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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 323A' और 'अनुच्छेद 323B' के अंतर्गत स्थापित 'प्रशासनिक और अन्य अधिकरणों' (Tribunals) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 323A के तहत संसद को केवल संघ के मामलों और उसके अधीन लोक सेवाओं या स्थानीय प्राधिकरणों में लगे व्यक्तियों के विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए प्रशासनिक अधिकरण स्थापित करने की शक्ति प्राप्त है, जबकि अनुच्छेद 323B के तहत संसद और राज्य विधानमंडल दोनों को कराधान, विदेशी मुद्रा, औद्योगिक और श्रम विवाद जैसे अन्य विशिष्ट विषयों के लिए अधिकरण स्थापित करने की शक्ति प्रदान की गई है।
  2. 2. 'चंद्र कुमार बनाम भारत संघ (1997)' मामले में उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने यह व्यवस्था दी थी कि अधिकरणों (Tribunals) के निर्णय अंतिम हैं और उनके आदेशों के विरुद्ध उच्च न्यायालयों के 'अनुच्छेद 226' के तहत रिट क्षेत्राधिकार (Writ Jurisdiction) का मार्ग पूरी तरह से वर्जित है, जिससे उच्च न्यायालयों की न्यायिक समीक्षा की शक्ति समाप्त हो जाती है।
  3. 3. अनुच्छेद 323A के अंतर्गत स्थापित प्रशासनिक अधिकरणों के संबंध में संसद को कानून बनाने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, और इन अधिकरणों के सदस्यों की नियुक्ति तथा सेवा शर्तों के निर्धारण में न्यायिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए 'अधिकरण सुधार अधिनियम' और उससे जुड़े न्यायिक दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा भाग XIV-A जोड़ा गया, जिसमें अनुच्छेद 323A (केवल संसद द्वारा प्रशासनिक अधिकरणों की स्थापना) और अनुच्छेद 323B (संसद और राज्य विधानमंडल दोनों द्वारा कराधान, श्रम आदि विशिष्ट विषयों पर अधिकरणों की स्थापना) का प्रावधान है। कथन 2 गलत है: 'चंद्र कुमार बनाम भारत संघ (1997)' मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि उच्च न्यायालयों का 'अनुच्छेद 226' के तहत रिट क्षेत्राधिकार और सर्वोच्च न्यायालय का 'अनुच्छेद 132/136' के तहत क्षेत्राधिकार संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) का हिस्सा है, इसलिए अधिकरणों के आदेशों के विरुद्ध उच्च न्यायालयों में अपील या रिट याचिका दायर करने का मार्ग खुला रहेगा, यह वर्जित नहीं है। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 323A के तहत संसद को लोक सेवाओं से संबंधित विवादों के लिए अधिकरण स्थापित करने की शक्ति है, और इनके गठन व सेवा शर्तों में उच्चतम न्यायालय द्वारा समय-समय पर निर्धारित न्यायिक स्वतंत्रता के मानकों का पालन किया जाना आवश्यक है।
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