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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं लोक वित्त के संदर्भ में, 'स्टेगफ्लेशन' (Stagflation) और इसके समष्टि आर्थिक प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. स्टेगफ्लेशन एक ऐसी दुर्लभ आर्थिक स्थिति है जिसमें उच्च मुद्रास्फीति (High Inflation) के साथ-साथ आर्थिक विकास दर में मंदी (Stagnation) और बेरोजगारी में वृद्धि एक साथ पाई जाती है, जो कि आपूर्ति-प्रेरित झटकों (Supply-side shocks) का परिणाम होती है।
- 2. मौद्रिक नीति के पारंपरिक उपकरणों के माध्यम से स्टेगफ्लेशन से निपटना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि ब्याज दरों में वृद्धि करने से मुद्रास्फीति को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन इससे पहले से ही सुस्त आर्थिक वृद्धि और बेरोजगारी की समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है।
- 3. भारत के संदर्भ में, 'थोक मूल्य सूचकांक' (WPI) और 'उपभोक्ता मूल्य सूचकांक' (CPI) दोनों का एक साथ नकारात्मक होना अनिवार्य रूप से अर्थव्यवस्था में स्टेगफ्लेशन की स्थिति की पुष्टि करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: स्टेगफ्लेशन (Stagflation) एक ऐसी आर्थिक स्थिति है जिसमें एक ही समय में आर्थिक मंदी (उत्पादन में गिरावट और उच्च बेरोजगारी) और उच्च मुद्रास्फीति (मूल्यों में वृद्धि) दोनों की स्थितियां मौजूद होती हैं। यह आमतौर पर नकारात्मक आपूर्ति झटकों, जैसे कच्चे तेल की कीमतों में अचानक भारी वृद्धि, के कारण उत्पन्न होती है।
कथन 2 सही है: केंद्रीय बैंकों के लिए स्टेगफ्लेशन से निपटना एक दुविधापूर्ण स्थिति होती है। यदि केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक नीति को कड़ा करते हैं (ब्याज दरें बढ़ाते हैं), तो निवेश और मांग में और कमी आती है जिससे बेरोजगारी और मंदी बढ़ सकती है। इसके विपरीत, मंदी से निपटने के लिए ब्याज दरें घटाने से मुद्रास्फीति और भड़क सकती है।
कथन 3 गलत है: WPI और CPI का नकारात्मक होना 'अपस्फीति' (Deflation) या मुद्रास्फीति में गिरावट का संकेत देता है, न कि स्टेगफ्लेशन का। स्टेगफ्लेशन के लिए उच्च मुद्रास्फीति का होना अनिवार्य शर्त है, जबकि WPI या CPI का नकारात्मक होना इसके विपरीत स्थिति को दर्शाता है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVI' (कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध - अनुच्छेद 330 से 342A) तथा इसके अंतर्गत 'राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग' (NCBC) से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के 102वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2018 द्वारा 'राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग' (NCBC) को एक संवैधानिक निकाय का दर्जा प्रदान किया गया और इसके लिए संविधान में नया अनुच्छेद 338B अंतःस्थापित किया गया, जिसके तहत आयोग के सदस्यों की सेवा शर्तें और पदावधि राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
2. संविधान के अनुच्छेद 342A के अनुसार राष्ट्रपति, किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में, उस राज्य के राज्यपाल से परामर्श करने के पश्चात्, लोक अधिसूचना द्वारा उन सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBCs) को विनिर्दिष्ट कर सकता है जिन्हें उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के प्रयोजनों के लिए 'पिछड़ा वर्ग' माना जाएगा।
3. 105वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2021 द्वारा अनुच्छेद 342A में संशोधन करके यह स्पष्ट किया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने स्वयं के प्रयोजनों के लिए सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की अपनी सूची (State List of SEBCs) तैयार करने और बनाए रखने का अधिकार है, और यह अधिकार केवल केंद्र सरकार या राष्ट्रपति के पास ही निहित नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'प्रवाल भित्तियों' (Coral Reefs) और उनके पारिस्थितिकी तंत्र से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रवाल (Corals) वास्तव में छोटे समुद्री invertebrates होते हैं जो 'निटेरिया' (Cnidaria) संघ से संबंधित हैं, और वे 'जूजैन्टेली' (Zooxanthellae) नामक सूक्ष्म शैवाल के साथ एक सहजीवी (Symbiotic) संबंध साझा करते हैं जो उन्हें उनका जीवंत रंग और प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से पोषण प्रदान करता है।
2. प्रवाल भित्तियों के विकास के लिए आदर्श तापमान आमतौर पर 20°C से 21°C के बीच होता है, और ये अत्यधिक खारे (Hypersaline) तथा अत्यधिक गहरे समुद्र के ठंडे पानी में सबसे अधिक पनपती हैं जहाँ सूर्य की किरणें बिल्कुल नहीं पहुँच पाती हैं।
3. जब समुद्री जल का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है या पर्यावरण में किसी अन्य प्रकार का तनाव उत्पन्न होता है, तो प्रवाल अपने ऊतकों में रहने वाले जूजैन्टेली शैवाल को बाहर निकाल देते हैं, जिससे वे सफेद रंग के हो जाते हैं, जिसे 'प्रवाल विरंजन' (Coral Bleaching) कहा जाता है, और यदि यह तनाव लंबे समय तक बना रहे तो प्रवाल की मृत्यु भी हो सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 76' के अंतर्गत 'भारत के महान्यायवादी' (Attorney General for India) के पद, अधिकारों और उसकी शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह व्यक्ति महान्यायवादी नियुक्त होने के योग्य होता है जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने की अर्हता रखता हो।
2. महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, और उसे संसद के दोनों सदनों या उसकी संयुक्त बैठक में बोलने तथा उसकी कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार है, किंतु उसे संसद में मतदान करने का कोई अधिकार नहीं है।
3. महान्यायवादी भारत सरकार का पूर्णकालिक विधि अधिकारी (Full-time legal officer) होता है, और संविधान द्वारा उसे किसी भी निजी विधिक प्रैक्टिस (Private Legal Practice) या ऐसे मामलों में सरकार के विरुद्ध सलाह देने से पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है जो भारत सरकार के हितों के प्रतिकूल हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराएँ' (Ocean Currents) और उनके निर्माण तथा जलवायु पर उनके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय धाराओं का मुख्य संचालन बल (Primary driving force) पृथ्वी का घूर्णन (Rotation of the Earth) है, और प्रचलित ग्रहों की पवनें (Prevailing Planetary Winds) इसमें कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाती हैं।
2. ठंडी महासागरीय धाराएँ उच्च अक्षांशों से भूमध्य रेखा की ओर जल प्रवाहित करती हैं, और वे आमतौर पर महाद्वीपों के पूर्वी तटों पर प्रवाहित होती हैं, जिसके परिणामस्वरूप उन क्षेत्रों में शुष्क और मरुस्थलीय परिस्थितियों का निर्माण होता है।
3. विश्व के सबसे समृद्ध और प्रमुख मत्स्य क्षेत्र (Fishing Grounds) प्रायः वहाँ पाए जाते हैं जहाँ ठंडी और गर्म महासागरीय धाराएँ आपस में मिलती हैं, क्योंकि यह स्थिति प्लवक (Plankton) के विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' (संघ - अनुच्छेद 79 से 122) के अंतर्गत 'संसद की विधायी प्रक्रिया और वित्तीय मामलों' से संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार 'धन विधेयक' (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं; तथा राज्यसभा को धन विधेयक प्राप्त होने की तारीख से चौदह दिन की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशों सहित या उसके बिना विधेयक को लोकसभा को वापस करना होता है, और यदि इस अवधि के भीतर राज्यसभा विधेयक को वापस नहीं करती है, तो उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित समझा जाता है जिसमें वह लोकसभा द्वारा पारित किया गया था।
2. अनुच्छेद 110 के उपबंधों के अनुसार यदि यह प्रश्न उठता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, तो लोकसभा के अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है, और इस निर्णय को किसी भी न्यायालय में, या संसद के किसी भी सदन में (स्वयं लोकसभा को छोड़कर), या राष्ट्रपति के समक्ष चुनौती दी जा सकती है यदि अध्यक्ष ने संविधान की प्रक्रिया का उल्लंघन किया हो।
3. संविधान के अनुच्छेद 117 के अनुसार कोई भी वित्तीय विधेयक (Financial Bill), जो अनुच्छेद 110 के खंड (क) से (च) में विनिर्दिष्ट किसी भी विषय से संबंधित है, लोकसभा में राष्ट्रपति की पूर्व संस्तुति के बिना पुनःस्थापित नहीं किया जा सकता है, किंतु राज्यसभा में ऐसे विधेयक पर विचार करते समय राष्ट्रपति की पूर्व संस्तुति का होना अनिवार्य नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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