलत है, अतः विकल्प (b) सही है।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत की गई थी, और यह भारत का पहला ऐसा विशेष न्यायिक निकाय है जिसे पर्यावरण से संबंधित किसी भी सिविल मामले में उच्च न्यायालयों की तरह 'मूल क्षेत्राधिकार' (Original Jurisdiction) का प्रयोग करने की शक्ति प्राप्त है।
2. NGT के अध्यक्ष (Chairperson) और न्यायिक सदस्यों (Judicial Members) की नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के साथ परामर्श के पश्चात केंद्र सरकार द्वारा की जाती है, तथा NGT के Chairperson के रूप में केवल सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश अथवा किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ही नियुक्त किया जा सकता है।
3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, NGT पर्यावरण से संबंधित मामलों की सुनवाई करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) के सख्त नियमों से बंधा नहीं होता है, बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है, तथा NGT के आदेशों या निर्णयों के विरुद्ध केवल उच्चतम न्यायालय में ही सीधे अपील की जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, 'सामूहिक उत्तरदायित्व' (Collective Responsibility) के सिद्धांत और भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 75' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि लोकसभा द्वारा मंत्रिपरिषद के विरुद्ध 'अविश्वास प्रस्ताव' (No-confidence Motion) पारित किए जाने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना होता है, भले ही वह नीतिगत निर्णय किसी एक विशिष्ट मंत्रालय या मंत्री से संबंधित क्यों न हो।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिपरिषद के साथ-साथ राज्य की मंत्रिपरिषद (राज्य मंत्रिमंडल) भी सामूहिक रूप से राज्य की विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
3. 'सामूहिक उत्तरदायित्व' के सिद्धांत का अनुपालन करते हुए, यदि मंत्रिमंडल का कोई मंत्री किसी सरकारी निर्णय से असहमत है और वह सार्वजनिक रूप से उसकी आलोचना करना चाहता है, तो उसे अपनी असहमति व्यक्त करने की पूरी स्वतंत्रता होती है, बशर्ते वह त्यागपत्र न दे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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