त्वरित लिंक्स
Civil services
16 views
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' के अंतर्गत प्रदत्त 'संवैधानिक उपचारों के अधिकार' तथा रिट (Writ) अधिकार क्षेत्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए निर्देश, आदेश या रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने इस अनुच्छेद को 'संविधान की आत्मा और हृदय' कहा था क्योंकि यह मूल अधिकारों को वास्तविक सुरक्षा प्रदान करता है।
- 2. जहाँ एक ओर अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी कर सकता है, वहीं दूसरी ओर अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को मूल अधिकारों के साथ-साथ 'किसी अन्य प्रयोजन' (अन्य कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन) के लिए भी रिट जारी करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है।
- 3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय जाने के अधिकार को किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है, भले ही राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 359 के तहत अन्य मूल अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित कर दिया गया हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus), परमादेश (Mandamus), प्रतिषेध (Prohibition), अधिकार पृच्छा (Quo-Warranto) और उत्प्रेषण (Certiorari) रिट जारी करने का अधिकार है। डॉ. अम्बेडकर ने इसी अनुच्छेद को संविधान का हृदय और आत्मा कहा था।
कथन 2 सही है: अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार केवल मूल अधिकारों (भाग III) के उल्लंघन तक सीमित है, जबकि अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालयों का क्षेत्राधिकार अधिक व्यापक है क्योंकि वे मूल अधिकारों के साथ-साथ किसी अन्य विधि या कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन के लिए भी रिट जारी कर सकते हैं।
कथन 3 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 359 के अनुसार, राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान राष्ट्रपति आदेश द्वारा यह घोषणा कर सकता है कि भाग III द्वारा प्रदत्त अधिकारों (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) को प्रवर्तित कराने के लिए किसी भी न्यायालय में जाने का अधिकार (अर्थात अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय की शरण लेना) निलंबित रहेगा। अतः इसे बिना किसी अपवाद के हमेशा खुला नहीं रखा जा सकता है।
Related Questions
→
सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, 'मृदा जैव कार्बन' (Soil Organic Carbon - SOC) और मृदा स्वास्थ्य के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मृदा जैव कार्बन, मृदा में मौजूद कार्बनिक पदार्थों (Organic Matter) का मुख्य घटक है, जो मुख्य रूप से पौधों के अवशेषों, सूक्ष्मजीवों और ह्यूमस के अपघटन से प्राप्त होता है तथा यह मृदा की जल-धारण क्षमता (Water Retention Capacity) को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
2. वैश्विक स्तर पर, मृदा में वायुमंडल की तुलना में काफी अधिक मात्रा में कार्बन संग्रहित होता है, और कृषि पद्धतियों जैसे कि न्यूनतम जुताई (Zero Tillage) और आवरण फसलों (Cover Crops) के उपयोग से मृदा कार्बन के क्षय को रोका जा सकता है और इसे एक 'कार्बन सिंक' के रूप में बदला जा सकता है।
3. 'ग्लोबल सॉइल पार्टनरशिप' (Global Soil Partnership) का मुख्य उद्देश्य मृदा संसाधनों के अनियंत्रित दोहन को बढ़ावा देना है ताकि औद्योगिक कृषि के माध्यम से खाद्यान्न उत्पादन को अधिकतम किया जा सके, भले ही इससे मृदा जैव विविधता और कार्बन का क्षरण क्यों न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XX' के अंतर्गत 'संविधान संशोधन प्रक्रिया' (Amendment of the Constitution) तथा 'अनुच्छेद 368' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान में संशोधन करने की शक्ति केवल संसद के पास निहित है, और इस प्रक्रिया का आरंभ संसद के किसी भी सदन में एक विधेयक प्रस्तुत करके किया जा सकता है, जिसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Prior Permission) लेना अनिवार्य होता है।
2. वे संशोधन जो देश के संघीय ढांचे (Federal Structure) को प्रभावित करते हैं, उन्हें संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत (प्रत्येक सदन के कुल सदस्यों का बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत) के साथ-साथ देश के कुल राज्यों के विधानमंडलों में से कम-से-कम आधे राज्यों द्वारा साधारण बहुमत से अनुसमर्थन (Ratification) प्राप्त होना आवश्यक होता है।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में प्रतिपादित 'संविधान की मूल संरचना' (Basic Structure of the Doctrine) के सिद्धांत के अनुसार, संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी भाग में संशोधन करने की असीमित शक्ति प्राप्त है, बशर्ते वह संशोधन प्रक्रिया निर्धारित विशेष बहुमत से पारित की गई हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, भारत में 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (National Board for Wildlife - NBWL) तथा 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' के विधिक एवं संस्थागत प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (NBWL) वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 5A के तहत स्थापित एक सांविधिक (Statutory) और शीर्ष सलाहकार निकाय है, जिसके अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते हैं, तथा इसके उपाध्यक्ष केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री होते हैं।
2. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनुसार, देश के भीतर किसी भी राष्ट्रीय उद्यान (National Park) या वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary) की सीमाओं में परिवर्तन करने अथवा किसी संरक्षित क्षेत्र के 'कोर या बफर' जोनों में किसी भी प्रकार के वाणिज्यिक या औद्योगिक विकास कार्यों को अनुमति देने के लिए 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति' (Standing Committee of NBWL) की पूर्व अनुशंसा प्राप्त करना अनिवार्य है।
3. वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2022 के माध्यम से मूल अधिनियम में किए गए संशोधनों के तहत NBWL के सदस्यों की कुल संख्या को युक्तिसंगत बनाया गया है, और यह प्रावधान किया गया है कि अब NBWL की स्थायी समिति के निर्णयों या अनुशंसाओं को चुनौती देने के लिए किसी भी नागरिक को पहले 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (NGT) के समक्ष अपील दायर करनी होगी, और NBWL के अध्यक्ष की व्यक्तिगत अनुमति के बिना सीधे सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर नहीं की जा सकती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारत के महान्यायवादी (Attorney General) का कार्यकाल क्या होता है?
→
भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'अखिल भारतीय सेवाएँ' (All India Services - Article 312) के प्रावधानों तथा उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, संसद को यह विशिष्ट अधिकार प्राप्त है कि वह राज्य सभा द्वारा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से समर्थित संकल्प के आधार पर, संघ और राज्यों के लिए एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाओं (जिनमें न्यायिक सेवा भी शामिल हो सकती है) के सृजन का उपबंध कर सके।
2. अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों का चयन केंद्र सरकार की लोक सेवा एजेंसी (संघ लोक सेवा आयोग - UPSC) द्वारा किया जाता है, उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होती है, किंतु वे कैडर नियमों के तहत विभिन्न राज्यों को आवंटित किए जाते हैं और प्रशासनिक नियंत्रण के मामले में वे पूरी तरह से केवल केंद्र सरकार के प्रति उत्तरदायी होते हैं, राज्य सरकारों का उन पर कोई disciplinary (अनुशासनात्मक) नियंत्रण नहीं होता है।
3. भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) को संविधान के प्रारंभ से ही अखिल भारतीय सेवाओं के रूप में मान्यता प्राप्त थी, जबकि 'भारतीय वन सेवा' (IFS) को वर्ष 1966 में अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 के तहत संसद द्वारा एक नई अखिल भारतीय सेवा के रूप में सृजित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.