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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 19' के अंतर्गत प्रदत्त 'वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' (Freedom of Speech and Expression) तथा इस पर लगाए जाने वाले 'युक्तियुक्त प्रतिबंधों' (Reasonable Restrictions) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को ही प्राप्त है, और इसमें चुप रहने का अधिकार (Right to remain silent) तथा प्रेस की स्वतंत्रता भी अंतर्निहित रूप से शामिल है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 19 के खंड (2) के तहत वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर केवल 'भारत की संप्रभुता और अखंडता', 'राज्य की सुरक्षा', 'विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध', 'सार्वजनिक व्यवस्था', 'शिष्टाचार या सदाचार' के हितों में या 'न्यायालय अवमानना', 'मानहानि' या 'अपराध उद्दीपन' के संबंध में ही युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
- 3. 'अनुच्छेद 19(2)' में उल्लिखित 'सार्वजनिक व्यवस्था' (Public Order) शब्द मूल संविधान में शामिल नहीं था, बल्कि इसे 'प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951' के माध्यम से जोड़ा गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाले अधिकार (जिसमें वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता शामिल है) केवल भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध हैं (विदेशी नागरिकों को नहीं)। उच्चतम न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों (जैसे 'बिजोए इम्मैनुअल मामला') में यह स्पष्ट किया है कि इसमें चुप रहने का अधिकार और प्रेस की स्वतंत्रता भी शामिल है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 19(2) में वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने के लिए कुल आठ आधार दिए गए हैं: भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध, सार्वजनिक व्यवस्था, शिष्टाचार या सदाचार, न्यायालय अवमानना, मानहानि और अपराध उद्दीपन (Incitement to an offence)। कथन 3 सही है: मूल संविधान में 'सार्वजनिक व्यवस्था' (Public Order), 'विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध' और 'अपराध उद्दीपन' जैसे शब्द नहीं थे। इन्हें वर्ष 1951 के प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अनुच्छेद 19(2) में जोड़ा गया था।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' (केंद्र-राज्य विधायी संबंध - अनुच्छेद 245 से 255) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 245 संसद को पूरे या भारत के किसी भी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति देता है, और इसके साथ ही यह राज्य विधानमंडलों को भी पूरे या राज्य के किसी भी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्रदान करता है, बशर्ते कि संसद द्वारा बनाए गए किसी भी बहिःक्षेत्रीय (Extra-territorial) कानून को किसी राज्य विशेष में लागू होने से पहले उस राज्य के राज्यपाल की अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य हो।
2. यदि किसी समवर्ती सूची (Concurrent List) के विषय पर संसद द्वारा बनाया गया कानून और राज्य विधानमंडल द्वारा बनाया गया कानून एक-दूसरे के प्रतिकूल (Repugnant) होते हैं, तो हमेशा संसद का कानून ही प्रभावी होगा, भले ही राज्य का कानून राष्ट्रपति की सहमति के लिए आरक्षित किया गया हो और उसे राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त हो चुकी हो।
3. संविधान के अनुच्छेद 249 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या expedient है कि संसद राज्य सूची (State List) में शामिल किसी भी विषय पर कानून बनाए, तो संसद पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए उस विषय पर कानून बना सकती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है, हालांकि इसे हर बार एक-नये संकल्प द्वारा अनिश्चितकाल तक बढ़ाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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क्या भारतीय संविधान में 'न्यायिक पुनरावलोकन' (Judicial Review) शब्द का स्पष्ट उल्लेख है?
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सुमेलित कीजिए: A-2 (अढ़ाई दिन का झोपड़ा-अजमेर), B-4 (इब्राहिम रौजा-इब्राहिम आदिल शाह द्वितीय), C-3 (अताला मस्जिद-जौनपुर), D-1 (गोल गुम्बद-बीजापुर)।
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वित्तीय आपातकाल (Financial Emergency) का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV-क' के अंतर्गत मूल कर्तव्यों (Fundamental Duties - Article 51A) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की संस्तुतियों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, तथा मूल रूप से इनकी संख्या 10 थी, जिसे बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा बढ़ाकर 11 कर दिया गया।
2. संविधान के अनुच्छेद 51A के तहत उल्लिखित सभी मूल कर्तव्य केवल भारत के नागरिकों पर ही लागू होते हैं, और इनमें से कुछ कर्तव्य प्रकृति में नैतिक (Moral) हैं जबकि अन्य नागरिक (Civic) कर्तव्य हैं, किंतु किसी भी मूल कर्तव्य के प्रवर्तन के लिए संविधान में कोई प्रत्यक्ष न्यायिक प्रक्रिया या रिट jurisdiction का प्रावधान नहीं किया गया है।
3. वर्मा समिति (1999) ने कुछ मूल कर्तव्यों के कानूनी प्रावधानों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक विधियों की पहचान की थी, जैसे कि राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, जो विभिन्न मूल कर्तव्यों के उद्देश्यों को पूरा करने में सहायता करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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