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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 124(7)' के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों पर लगने वाले निर्बंधनों (Restrictions) और 'अनुच्छेद 128' के अंतर्गत उनकी पुनर्नियुक्ति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत के संविधान का अनुच्छेद 124(7) स्पष्ट रूप से यह उपबंध करता है कि उच्चतम न्यायालय के रूप में पद धारण करने वाला कोई भी व्यक्ति भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर किसी भी न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष pleading या अधिनियमन (act) नहीं करेगा, जिसका अर्थ है कि वे सेवानिवृत्ति के बाद देश के किसी भी उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में वकालत (Practice) नहीं कर सकते हैं।
- 2. संविधान का अनुच्छेद 128 भारत के मुख्य न्यायमूर्ति को राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उच्चतम न्यायालय के किसी भी सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को, जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए अर्हित है, उच्चतम न्यायालय की बैठकों में उपस्थित होने और सेवा करने के लिए अनुरोध करने का पूर्ण अधिकार प्रदान करता है।
- 3. अनुच्छेद 128 के अधीन उच्चतम न्यायालय की बैठकों में उपस्थित होने और सेवा करने के लिए अनुरोध किए गए किसी भी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को न्यायालय के न्यायाधीश की सभी अधिकारिता, शक्तियाँ और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, तथा उन्हें राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित वेतन और भत्ते दोनों मिलते हैं, भले ही वे पेंशन भी प्राप्त कर रहे हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(7) के अनुसार, उच्चतम न्यायालय के रूप में पद धारण करने वाला कोई भी व्यक्ति भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर किसी भी न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष वकालत या कार्य नहीं करेगा। इसका तात्पर्य यह है कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश भारत में किसी भी अदालत में प्रैक्टिस नहीं कर सकते हैं।
कथन 2 सही है: संविधान का अनुच्छेद 128 भारत के मुख्य न्यायमूर्ति (Chief Justice of India) को राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के किसी योग्य सेवानिवृत्त न्यायाधीश को उच्चतम न्यायालय की बैठकों में उपस्थित होने और सेवा करने का अनुरोध करने की शक्ति देता है।
कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 128 के तहत सेवा करने वाले सेवानिवृत्त न्यायाधीश को न्यायाधीश की शक्तियाँ और विशेषाधिकार तो मिलते हैं, तथा राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित 'भत्ते' (Allowances) प्राप्त होते हैं, लेकिन उन्हें 'वेतन' (Salary) नहीं मिलता है; वे अपनी पेंशन के हकदार बने रहते हैं और राष्ट्रपति द्वारा तय किए गए भत्ते ही उन्हें मिलते हैं। इसलिए कथन 3 गलत है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 359' के अंतर्गत आपातकाल के दौरान भाग III द्वारा प्रदत्त अधिकारों के निलंबन और इसके न्यायिक आयामों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के दौरान, राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह आदेश द्वारा अनुच्छेद 359 के तहत भाग III (मौलिक अधिकार) द्वारा प्रदत्त किसी भी अधिकार के प्रवर्तन के लिए किसी भी न्यायालय में जाने के अधिकार को निलंबित कर सकता है, किंतु इसमें अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को निलंबित नहीं किया जा सकता है।
2. अनुच्छेद 359 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया कोई भी निलंबन आदेश पूरे भारत में या उसके किसी भाग में प्रवर्तनीय हो सकता है, और ऐसे आदेश को संसद के दोनों सदनों के समक्ष उसकी स्वीकृति के लिए रखना अनिवार्य होता है।
3. ऐतिहासिक 'ए.डी.एम. जबलपुर बनाम शिवकांत शुक्ला (1976)' (हेबियस कॉर्पस मामला) में सर्वोच्च न्यायालय के बहुमत के निर्णय को बाद में 'पुट्टास्वामी वाद (2017)' और अन्य विधายनों द्वारा खारिज कर दिया गया, जिसमें यह स्थापित किया गया कि आपातकाल के दौरान भी अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 360' के अंतर्गत 'वित्तीय आपातकाल' (Financial Emergency) के प्रावधानों और प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसके जारी होने की तारीख से दो महीने के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है, और यदि इस अवधि के दौरान लोकसभा का विघटन हो जाता है, तो यह उद्घोषणा लोकसभा के पुनर्गठन के बाद अपनी पहली बैठक से 30 दिनों की समाप्ति तक अस्तित्व में बनी रहती है, बशर्ते इस बीच इसे राज्यसभा द्वारा अनुमोदित कर दिया गया हो।
2. वित्तीय आपातकाल के दौरान केंद्र सरकार को यह कार्यकारी अधिकार प्राप्त होता है कि वह किसी राज्य को भारत के वित्तीय औचित्य (Financial Propriety) के सिद्धांतों का पालन करने के लिए आवश्यक निर्देश दे सकती है, जिसके तहत राज्य के अधीन सेवा करने वाले सभी या किसी भी वर्ग के व्यक्तियों के वेतनों और भत्तों में कटौती करने का आदेश दिया जा सकता है।
3. राष्ट्रीय आपातकाल और राष्ट्रपति शासन के विपरीत, वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा को एक बार संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद, इसे वापस लेने के लिए संसद के पुनः अनुमोदन की आवश्यकता होती है और राष्ट्रपति अपनी इच्छा से इसे स्वतः निरस्त नहीं कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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