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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 124(4)' और 'अनुच्छेद 217(1)(b)' के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया (Impeachment/Removal Process) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुसार उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को उसके पद से हटाने का आदेश राष्ट्रपति द्वारा केवल तभी जारी किया जा सकता है जब संसद के प्रत्येक सदन द्वारा उस सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के बहुमत द्वारा समर्थित समावेदन (Address) राष्ट्रपति के समक्ष उसी सत्र में प्रस्तुत किया गया हो।
  2. 2. 'न्यायिक जाँच अधिनियम, 1968' (Judges Inquiry Act, 1968) के तहत न्यायाधीश के विरुद्ध कदाचार या असमर्थता के आरोपों की जांच के लिए लोकसभा या राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी द्वारा एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जाता है, जिसमें उच्चतम न्यायालय का एक न्यायाधीश, किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश और एक प्रख्यात न्यायविद् (Eminent Jurist) शामिल होते हैं।
  3. 3. यदि संसद के किसी सत्र के दौरान न्यायाधीश को हटाने के प्रस्ताव पर विचार चल रहा है और इस बीच लोकसभा विघटित (Dissolve) हो जाती है, तो न्यायाधीश के विरुद्ध लाया गया महाभियोग प्रस्ताव (Impeachment Motion) लैप्स (व्यपगत) हो जाता है और उसे नए सिरे से पेश करना पड़ता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 124(4) के अनुसार, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा 'उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों' के बहुमत द्वारा समर्थित समावेदन राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है, लेकिन यह आवश्यक नहीं है कि यह समावेदन 'उसी सत्र' (Same Session) में प्रस्तुत किया गया हो। 44वें संविधान संशोधन या अन्य संशोधनों के बावजूद यह प्रावधान सत्र की बाध्यता नहीं थोपता है। कथन 2 सही है: न्यायिक जाँच अधिनियम, 1968 के तहत न्यायाधीशों के विरुद्ध आरोपों की जांच के लिए एक 3-सदस्यीय समिति का गठन किया जाता है, जिसमें (i) भारत के मुख्य न्यायाधीश या उच्चतम न्यायालय का कोई अन्य न्यायाधीश, (ii) किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश, और (iii) एक प्रख्यात न्यायविद् शामिल होते हैं। कथन 3 गलत है: भारतीय संसद में न्यायाधीशों को हटाने का प्रस्ताव एक 'समावेदन' (Address) होता है, न कि कोई साधारण विधेयक (Bill)। लोकसभा के विघटन (Dissolution) पर लंबित विधेयकों के व्यपगत (Lapse) होने का नियम इस पर लागू नहीं होता है। चूंकि यह प्रस्ताव राज्यसभा में भी लाया जा सकता है और इसकी प्रक्रिया लोकसभा के विघटन से प्रभावित नहीं होती, इसलिए यह स्वतः लैप्स नहीं होता। अतः केवल कथन 2 सही है।
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